जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिका / Jankriti International Magazine( बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंिी पर समतपिि अंक)
ISSN 2454-2725
जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिक
( बाबा साहब डॉ. भीमराव
दुईफन अमरूद नूरर न लावे । मुझी मन मेरो लेऊ धराई, वारर घुहम-घुहम हेरो आई । 8
आनके लोकगीतों में जीिन की विषमताओं का भी स्िभाविक वचत्रण वदखाइ देता है । पुत्री के वििाह के वलए वपता को सोने की नथुनी गढ़िानी है वकन्तु धन के ऄभाि में िह वकस प्रकार नथुनी बनिाएं और कै से ऄपनी पुत्री का वििाह करे-
‘‘ अ ौं क ाल डाडू ढहन रे हवहयलो । मोरे लाग नानी देव नाका के नथुहनयााँ । अ ौं क ाल बहहनी ोनवा महाँगा बा ोलरा परल अलमोल हट रा ाल आई ोलरा भइया हमटवा नथुनी माँई लइ पहहरइबाँ ।’’ 9
वििाह के ऄिसर पर थारू वियााँ विविध भािों से युि लोकगीत गाती हैं । नइ निेली दुकहन ब्याह कर ऄपने पवत के घर जाने िाली है आस ऄिसर पर थारू मवहलाएाँ गाती हैं-
डेहु डेहु माया रे मोरे माथे क ेंदुरा मइाँ जइबू माया ढहन रे हबयाहे । लेहु लेहु पुटा मोरे माथे क ेंदुरा ज्हु ज्हु पुटा ढहन रे हबयाहे ।’’ 10
आस प्रकार आनके लोकगीतों में जीिन के विविध प्रसंगों की झााँकी वदखाइ देती है । आनके साथ ही’ मीणा’ देि की ऄग्रणी जनजावत मानी जाती है । मीणा समाज में वियों की दिा ईनके लोकगीतों के माध्यम से जानी जा सकती है ।’ एक लोकगीत के ऄनुसार वकसी जोधा मीणा की पत्नी फू लकी ऄपने पवत जोधा के मरने पर ईसकी वचता के साथ हो जाती है और मीणा अवदिासी राजपूती प्रभाि में ईसकी िाही-िाही करते हैं-
’’ बात बीती परी, हरर रा हाथरी, हकणी रौ दूनी में जारो काांहीेे । फू लकी नाांव री उणे री भारज्या, हघनोहघन ती हुई इल्ला मााँही ।। पीर में फू लकी ा रे फू लकी, ुरग में फू लकी फू ल बाई कपडा पहत रा आवतााँ जेज ही, काठ चढ़ताां करी नह जेज कााँई ।। 11
आसी तरह के ऄनेक ऐसे लोकगीत प्रचवलत है जो जनजाेावत समाज की विडम्बना तथा यथाथण का सजीि वचत्रण करतें है । आनके माध्यम सें जनजावतयों की संस्कृ वत के सूक्ष्म से सूक्ष्मतर पक्ष को भी भली भााँवत समझा जा सकता है । भारतीय अवदम जनजावतयों में‘ सहररया’ भी प्रमुख हैं । यह ऄनेक ईपजावतयों में विभि है तथा मुख्य रूप से
मध्य प्रद ेि में पाइ जाती है । आनमें भी जीि ररिाज है । पूरा वदन दूसरे के खेत में काम करन
’’ हदन डूबे े धर हक ान भइया बेर मोडी मोडा जो ह हक ान भइया बेर
मेरी जो गगरी हेरे हक ान भइया बेर मेरी जो चहकया ज हक ान भइया बेर
मेरा जो चूल्हा ज हक ान भइया बेर
एसी ही ऄनेक जनजावतयााँ हैं वजनक लोकगीत अवदम जनजातीय जीिन का महत् विडम्बना अवद विविध मनोभािों से पररपूण सैकडों िषण पूिण थे । अधुवनकता की बनािट लोकगीतों को ज्यों का त्यों सहेज कर रखा मनःवस्थवत भािो या अिेगो की बात नहीं ऄपने ऄन्दर समेटे रहते है । आसमें मानि मन अवद भाि ऄन्तवनणवहत रहते है । कहना यह बवकक िह भारत की ऄनमोल धरोहर के स स्तरीय प्रयास वकये जाने चावहए । न के िल स ईच्च स्तरीय िोधों के द्वारा ईनके प्रचीनतम ईन्हें संरवक्षत रखने ऄवपतु ईनके प्रसार की वद
न्दभष-
1- ज्ञान-विखर( ब्रज-ऄिधी वििेष 2-’ हाविये के लोगों की अिाज’ 3- ईिर प्रदेि की जनजावतयााँ- ऄम के न्द्र, सी0 एस0 पी0 मागण, आलाहाब 4- भारत के अवदिासी प्रो0 मधुसूद ओमेगा पवब्लके िन्स, दररयाग, नआ् व
Vol. 2, issue 14, April 2016. वर्ष 2, अंक 14, अप्रैल 2016.
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