July 2026_DA | Page 40

साहितय

दलित विषयक लेखन

इतिहास को देखने की एक नई दृष्टि

दबा-ढ़ंका सतय खुलकर आ रहा सामने दलितों और कसत्यों को इतिहास-हीन कहना गलत

शैलेन्द्र चौहान

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रतरीर समाज आदिकाल से हरी ्वर्ण व्यवसथा द्ारा नियंलत्त रहा है । ऐसा माना जाता है कि जो ्वर्ण
व्यवसथा प्रारंभ में कर्म पर आधारित थरी,
कालानतर में जाति में परर्वलत्यत हो गई । ्वर्ण ने जाति का रूप कैसे धारण कर लिया, यह ल्वचारररीर प्रश्न है । ्वर्ण व्यवसथा में गुण ्व कर्म के आधार पर ्वर्ण परर्वत्यन का प्रा्वधान था, किनतु जाति के बंधन ने उसे एक हरी ्वर्ण
या ्वग्य में रहने को मजबूर कर दिया । अब जनम से हरी वरक्त जाति के नाम से पहचाना जाने लगा । उसके व्यवसाय को भरी जाति से जोड दिया गया । जाति वरक्त से हमेशा के लिए चिपक गई और उसरी जाति के आधार पर उसे
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