जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिका / Jankriti International Magazine( बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंिी पर समतपिि अंक)
ISSN 2454-2725
जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिक
( बाबा साहब डॉ. भीमराव अ
वाल्मीहक को बुलाया जो खुद ऄछू त थे | हहन्दुओं को चाहहए था एक संहवधान, और ईन्होंने मुझे बुला भेजा || 16
अंबेडकर की उजाथ का बड़ा हहस्सा धमाथधाररत हहंसा को ईद्घाहटत और हवश्लेहषत करने में खचथ हुअ. दहलत साहहत्य में धमथशास्त्रीय हहंसा पर प्रभूत सामग्री संहचत है. हसफथ शंबूक प्रसंग पर भारतीय भाषाओं में दहलत रचनाकारों द्वारा हलखी कहवताओं, कहाहनयों को आकट्््ठा हकया जाए, तो एक वृहद् ग्रंथ बन जाएगा! ईन्नीसवीं सदी के ईत्तराधथ
और बीसवीं सदी के पूवाथधथ के समाजसुधारकों और फु ले-अंबेडकर जैसे सामाहजक िांहतकाररयों के सतत प्रयासों ने ईम्मीद बंधाइ थी हक अजाद भारत में हहंसा के दुश्चि पर हवराम लगेगा. कहने की जरूरत नहीं हक यह ईम्मीद धूल- धूसररत हुइ. डॉ अंबेडकर कबीर, रैदास, दादू, नानक, चोखामेला, सहजोबाइ अहद से प्रेररत हुए. कबीर को डॉ. अंबेडकर ऄपना दूसरा गुरु बताया. अधुहनक युग में ज्योहतबा फु ले, साहवत्री बाइ फु ले, रामास्वामी नायकर पेररयार, नारायण गुरु, शाह जी महाराज, गोहवन्द रानाडे अहद ने सामाहजक न्याय को मजबूती के साथ स्थाहपत करने में महत्वपूणथ भूहमका हनभाइ. डॉ. अंबेडकर ने ज्योहतबा फु ले को ऄपना तीसरा गुरु बताया और ऄपनी सुप्रहसि पुस्तक’ ह वर दी शुराज’ ईनको समहपथत की. ऄपने समपथण में 10 ऄक्तू बर १९४६ को अंबेडकर ने हलखा‘ हजन्होंने हहन्दू समाज की छोटी
जाहतयों से ईच्च वणों के प्रहत ईनकी गुलामी की भावना के सम्बन्ध में जागृत हकया और ईन्होंने हवदेशी शासन से मुहक्त पाने में भी सामाहजक लोकतंत्र की स्थापना ऄहधक महत्वपूणथ है, आस हसिांत की स्थापना की, ईस अधुहनक भारत के महान‘ राष्रहपता’ ज्योहतराव फु ले की स्मृहत को सादर समहपथत. डॉ अंबेडकर यह मानते थे हक फु ले के जीवन दशथन से प्रेरणा लेकर ही वंहचत समाज की मुहक्त दे सकती है.
जाहतयों से बहुत कम था. 17 एक युि हजस
हशल्पकार जाहतयों के लोग लड़ते हैं और ईस कारण क्या है? मधुकर हसंह के ईपन्यास‘ कथ को तोड़ने के हलए गौतम बुि से लेकर ज्योहतब वैज्ञाहनक और ऐहतहाहसक दृहि को ऄपना ररप्रेजेंटेशन’ 18. के पहले दो ऄध्यायों में ईत्तर हववेचना की गइ है. सावथजहनक जीवन से ऄल हकए. ऐसे ही एक ईत्साही थे चंहरका प्रसाद ह जन्मे हजज्ञासु ने 1930 के दशक में‘ कल्याण
हवचारों का प्रचार करते थे परंतु जल्दी ही ईन समाजसुधार के मुद्दे को पूरी तरह नजरऄंदाज क के संपकथ में अए और ईन्होंने ऄपनी प्रेस क प्रकाशन’. रख हदया. हजज्ञासु की सोच में हजस
वषों के कइ दहलत-ओबीसी लेखकों के हवच बहुजन लेखकों ने पचों का आस्तेमाल ‛ साम
असपास ईनने दहलतों के हलए ऄपने एक ऄल ईनका लेखन जाहत, ऄछू त प्रथा, दहलत आह
आहतहासकार ने हहंदी साहहत्य पर अंबेडकर क व्यहक्तत्व थे.
ह ंदी समह त्य, समह त्येहि मस में आंबेडकर क माँ?
डॉ. ऄम्बेडकर कहते हैं हक मनुष्यमात्र को एक तकथ शील जमात बनाना होगा. मनुष्य को मनुष्य बनना होगा हजसमें प्रेम, सहहष्णुता, करुणा और मेहनत करने का माद्दा हो. हजसमें अत्मसम्मान हो और दूसरों को सम्मान देने की अदत हो, जो छद्म से दूर एक खुली हकताब हो. ऄठारवीं सदी से पहले भारत की हशक्षा व्यवस्था पर यहद नजर डालें तो हस्थहत हबलकु ल शून्य है. ऄनपढ़ों की एक बड़ी जमात हदखाइ देती ही. देश के चार या पांच प्रहतशत पुरुषों को ही पढ़ने का ऄहधकार रहा है. वे भी हशक्षा गुरुकु ल या घर पर ऄध्यापक रखकर की जाने वाली हशक्षा रही है. हशक्षा के नाम पर तो यहद कोइ स्त्री या दहलत शास्त्रवचनों को सुन ले तो ईसके कान में शीशा घोलकर डाल देने की बात यहााँ के हवहध ग्रंथों में रही है. याहन के वल ईस समुदाय के पास हशक्षा है जो या तो लूटकमथ में संहलप्त है या ईसमें सहायक हो रहा है. डॉ. वीरभारत तलवार हलखते हैं हक कु ल हमलाकर ईन्नीसवीं सदी का नवजागरण हर दृहि से बड़े शहरों के अधुहनक हशक्षाप्राप्त भरवगथ का सांस्कृ हतक अन्दोलन था हजसका सम्बन्ध व्यापक ऄहशहक्षत जनता से और गैर हद्वज
क्यम क िे ैं ह ंदी के गैर ब्रमह्मण लेखक, आ
हपछले दो दशकों में सबाल्टनथ साहहत्य वतथमान समाज में ऄहस्मतावादी साहहत्य ने व्य ईपेक्षा का हशकार रहा है हजसके ऄनेक कारण हवमशथ की हलहखत एवं वाहचक परंपराओं का वणथवादी लोगों का कब्ज़ा यह दशाथता है ईसक की सहियता तीन क्षेत्रों में सामने अइ. ईन्होंन और कथाकृ हतयााँ प्रकाहशत हुइ. ं हनचली गहर सारे समाज को दहलाकर रख देती हैं. डॉ. राज ऄस्सी वषथ पूरे होने पर ऄशोक वाजपेयी ने रज जाहतयों के ईत्थान की बात करते हुए कु छ ऐस
16 ष्जमरमि एॊर् भुल्कयाज आनॊद, एन एन्द्थारोजी आप दमरत मरियेर्य, हदल्री, १९९२,( उधृत आदुतनकता के आईने भें दमरत, ऩृष्ठ-१३२)
17 यस्साकशी, वीयबायत तरवाय, ऩृष्ठ १२२ 18 आधुतनकता के आईने भें दमरत, अबम कु भ
Vol. 2, issue 14, April 2016. वर्ष 2, अंक 14, अप्रैल 2016. Vol. 2, issue 14, April 2016.