लिए प्रदान किया तथा आलद्वासरी ल्वकास करी दिशा में ऐतिहासिक 15,000 करोड़ रुपये करी ्वनबंधु कलरार योजना करी घोषणा करी । यह उनकरी दूरदृकष््ट और समाज के अंतिम वरक्त तक ल्वकास पहुंचाने करी सोच का प्रमाण था । इसरी सममेलन के दौरान एक अतरंत रोचक और ऐतिहासिक प्रसंग भरी सामने आया । गणि राजेंद्र ल्विरिरी ने नरेंद्र मोदरी से कहा,“ अब आपको दिल्ली जाना चाहिए और देश करी बागडोर संभालनरी चाहिए ।” उस समय मोदरीिरी ने सहज मुसकान के साथ उत्तर दिया,“ मुझे दिल्ली कौन ले जाएगा?” किंतु संतों करी ्वाररी में एक ल्वशेष शक्त होतरी है । जो बात उस समय एक साधारण सं्वाद प्रतरीत हुई, ्वहरी कुछ वर्षों बाद भल्वष्र्वाररी के रूप में सतर सिद्ध हुई ।
उन दिनों गुजरात सलच्वालय में भरी अनेक बार जाने और मुखरमंत्री नरेंद्र मोदरी से मिलने का अ्वसर मिला । ्वहां जो सबसे अधिक प्रभाल्वत करने ्वालरी बात थरी, ्वह उनकरी कार्यसंस्कृति का प्रभा्व था । सलच्वालय में बड़े से बड़े आईएएस अधिकाररी भरी आतमानुशासन, समयपालन और स्वा्वलंबन का अद्भुत उदाहरण प्रसतुत करते थे । अपने छो्टे-छो्टे कार्य स्वयं करना, अना्वशरक तामझाम से दूर रहना, समय का सदुपयोग करना और जिममेदाररी को सर्वोपरि मानना ्वहां करी प्रशासनिक संस्कृति का हिससा बन चुका था । स्पष्ट महसूस होता था कि यह कार्यशैलरी शरीर्ष नेतृत्व करी प्रेरणा से ल्वकसित हुई है । नरेंद्र मोदरी के्वल आदेश देने ्वाले प्रशासक नहीं हैं, बकलक अपने आचरण से व्यवसथा को दिशा देने ्वाले नेतृत्वकर्ता हैं । भारत करी सबसे बडरी शक्त उसकरी यु्वा आबादरी है । यदि इस ऊर्जा को कौशल, न्वाचार और उद्लमता से जोड़ा गया तो भारत के्वल ल्वश्व करी तरीसररी सबसे बडरी अर्थव्यवसथा नहीं, बकलक ल्वश्व करी अग्रणी अर्थव्यवसथाओं में शामिल हो सकता है । इसरी प्रकार महिला शक्त को ल्वकास करी मुखरधारा में पूर्ण भागरीदाररी देकर राष्ट् निर्माण करी गति को कई गुना बढ़ाया जा सकता है । मोदरी युग करी सबसे बडरी उपलब्ध शायद आंकड़ों, परियोजनाओं या चुना्वरी िरीतों में नहीं, बकलक उस मनो्वैज्ालनक परर्वत्यन में है
जो भारत के जनमानस में दिखाई देता है । नरेंद्र मोदरी ने बारह वर्षों में ल्वकास करी संरचनाएं खडरी करी हैं, लेकिन उससे भरी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उनहोंने करोड़ों भारतरीरों के भरीतर भल्वष्र के भारत करी एक आकांक्षा जगाई है । ्वर्ष 2047 के ल्वकसित भारत का उनका संकलप तभरी साकार होगा जब ल्वकास के साथ ल्वश्वास, समृद्धि के साथ समान अ्वसर और शक्त के साथ सं्वेदनशरीलता भरी जुड़ेगरी । यदि यह संतुलन बना रहता है, तो इतिहास मोदरी युग को के्वल एक लंबे राजनरीलतक कार्यकाल के रूप में नहीं, बकलक भारत के आत्मविश्वास, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ्वैश्विक उदय के युग के रूप में याद करेगा ।
परिवर्तन के 12 वर्ष: विकास, विरासत और वैकश्क नेतमृत्
पिछले 12 वर्षों में भारत ने राजनरीलतक, सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक परर्वत्यनों का एक नया युग देखा है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदरी के नेतृत्व में ल्वकास ने के्वल गति हरी नहीं, बकलक नई दिशा और नई चेतना भरी प्रापत करी । आर्थिक सुधारों से लेकर डिजि्टल कांलत, राष्ट्रीय सुरक्षा से सामाजिक समा्वेशन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक भारत ने आतमलनभ्यरता, सुशासन और ्वैश्विक प्रतिष्ठा करी ओर उललेखनरीर यात्ा तय करी है ।“ सबका साथ, सबका ल्वकास, सबका ल्वश्वास और सबका प्रयास” के मंत् के साथ प्रारंभ हुई यह यात्ा आज“ ल्वकसित भारत 2047” के वरापक राष्ट्रीय संकलप में रूपांतरित होतरी
दिखाई देतरी है ।
आर्थिक सुधार और वित्तीय समावेशन
मोदरी सरकार करी शुरुआतरी और सबसे महत्वाकांक्षरी पहलों में ्वर्ष 2014 का“ मेक इन इंडिया” अभियान प्रमुख रहा, जिसने भारत को ्वैश्विक ल्वलनमा्यर केंद्र बनाने करी दिशा प्रदान करी । घरेलू उतपादन, ल्वदेशरी लन्वेश और सरल नियमों के कारण इले्ट्लॉलन्स, रक्षा निर्माण और मोबाइल उतपादन जैसे क्षेत्ों में उललेखनरीर ्वृद्धि दर्ज करी गई । इससे रोजगार और औद्ोलगक ल्वकास को नई गति मिलरी ।
इसरी दौरान“ अंतरोदय” के संकलप के तहत आर्थिक समा्वेशन पर ल्वशेष धरान दिया गया । ्वर्ष 2015 में शुरू हुई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने छो्टे उद्लमरों, महिलाओं और यु्वाओं को बिना गारं्टरी ऋण उपल्ध कराकर स्वरोजगार और ग्ामरीर उद्लमता को नई पहचान दरी । कुल 6.3 करोड से अधिक एमएसएमई उद्मों को सहायता मिलरी । ्वहीं, जन धन योजना के तहत 55 करोड से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें 30.80 करोड खाते महिलाओं के नाम हैं । कुल 36.73 करोड ग्ामरीर खातों के साथ यह दुनिया का सबसे बडा ल्वत्तरीर समा्वेशन अभियान बना ।
्वर्ष 2017 में लागू िरीएस्टरी को स्वतंत् भारत के सबसे बडे कर सुधारों में माना जाता है । अनेक अप्रतरक्ष करों को ह्टाकर“ एक राष्ट्, एक कर” करी अ्वधारणा को मजबूत किया गया, जिससे
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