Legacy India-June 2021 | Page 40

साक्षात्ार

साक्षात्ार

इसमें लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव करता रहता है ।
प्रश्न : आपकी नजर में प्रदेश की योगी सरकार ने महामारी के दौरान कै सा काम किया है , कयोंकि यह प्रदेश सरकार की आलोचना का मुखय बिंदु है , भले ही वह भारत में हो या अंतरराषरिीय मीडिया में ?
उत्तर- योगी आदितयनाथ जी की सरकार ने उत्तर प्रदेश में कोविड के दौरान बेहतरीन काम किया है , इसमें कोई शक नहीं । जैसे आबादी के हिसाब से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है । वैसे ही उत्तर प्रदेश आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राजय है । इतनी भीषण और घनी आबादी में योगी जी ने जो काम किया , उसकी तारीफ दुनिया के बड़े-बड़े संगठनों ने की है । इतनी बड़ी आबादी में कोरोना पर इतनी जलदी काबू पाना , इतनी कम मृतयु दर , देश में सबसे जयादा टीकाकरण करना । यह सब कोविड के दौरान प्रदेश सरकार की उपलपबधयां हैं । ‘ सेवा ही ’ संगठन के मूल मंत्र के साथ भाजपा के हर कार्यकर्ता , विधायक और सांसद ने अपने-अपने क्ेत्र में लोगों की बहुत सेवा की है , उनहें इस महामारी के दौरान राहत पहुंचाई है । इससे अचछा इस विपदा में प्रदेश को और कोई नहीं संभाल सकता था । बात रही आलोचना की , तो आलोचना शक्तिमान की ही होती है और शक्तिमान आलोचना से नहीं डरते । आलोचना उनकी ही होती है जो कु छ करते हैं । बिना कु छ किए न आलोचना होती है , न तारीफ़ । प्रश्न : आपने देखा है कि समाजवादी पाटथी में आंतरिक कलह से पाटथी को 2017 में बहुत नुकसान हुआ था और अब भाजपा में आंतरिक कलह की ़िबरें आ रही हैं , इसका आगामी विधानसभा चुनाव में पाटथी की सफलता पर कितना असर पड़ेरा ?
उत्तर- आपने जिस पाटथी की बात की उसमें 2017 का कलह पारिवारिक था , जिसका उद्ेशय धन का बंदरबांट था । हमारे लिए धन नहीं , देश और प्रदेश महतवपूर्ण है , संगठन महतवपूर्ण है । वैचारिक मतभेद पर मैं अपने विचार बता चुका हूं । मैं आपको यह आश्सत करना चाहता हूं कि भाजपा में कोई आंतरिक
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भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पाटथी है । सवाभाविक है कि इतने बड़े संगठन में बदलाव तो होंगे ही । चू ंकि हमारी पाटथी परिवारवाद को आगे नहीं बढ़ाती इसी वजह से हमारी पाटथी में लोकतांत्रिक ढंग से शीर्ष नेतृतव यह तय करता है कि किसे कया जिमरेदारी मिले ।
कलह नहीं है और कोई मनभेद नहीं है । भाजपा 2022 में उत्तर प्रदेश में और 2024 में देश में एक बार फिर ऐतिहासिक जीत हासिल करेगी , यह मैं आपको विश्ास दिलाता हूं ।
प्रश्न : हाल ही में पाटथी ने संगठन में प्रदेश सतर पर कई बदलाव किए हैं , गुजरात से यूपी लाये गए ए . के . शर्मा को पाटथी ने प्रदेश उपाधयक् बना दिया है , इसके राजनीतिक निहितार्थ कया हैं ?
उत्तर- जैसा कि मैंने आपसे कहा है कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पाटथी है । सवाभाविक है कि इतने बड़े संगठन में बदलाव तो होंगे ही । चू ंकि हमारी पाटथी परिवारवाद को आगे नहीं बढ़ाती इसी वजह से हमारी पाटथी में लोकतांत्रिक ढंग से शीर्ष नेतृतव यह तय करता है कि किसे कया जिमरेदारी मिले । कें द्रीय नेतृतव और प्रदेश नेतृतव जिसे योगय समझता है उसे संगठन और सरकार में पद दिया जाता है और हर कार्यकर्ता समर्पण की भावना के साथ काम करता है । हाल ही में हुए बदलाव भी पाटथी को मजबूती देंगे । ए . के . शर्मा जी में बहुत क्रता है और पनपचित तौर पर पाटथी को उनके प्रदेश उपाधयक् बनने से लाभ होगा । प्रश्न : महंगाई आज के समय की एक मुखय समसया है । जब भाजपा सत्ता में आई थी तो उसके शुरुआती कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलपबध शायद यही थी कि उसने महंगाई को काबू में रखा , भले ही इसका कारण अंतरराषरिीय बाजार में गिरती तेल की कीमतें
ही कयों न हो , लेकिन अब जब महंगाई इतनी बढ़ गई है तो कया आपको नहीं लगता कि मंदी और बेरोजगारी के बीच इस महंगाई पर लगाम लगाने की जरूरत है ?
उत्तर- जैसा कि आपने अपने सवाल में ही कहा कि हमारी सरकार ने महंगाई को अब तक काबू में रखा था और यह तथ्य है । वर्तमान समय की बात करें तो कोविड महामारी के कारण जो वित्तीय भार सरकार पर पड़ा है उसके कारण महंगाई बढ़ी जरूर है , लेकिन हम इससे भी जलदी ही पार पा लेंगे । लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता ही है कि महंगाई से लड़ने का हमने लोगों को माधयर दे दिया । सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफत राशन दिया , लोगों के खाते में सीधे रुपये डाले गए , जिससे वे महामारी के वक्त भी इससे बेहतर तरीके से लड़ सकें । मैं आपको विश्ास दिलाता हूं कि सरकार महंगाई पर भी जलदी ही काबू पा लेगी । प्रश्न : पेरिोल-डीजल के आसमान छू ते दाम कया जनता के लिए इस दौर में परेशानी की बात नहीं है ?
उत्तर- सबसे पहली बात तो यह है कि पेरिोल , डीजल और एटीएफ के दाम सरकारी नियंत्रण में नहीं हैं । यह दाम डीकं रिोल हो चुके हैं । तेल कं पनियों को यह छू ट है कि वे अंतरराषरिीय तेल की कीमतों के हिसाब से अपना दाम बढ़ा-घटा सकती हैं । दूसरी बात यह कि कें द्र सरकार का राजयों को सुझाव है कि वे पेरिोल-डीजल पर कर कम करें । देखिए हम इस पर कह सकते हैं , इसे करना या न करना राजयों पर निर्भर है । कें द्र सरकार की यह कोशिश है कि पेरिोल-डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए । जैसे-जैसे राजय इसका समर्थन करेंगे तो मुझे लगता है इसमें भी राहत मिल जाएगी । प्रश्न : 2014 से पहले बेरोजगारी एक बड़ा मुद्ा था । आज सात साल बाद बेरोजगारी की समसया हर मायने में भीषण होती जा रही है । कया आप मानते हैं कि कमजोर विकास संभावनाओं के साथ , बेरोजगारी सरकार के लिए अपने मौजूदा कार्यकाल के शेष समय में सबसे बड़ा सिरदर्द है ?
उत्तर - मैं यह सपटि कर देना चाहता हूं कि पिछले सात सालों में जितनी प्रगति हुई है ,
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