July 2026_DA | Page 48

समाज

सरीलमत कर दे । आरक्षण करी यह व्यवसथा लागू करने करी मूल मंशा यह थरी कि दलित समाज का प्रतिनिधि हरी सहरी अथवो में दलित समाज करी समसराओं, उनके हितों, परीडाओं और चिंताओं को समझ सकता है और उनके समाधान लन्वारण करी दिशा में निष्ठा और ईमानदाररी से पहल कर सकता है । स्वाल यह पैदा होता है कि ्रा दलित नेतृत्व ऐसा कर पा रहा है? इसका ि्वाब खोजने पर जो हकरीकत सामने आतरी है, ्वह बेहद निराश करने ्वालरी है । मिसालें एक नहीं अनेक हैं, जिनके आलोक में इस हकरीकत को जांचा, परखा और देखा जा सकता है । कहना गलत नहीं होगा कि दलित नेतृत्व सिर्फ दलितों के सहारे निज ल्वकास का ्वैभ्वशालरी ग्ाफ रचने में कामयाब हुआ है ।
दलितों के हितों-हकों और समग् ल्वकास करी उसे किंचित पर्वाह नहीं है । दलितों के मसरीहा माननरीर कांशरीराम ने दलित आंदोलन करी धार पैनरी कर दलितों को ल्वकास करी डगर पर आगे बढ़ने करी जुझारू मिसाल पेश करी । उनकरी धारदार पैनरी रणनरीलत के फलस्वरूप बसपा देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के सत्ता सिंघासन तक पहुंचने में कामयाब हुई । यह कांशरीराम के रणनरीलतक कौसल का हरी कमल था कि पहले उनहोंने गठबंधन करी नरीलत अपनाररी और फिर आगे चलकर अकेले दम पर बसपा ऐतिहासिक िरीत का डंका बजाते हुए सत्ता पर आसरीन होने में कामयाब रहरी । तथ्यों के आलोक में देखा जाये तो 1991 में 9.4 फरीसदरी ्वो्ट हासिल कर राजर सतर पर जहां बसपा ने राजनरीलत में अपनरी प्रतिभागिता दर्ज कराररी थरी, उसरी बसपा ने 2007 में 30.7 फरीसदरी ्वो्ट लेकर भाररी बहुमत से अपनरी ल्विर का परचम लहराया था । बसपा सुप्ररीमो माया्वतरी ने अपनरी ल्वल्वध आयामरी कामयाबरी को रेखांकित किया । नौकरशाहरी और सूबाई परिदृशर पर दलितों करी उपकसथलत और पहचान को बढ़ा्वा देने करी रणनरीलत को भरी उनहोंने अमलरी जामा पहनाया । दलितों के राजनरीलतक और आर्थिक कद को भरी उनहोंने बढ़ाया, लेकिन आम दलितों के हालत में कोई खास फर्क नहीं आया ।
सत्ताप्रसथ से लोकलुभा्वन किये गए अनेक प्रयासों के बा्विूद भूमि और मजदूररी के झगड़ों में कारगर भूमिका निभाने और असमानता-गररीबरी लन्वारण करी नरीलतरों को अमलरीिामा पहनाने में बसपा ल्वफल रहरी । प्रचंड बहुमत से सत्ता में आररी बसपा को 2012 के ल्वधानसभा चुना्व में पराजय का मुंह देखना पड़ा ।
दलित नेतृत्व के मूल सिद्धांत में आये बदला्वों का हरी नतरीिा कहा जायेगा कि बसपा संसथापक कांशरीराम के दौर के कई जुझारू और भरोसेमंद दलित नेता बसपा से बहार कर दिए गए और कुछ असंतुष््ट हो कर पार्टी से ल्वमुख हो गए । राजनरीलतक ल्वशलेरकों का मानना है कि जाति ल्वशेष के हित साधन और पार्टी ल्वशेष के अहम के कारण 2017 के उत्तर प्रदेश के
बिधानसभा चुना्व में भाजपा करी प्रचंड िरीत और बसपा करी शर्मनाक पराजय हुई । इसके मूल में गैर जा्ट्व दलित जातियों द्ारा बसपा को जात्वो करी पार्टी कहकर भाजपा को ्वो्ट देने का सच निहित है । देखा जाये तो जातिगत रोग से लगभग सभरी राजनरीलतक पाल ्टरां ग्सत हैं । भाजपा बेशक सबका साथ-सबका ल्वकास का अहसास करा रहरी है । लनकशचत हरी उसे इस संकलप सूत् का राजनरीलतक लाभ भरी हासिल हुआ है ।
्वैसे देखा जाये तो यह बात सच हरी लगतरी है कि दलितों के हितों करी लड़ाई लड़ने के मोचदे पर तैनात राजनरीलतक दल बाबा साहब अमबेडकर आंबेडकर के मूलभूत सिद्धांत से भ्टक गए हैं । बाबा साहब अमबेडकर का दलितों का समग्
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