Legacy India-June 2021 | Page 27

को ठंडे बसते में रख दिया गया । वासतव में , ऐसी योजनाएं अवशय चलनी चाहिए । अगर कहीं कोई कील कांटा है तो उसे दूर करना चाहिए , कयोंकि अंततः योजना का लाभ आम जनता को ही मिलना है । अब चू ंकि दिलली में के जरीवाल की सरकार है और यह योजना अगर लागू हो जाती तो संभव है कि सरकार की लोकप्रियता और बढ़ जाती , लेकिन इसे राजनीतिक विवाद का कें द्र बना दिया गया । यह बात भी समझ से परे है कि आखिर यह योजना दिलली में कयों नहीं लागू की जा सकती , जो उपराजयपाल का तर्क है ? कया दिलली में लोग नहीं रहते ? कया वो बिजी नहीं होते ? कया हर घर में राशन पहुंचाया जाता तो दिलली के नागरिक मना कर देते ? कया दिलली में रहने वाले गरीब लोग राशन पाकर थोड़ा चैन नहीं लेते ? कहीं न कहीं मन में यह भाव जरूर होगा कि राशन के योगय लोग अगर घर बैठे राशन पा जाएंगे तो हो सकता है , आगामी विधानसभा चुनाव में वे झाड़ू छाप को ही वोट दे देते ! दरअसल , ये सियासत है ही ऐसी चीज जिसमें लोक कलयाण की भावना से किये गए कार्य को भी सियासी चशरे से देखकर पंकचर कर दिया जाता है । आज नहीं तो कल , ये सवाल जरूर पूछा जाएगा कि अगर हमारे घरों तक राशन आ रहा था तो उसे रोकने का फै सला कयों किया गया ? तब शायद किसी को जवाब देते भी न बने ।
छह जून को कया कहा था के जरीवाल ने
देश में अगर सराटमाफोन , पिजजा की डिलीवरी हो सकती है तो राशन की कयों नहीं ? आपको राशन माफिया से कया हमददथी है प्रधानमंत्री सर ? उन गरीबों की कौन सुनेगा ? कें द्र ने कोर्ट में हमारी योजना के खिलाफ आपत्ति नही की तो अब खारिज़ कयों किया जा रहा है ? कई गरीब लोगों की नौकरी जा चुकी है । लोग बाहर नही जाना चाहते , इसलिए हम घर-घर राशन भेजना चाहते हैं । कया हम कोई खराब काम कर रहे हैं ?
दिलली और कें द्र सरकार के बीच प्रारमभ से ही अनेक मुद्ों पर सियासी विरोध देखने को मिला है । अगर कोई परियोजना दिलली की
सरकार शुरू करना चाहती है तो अनेक बार ऐसा देखा गया है कि उप राजयपाल कभी उसे वापस कर देते हैं तो कभी प्रतिकू ल टिपपणी कर देते हैं । अभी हाल ही में कोरोना वैकसीन को लेकर मनीष सिसोदिया कें द्र पर हमलावर थे । उनहोंने एक प्रेस कॉनफ्ें स में कहा कि कें द्र से सवा करोड़ वैकसीन मांगे गए थे और दिया गया मात्र ढाई लाख । उनहोंने कु छ राजय सरकारों की सहायता करने के बजाय उनहें " अपशबद " कहने का आरोप लगाया । सिसोदिया ने दिलली सरकार की घर-घर राशन पहुंचाने की योजना पर कें द्र की आपत्ति को लेकर कहा कि भाजपा ‘ भारतीय झरड़ा पाटथी ’ बन गई है । कें द्र के पास कु छ राजय सरकारों को भला-बुरा कहने के अलावा कोई काम नहीं बचा है । पूरी कें द्र सरकार और भाजपा तीन-चार राजयों के मुखयरंत्रियों को निशाना बना रही है । कें द्र बस तभी काम करता है जब उचचतम नयायालय उसे फटकार लगाता है । सिसोदिया का कहना था कि चार पत्र कें द्र को भेजे गए , जिसमें दिलली को कितनी वैकसीन चाहिए , उसका लेखा-जोखा था । अब कें द्र सरकार झूठ बोल रही है कि हमने मात्र ढाई लाख वैकसीन मांगे थे । मनीष सिसोदिया ने कहा , “ मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि कें द्र सरकार झूठ कयों बोल रही है । कया ये जो चार पचरठियां कें द्र को लिखी गई हैं , ये झूठी हैं ? ” दरअसल , आम आदमी
पाटथी की सरकार जब से दिलली में चल रही है , तभी से उप राजयपाल के माधयर से ऐसे ऐसे सवाल खड़े कर दिए जाते हैं जो आम जनता को भी चौंकाते हैं । घर-घर राशन की बात हो या सरकारी सकू लों में बढ़िया शिक्ा की , मोहलला पकलपनक की बात हो या फिर जनसेवा की , आम आदमी पाटथी की सरकार कें द्र को खटकती रही है । ये खटकना सवाभाविक भी है , कयोंकि भाजपा के चाणकय हर बार दिलली में फे ल हुए हैं । दो चुनावों में ये साफ देखा गया कि कें द्र ने पूरी ताकत झोंक दी , लेकिन जनता ने के जरीवाल सरकार में ही अपना भविषय देखा । ' किसी भी कीमत ' पर जीत की चाह रखने वाली भाजपा को दिलली में के जरीवाल सरकार की लोककलयाणकारी नीतियों में भी खोट दिख रहा है तो ये अकारण नहीं है ! सबसे बड़ा कारण है भाजपा का चुनावों में पराजय और यही पराजय का बोध भाजपा से उलटे सीधे कार्य करवाता है , लेकिन ये लोकतंत्र है । जब इतने लोग कोरोना के वक्त असमय काल के गाल में चले गए तो जनता के मन में भी चल रहा है कि इतनी मौतों के लिए जिमरेदार कौन है ! देर-सबेर इसका भी फै सला हो ही जायेगा कयोंकि ये पपबलक है जो सब जानती है ।
( लेखक तीन दशक से सपरिय पत्रकारिता से जुड़े हैं , समप्रति दैनिक राषरिप्रहरी के संपादक हैं )
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