July 2026_DA | Page 49

दलित नेतमृत् के मूल सिदांत में आये बदलावों का ही नतीजा कहा जायेगा कि बसपा संसथापक कांशीराम के दौर के कई जुझारू और भरोसेमंद दलित नेता बसपा से बहार कर दिए गए और कुछ असंतुष्ट हो कर पाटटी से विमुख हो गए । राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि जाति विशेष के हित साधन और पाटटी विशेष के अहम के कारण 2017 के उत्तर प्देश के बिधानसभा चुनाव में भाजपा की प्चंड जीत और बसपा की शर्मनाक पराजय हुई ।
ल्वकास और एक समरस भारत बनाने का सपना था । इसको मूर्त रूप प्रदान करने के लिए उनहोंने पूरे मनोयोग के साथ एक सामाजिक कांलत का सूत्पात् भरी किया । हिनदू मुकसलम एकता के परिप्रेक्र में डलॉ अमबेडकर का नजरिया किसरी
भ्रम का शिकार नहीं है । समरसता के प्रति उनके ल्वशेष लगा्व का हरी इसे घोतक कहा जायेगा कि मुकसलम कट्रपंथियों के ल्वरुद्ध उनका रुख बेहद कठोर था । डलॉ अमबेडकर के समरस भारत में सनदभ्य में राष्ट्रीय स्वयं से्वक संघ करी
भूमिका को भरी कदापि नाकारा नहीं जा सकता है । डलॉ अमबेडकर और डलॉ केश्व बलिराम हेडगे्वार, दोनों हरी हिनदू समाज के संगठित होने में आ रहरी बाधाओं के निदान के पक्षधर थे । बेशक दोनों हरी ल्वलशष््ट हसताक्षरों करी सैद्धांतिक डगर अलग-अलग थरी, लेकिन मंजिल तक पहुंचने का लक्र एक था । डलॉ हेडगे्वार हिनदू समाज को संगठित होने करी आ्वाज मुखर कर रहे थे । उनका मकसद यह था कि हिनदू समाज जाति-भाषा और प्रांतरीर भेदभा्व करी संकरीर्ण सरीमाओं से निकल कर सभरी पारसपरिक ल्वद्रेर भुलाकर एकातमकता के मार्ग को एकजु्ट होकर प्रशसत करे । जातियों को संगठित करने में उनका यकरीन नहीं था ्रोंकि जातरीरता हिनदू समाज करी एकता में बाधक थरी । इसरी व्यवसथा के लन्वारण के मद्ेनजर जातियां बंधन से ऊपर उठकर पारसपरिक समरसता कायम करने के ्वह प्रबल पक्षधर थे । इसरी शाश्वत दृश्टिकोण के आलोक में राष्ट्रीय स्वयं से्वक संघ का सफर सतत जाररी है । इस अभियान में दलित, आलद्वासरी, ्वन्वासरी, पिछड़े-अगड़े सभरी शामिल हैं और समरसता करी मिसाल पेश करने में कामयाब हुए हैं ।
स्वतंत्ता मिलने के बाद गांधरी िरी ने अपने उदगार वर्त करते हुए कहा था कि स्वराज तो मिल गया पर अब हमें सुराज लगाया है । ऐसरी हकरीकत के आलोक से रूबरू करते हुए ल्वचारक, चिंतक और राष्ट्रीय स्वयं से्वक संघ के दिगदश्यक पंडित दरीनदयाल उपाधरार ने बेबाक शैलरी में रेखांकित किया है कि अगर देश ल्वकास कर रहा है और अगर इस देश के ल्वकास करी किरण हमाररी सरीढ़री पर खड़े उस अंतिम वरक्त तक नहीं पहुंच रहरी तो देश का ल्वकास बेमानरी होगा । लनकशचत हरी इन दोनों हरी महापुरषों ने अपने अपने उदगारों से देश समाज का समग् ल्वकास और मजबूत भल्वष्र बनाने करी दिशा में न सिर्फ प्रेरक मशाल दिखाई थरी, बकलक आगाह भरी किया था । एक लमबे अरसे तक सत्ता लशल्वरों से यह उदगार मुखर होते तो देखे गए लेकिन परदे के परीछे का सच यह भरी बेनकाब करता रहा कि जमरीनरी धरातल पर इसे अमल में नहीं
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