Legacy India-June 2021 | Page 41

उतनी उससे पहले कभी नहीं हुई । हां , महामारी की वजह से बेरोजगारी थोड़ी बढ़ी जरूर है , लेकिन जैसा कि प्रधानमंत्री जी का संकलप है आपदा को अफसर में बदलने का , उसके तहत कई योजनाएं धरातल पर पहुंची और गांव-गांव में रोजगारों का सृजन हुआ । मैं आपकी कमजोर विकास संभावनाओं वाली बात से सहमत नहीं हूं । मुझे लगता है हमारे देश के पास इतना सशक्त नेतृतव है कि वह देश में प्रगति की एक नई गाथा लिख सके । मेरी एक बात से शायद आप भी सहमत होंगे कि आबादी एक बहुत बड़ी समसया है जो संसाधनों को पूरा पचा जाती है । आबादी को चीन ने भी नियंत्रित किया , जबकि उसकी अर्थवयवस्ा हमसे भी कई गुना बड़ी है । सरकार ने इतनी बड़ी आबादी में कोरोना जैसी महामारी के बावजूद ग्ारीण सतर पर बहुत बड़ी संखया में मनरेगा के जरिये रोजगार उपलबध कराए । इस आबादी को इसके अलावा खाते में सीधे रुपये , मुफत राशन , मुफत इलाज , मुफत बिजली-पानी सब मिला , जिससे महामारी के दौरान उसका जीवन आसान हो गया । इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मुफत आवास की सुविधा , घर-घर शौचालय की सुविधा और सोलर लाइट की वयवस्ा । मैं आपको बताना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में सबसे जयादा आवास मेरे जनपद सीतापुर
सरकार ने इतनी बड़ी आबादी में कोरोना जैसी महामारी के बावजूद ग्ारीण सतर पर बहुत बड़ी संखया में मनरेगा के जरिये रोजगार उपलबध कराए । इस आबादी को इसके अलावा खाते में सीधे रुपये , मुफत राशन , मुफत इलाज , मुफत बिजली- पानी सब मिला , जिससे महामारी के दौरान उसका जीवन आसान हो गया ।
को मिले हैं , इसके अलावा पूरे देश में उजजवला योजना के सबसे अधिक कनेकशन मेरे जनपद में ही मिले । मैं बस इतना कहूंगा कि जब मैं अपने संसदीय क्ेत्र में जाता हूं , तो लोग कहते हैं कि इस महामारी के वक्त हर गरीब के साथी रहे हैं प्रधानमंत्री जी । प्रश्न : कया आप मानते हैं कि नोटबंदी से मची तबाही और जीएसटी का आनन-फानन लागू होना एक ऐसी अर्थवयवस्ा में ज़हर की तरह फै ल गया , जो पहले से ही बैंकिं ग प्रणाली में बड़े पैमाने पर खराब ऋणों से जूझ रही थी ? उत्तर - देखिए 1923 में , बाबासाहेब अंबेडकर ने भारतीय रुपये की समसयाओं पर
लिखी अपनी एक पुसतक में सिफारिश की थी कि रुपये की जमाखोरी और महंगाई को काबू में रखने के लिए भारतीय मुद्रा को हर 10 साल में बदल दिया जाना चाहिए । इसी उद्ेशय से नोटबंदी की गई थी , जो एक बहुत ही साहसिक फै सला था । मैं दावे के साथ यह कह सकता हूं कि नोटबंदी से के वल काले धन वाले और टेरर फं डिंग करने वाले ही परेशान हुए । यदि बात करें जीएसटी की तो यह कांग्ेस लाना चाहती थी , लेकिन कमजोर इचछा शक्ति के कारण ला न सकी । हमारी सरकार ने अपनी इचछा शक्ति के कारण जीएसटी लाया और यकीन मानिए आज छोटा वयापारी जीएसटी से बहुत खुश है । वह उस वयापक भ्रटिाचार का सामना अब नहीं कर रहा है । इससे टैकस संग्ह बढ़ा है और वयापारियों में खुशहाली आई है । आपको ज्ात है कि जीएसटी और नोटबंदी के बाद हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की । उत्तर प्रदेश के 2017 के नतीजे भी इस बात की पुपटि करते हैं कि जनता जीएसटी और नोटबंदी जैसे फै सलों से काफी खुश है । प्रश्न : अंतिम प्रश्न उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा हुआ है । आपको कया लगता है कि तमाम चुनौतियों के बीच पाटथी प्रदेश के आगामी चुनावों में कै सा प्रदर्शन करेगी ? किसके नेतृतव में उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ा जाएगा और पाटथी किस मुद्े पर चुनाव में उतरेगी ?
उत्तर- मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जो इतिहास उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 325 सीटें जीतकर रचा था वही इतिहास फिर दोहराया जाएगा । योगी जी के कु शल नेतृतव में उत्तर प्रदेश में जिस तरीके से काम हुआ है वैसा कभी नहीं हुआ । जहां तक नेतृतव की बात है तो वह शीर्ष नेतृतव तय करेगा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव किसके नेतृतव में लड़ा जाएगा । प्रधानमंत्री मोदी हमारे सवपोचच नेता हैं । मुद्ों पर आएं तो हमारा मुद्ा “ सबका साथ , सबका विकास और सबका विश्ास ” ही है । हर क्ेत्र में हमने इतना काम किया है कि हमें अपने मुद्े जनता तक ले जाने की जरूरत भी नहीं । जनता हर मुद्े पर खुद हमारी तारीफ़ करती है । �
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