Legacy India-June 2021 | Page 36

वर्श्ेषण

वर्श्ेषण

का नुकसान हुआ है ।
16 मई और 23 मई को समाप्त हुए सप्ताह में बेरोजगारी दर रिरशः 14.5 प्रतिशत और 14.7 प्रतिशत तक पहुंच गई थी , यह दर 8 मई वाले सप्ताह में मात्र 8.7 प्रतिशत थी । 30 मई को समाप्त हुए सप्ताह में शहरी क्ेत्रों में बेरोजगारी चिंताजनक शबद से भी आगे की बात है , यह दर 17.88 प्रतिशत तक पहुंच गई है । शेहरी बेरोजगारी दर लगातार सातवें सप्ताह बढ़ी है । जबकि अभी इससे और बुरा होना बाकी है । सवाल यह कि कया ये दर पिछले साल के लॉकडाउन के बाद देखे गए 27.1 प्रतिशत के उचचतम सतर तक बढ़ जाएगी ?
चिंताजनक यह है कि सामानय प्रवृत्ति के विपरीत जहां शहरी बेरोजगारी दर ग्ारीण बेरोजगारी दर से अधिक होती है , इस वक्तशहरी और ग्ारीण दोनों क्ेत्रों में बेरोजगारी दर तेजी से बढ़ रही है । शहरी बेरोजगारी दर 6 मई को दहाई का आंकड़ा पर गई थी और तब से यह लगातार बढ़ रही है और23 मई तक 12.7 प्रतिशत हो गई थी । वहींग्ारीण बेरोजगारी दर में वृद्धि मई मं9 शुरू हुई एक हालिया घटना है । यह दर 1 मई तक 7.1 प्रतिशत हो गई और फिर 23 मई तक यह और तेजी से बढ़कर 9.7 प्रतिशत तक पहुंच गई । बेरोजगारी में लगातार वृद्धि मई में रोजगार के नुकसान की संभावना को दर्शाती है । हालांकि , 30 मई को ग्ारीण बेरोजगारी दर9.58 प्रतिशतथी जो
36 Legacy India | June 2021
सीएमआईई के अनुसार श्रम भागीदारी दर ( एलपीआर ) में कोई वृद्धि नहीं हुई है , जिसकासीधा मतलब है कि रोजगार मांग रहे लोगों की संखया में वृद्धि से बेरोजगारी दर नहीं बढ़ी है , बपलक भरसक रूप से रोजगार ़ितर होने की वजह से बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है ।
पिछले सप्ताह सेकु छ बेहतर है , लेकिन ये शायद ही कोई राहत की बात है कयोंकि यह कमी ग्ारीण लोगों की श्रम भागीदारी दर में कमी आने की वजह से है ।
सीएमआईई के अनुसार श्रम भागीदारी दर ( एलपीआर ) में कोई वृद्धि नहीं हुई है , जिसकासीधा मतलब है कि रोजगार मांग रहे लोगों की संखया में वृद्धि से बेरोजगारी दर नहीं बढ़ी है , बपलक भरसक रूप से रोजगार ़ितर होने की वजह से बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है । अप्रैल 2021 में एलपीआर 39.98 प्रतिशत था और23 मई को यह 40.01 प्रतिशतहो गया । इसलिएबेरोजगारी दर में वृद्धि महीने के दौरान रोजगार में गिरावट को दर्शाती है । सनद रहे कि वलिमा बैंक के अनुसार भारत में श्रम बल 2019 में 49.5 करोड़ से भारी रूप से घटकर 2020 में 47.2 करोड़ रह गया , लेकिन बेरोजगारी बढ़ गई ।
गौर करने वाली बात यह भी है किअप्रैल
2021 में रोजगार दर 36.8 प्रतिशत थी , जो23 मई को35.8 प्रतिशत हो गई । के वल मई में ही एक करोड़ नौकरियां समाप्त हो गई,
इससे पहले अप्रैल में भी 75 लाख नौकरियां समाप्त हो गई ंथी । जनवरी 2021 से रोजगार गिर रहा है और जनवरी और अप्रैल 2021 के बीच तकरीबन 1 करोड़नौकरियां समाप्त हो गई ंथीं । मई 2021 में भी इतनी ही नौकरियां समाप्त हुई ंहैं ।
प्रमुख क्ेत्रों में घटते रोजगार
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ( सीएमआईई ) और सेंटर फॉर इकोनॉमिक डेटा एंड एनालिसिस ( सीईडीए ) के एक अनय अधययन ने भारतीय अर्थवयवस्ा की एक बीमारी की ओर इशारा किया जो न के वल लंबे समय से चली आ रही है , बपलक पिछले कु छ वषकों में बदतर हो गई है । सीएमआईई- सीईडीए रिपोर्ट ने भारत में विभिनन क्ेत्रों में रोजगारों का अधययन किया । यह वर्ष 2016 से सीएमआईई की मासिक समय-श्रृ ंखला के रोजगार के आंकड़ों पर आधारित है । इसमें सात क्ेत्रों में रोजगार डेटा का अधययन है , जैसे कृ षि , माइन , विनिर्माण , रियल एसटेट एवं निर्माण , वित्तीय सेवाएं , गैर-वित्तीय सेवाएं और सार्वजनिक प्रशासनिक सेवाएं । इन क्ेत्रों का भारत के कु ल रोजगार में99 प्रतिशत का हिससा है ।
इसमें जो सबसे अलग है , वह है विनिर्माण क्ेत्र में रोजगार । आंकड़े बताते हैं कि अर्थवयवस्ा के विनिर्माण क्ेत्र में कार्यरत लोगों की संखया 2016 में 5.1 करोड़ से घटकर 2020 में 2.7 करोड़ हो गई है , यानी के वल चार वषकों के अंतराल में लगभग आधी हो गई है । इसके अलावा निराशाजनक यह भी है कि कृ षि क्ेत्र में कार्यरत लोगों की संखया बढ़ रही है । समान रूप से निराशाजनक यह है कि गैर-वित्तीय सेवाओं ( जैसे शिक्ा और मनोरंजन उद्ोर आदि ) में रोजगार में तेजी से गिरावट आई है । ये चिंताजनक कयों हैं ? यह समझना महतवपूर्ण है कि परंपरागत रूप से भारतीय नीति निर्माताओं का यह विचार रहा है कि कृ षि में अनय्ा नियोजित शेष श्रम के रोजगार के लिए विनिर्माण क्ेत्र हमारी सबसे बड़ी आशा है । विनिर्माण अचछी
www . legacyindia . in