वर्श्ेषण
बेरोजगारी की भीषण होती समस्ा !
अक्षत मित्तल
कभी अर्थविद् जॉन मेनार्ड कें ज ने
सिखाया था कि रोजगार ही मांग की गारंटी है , लोग खर्च तभी करते हैं जब उनहें पता हो कि अगले महीने पैसा आएगा । सरल सा पसद्धांत है कि खपत ही उचच वृद्धि दर का कारक है और उचच खपत का कारक रोजगार है । पिछले कु छ हफ़तों में , हमने ऐसे कई अधययन और सववेक्ण देखे हैं जो आजीविका में बढ़ते संकट की ओर इशारा करते हैं ।
आईएलओएसटीएटी पर आधारित सीईडीए का अधययन
अंतरामाषरिीय श्रम संगठन के डेटाबेस पर आधारित सेंटर फॉर इकोनॉमिक डेटा एंड एनालिसिस ( सीईडीए ) के एक अधययन के अनुसार , भारत में बेरोजगारी दर 1991 के बाद से 2020में अपने उचचतम सतर पर पहुंच गई है । अधययन में बांगलादेश , पाकिसतान , श्रीलंका , चीन , रूस , रिाजील , अमरीका , यूनाइटेड किं गडम और जर्मनी सहित आठ अनय देशों का भी सववेक्ण किया गया । गौर करने वाली बात यह है कि भारत ने अपने निकटतम पड़ोपसयों की तुलना में सबसे अधिक बेरोजगारी दर प्रदर्शित की । यह दरचीन में 5 प्रतिशत , बांगलादेश में 5.3 प्रतिशत , पाकिसतान में 4.65 प्रतिशत और श्रीलंका में 4.84 प्रतिशत थी जबकि भारत में यह 7.11 प्रतिशत रही ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2015 और 2019 के बीच अमरीका , यूनाइटेड किं गडम और जर्मनी की तुलना में उचच बेरोजगारी दर दर्ज की है । हालांकि , अमरीका में 2020 में भारत की तुलना में बेरोजगारी दर ( 8.31 प्रतिशत ) अधिक थी । यूनाइटेड
किं गडम और जर्मनी मेंरिरशः 4.34 प्रतिशत और 4.31 प्रतिशत की बेरोजगारी दर थी ।
एसबीआई रिसर्च का डेटा
ईपीएफओ पेरोल डेटा के एक एसबीआई रिसर्च विश्ेषण से पता चलता है कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2021 में अर्थवयवस्ा में कु ल रोजगार सृजन 16.9 लाख गिर गया । हालांकि , यह संखया वित्त वर्ष 2020 के कु ल रोजगार सृजन से बेहतर है , जिसमें 28.9 लाख की गिरावट आई थी । आंकड़े इसे और पुखता करते हैं कि अर्थवयवस्ा रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं कर रही है ।
नवीनतम ईपीएफओ डेटा से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2021 में नए ईपीएफ ग्ाहक और एनपीएस का कु ल जोड़ 100.4 लाख है , जो वित्त वर्ष 2020के 102.3 लाख के मुकाबलेकम है । हालांकि , यह सही तसवीर नहीं है कयोंकि इस डेटा में किसी संस्ा से बाहर निकलने वाले उन सदसयों की संखया भी शामिल है जो फिर से बाद में संस्ा में
शामिल हो गए । एसबीआई रिसर्च के इस अधययन से पता चलता है कि नए रोजगार सृजन नहीं हुए । कु ल नए पेरोल ( पहली नौकरी ) का अनुमान दिखाता है कि वित्त वर्ष 2021 में वासतपवक कु ल नए पेरोल के वल 44 लाख हैं , जो वित्त वर्ष 2020 में उतपनन कु ल नए पेरोल की तुलना में 16.9 लाख कम हैं । सनद रहे कि वित्त वर्ष 2020 में नए पेरोल की संखया में लगभग 28.9 लाख की गिरावट आई थी । समसया यह भी है कि 44 लाख अतिरिक्त नौकरियों में से अधिकांश नौकरियां निमन गुणवत्ता वाली हैं ।
लगातार भीषण होती बेरोजगारी की समसया
हालिया आंकड़े तो और भी जयादा खतरनाक हैं , भारत में नौकरी का परिदृशय बहुत खराब होने वाला है कयोंकि देश एक बार फिर दहाई से ऊपरकी बेरोजगारी दर का सामना कर रहा है । मई में भारत में बेरोजगारी दर ( 11.90 प्रतिशत ) और भी भीषण हो गई है । जबकि कोविड-19 संरिरण की दूसरी लहर के कारण सीमित प्रतिबंधहैं , जो पहली लहर के दौरान देखे गए राषरिवयापी लॉकडाउन की तुलना में बहुत अधिक उदार हैं । सीएमआईईके आंकड़े बताते हैं कि23 मई को 30-दिवसीय औसत रोजगार दर में 100बेसिस अंकों की गिरावट आई है , जिसकामतलब मई में ही एककरोड़ नौकरियों
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