Legacy India-June 2021 | Page 32

राजनीति

राजनीति

मोदी की तरह ही

योगी को घेरने की मुहिम

त्तर प्रदेश की योगी सरकार के ' आंख-

कान-नाक ’ इस समय इसी में लगे हैं कि किस तरह से जानेलवा कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त की जा सके । किसी भी सरकार के लिए इतने लमबे समय तक महामारी से मुकाबला करना आसान नहीं होता है । पिछले साल-डेढ़ साल में कोरोना ने समाज और अर्थवयवस्ा का काफी नुकसान पहुंचाया है । भले ही समय के साथ कोरोना के ‘ जखरों ’ की पीड़ा कु छ कम हो जाए , लेकिन जिनहोंने इस महामारी में अपनों को खोया है , उनके लिए तो कोरोना की कड़वी यादों को भुलाना असंभव ही होगा । न जानें कितनी जिंदगियां तबाह हो गई ं ? कितनों के घर उजड गए । सरकार भरसक प्रयास कर रही है कि जलद से जलद पस्पतयां सामानय हो जाएं । कोरोना ऐसी महामारी है जिस पर पार पाना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं है । अभी भी कु छ राजयों और जिलों में इसका रौद्र रूप जारी है ।
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अजय कु मार
महामारी ने हमारी सवास्थय सेवाओंकी पोल खोकर रख दी तो इस बात के भी संके त दे दिए कि देश पर चाहे जितना भी बड़ा संकट या आपदा कयों न आए , कु छ भ्रटिाचारियों , ररश्तखोरों और कालाबाजारी करने वालों की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है । संकट की इस घड़ी में जब सरकार से लेकर विभिनन क्ेत्रों के तमाम छोटे-बड़े लोग महामारी का मुकाबला करने के लिए कं धे से कं धा मिलाकर समाज और सरकार को पूरा सहयोग दे रहे है , तभी कु छ लोग इसमें भी पैसा कमाने और मौका तलाशने में जुटे हैं । ऐसे लोगों पर सरकार शिकं जा कस रही है । अनेक लोग पकड़े भी जा चुके हैं , लेकिन उन लोगों का कया जिनहें आपदा की इस घड़ी में भी अपनी राजनीति चमकाने की चिंता है । आखिर जब जनता कोरोना महामारी से त्राहिमाम कर रही हो तब कोई नेता इसको अपनी सियासत चमकाने का मौका कै से बना सकता है । अब तो बात यहां तक चलने
लगी है कि पपचिम बंगाल की कहानी यूपी में दोहराई जाएगी । यह बयान किसी साधारण नेता का नहीं पूर्व मुखयरंत्री अखिलेश यादव का है , जिनहें लगता है कि बंगाल में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है । जबकि हकीकत यह है कि बीजेपी बंगाल में 03 सीटों से 77 सीटों पर पहुंच कर वहां मुखय विपक्ी दल बन गई है । यदि यूपी में भी बंगाल जैसे नतीजे आए तो यहां तो बीजेपी को अबकी से चार सौ के पास पहुंच जाना चाहिए । यह हम नहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव का चुनावी गणित बता रहा है । सवाल यही है कि जब करीब-करीब हर परिवार या उसका कोई सदसय इस समय कोरोना पीड़ित है तो उस समय उसकी पीड़ा को भूलकर कोई पाटथी या नेता चुनाव की सोच भी कै से सकता है ।
समाजवादी पाटथी प्रमुख अखिलेश यादव हों या कांग्ेस का गांधी परिवार और उसके आगे-पीछे घूमने वाली ‘ मंडली ’ के लोगों को अगर लगता है योगी सरकार को ‘ बदनाम ’ करके वह 2022 के विधान सभा चुनाव जीत सकते हैं तो यह उनकी गलतफहमी है । आज जैसी कोशिशें योगी को बदनाम किए जाने की चल रही हैं , वैसी साजिशें गुजरात के मुखयरंत्री रहते नरेनद्र मोदी के खिलाफ कांग्ेस द्ारा करीब दो दशक तक मुहिम की तरह चलाई गई थीं , जिसका नेतृतव ततकालीन कांग्ेस अधयक् सोनिया गांधी कर रही थीं , पंरतु नतीजा कया रहा । कांग्ेस गुजरात की सत्ता से तो मोदी को हटा ही नहीं पाई , उलटे मोदी प्रधानमंत्री की कु सथी पर विराजमान हो गए और कांग्ेस मोदी- मोदी करते हुए रसातल में पहुंच गई है । कु छ ऐसी ही पररपस्पतयां यूपी में पैदा की जा रही हैं । बस फर्क इतना है कि गुजरात में कांग्ेस घृणा की राजनीति का खेल , खेल रही थी और यूपी में अखिलेश यादव इसकी अगुवाई कर रहे हैं । अखिलेश को नहीं भूलना चाहिए कि भले ही वह सत्ता में न हों , लेकिन विपक् में रहते हुए भी उनकी कु छ जिमरेदारियां हैं ।
लोकतंत्र में विपक् की भूमिका भी लक्रण रेखा की तरह से निर्धारित की गई है , जिसका सभी विरोधी दलों के नेताओंको पालन करना चाहिए । यह बात अखिलेश पर भी लागू होती है आखिर वह सत्ता में न रहने के बावजूद
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