जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिका / Jankriti International Magazine( बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंिी पर समतपिि अंक)
ISSN 2454-2725
जनकृ ति अंिरराष्ट्रीय पतिक
( बाबा साहब डॉ. भीमराव अ
राजनीदतक जीवन- 13 ऄक्टूबर 1935, को येओला नादसक मे ऄ्बेडकर एक रैली को संबोदधत करते हुए. 13 ऄक्टूबर 1935 को, ऄ्बेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का प्रधानचायम दनयुक्त दकया गया और आस पद पर ईन्होने दो वर्म तक कायम दकया आसके चलते ऄंबेडकर बंबइ में बस गये, ईन्होने यहाूँ एक बडेऺ घर का दनमामण कराया, दजसमे ईनके दनजी पुस्तकालय मे 50000 से ऄदधक पुस्तकें थी आसी वर्म ईनकी पत्नी रमाबाइ की एक लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गइ रमाबाइ ऄपनी मृत्यु से पहले तीथमयािा के दलये पंढरपुर जाना चाहती थीं पर ऄंबेडकर ने ईन्हे आसकी आजाज़त नहीं दी ऄ्बेडकर ने कहा की ईस दहन्दु तीथम मे जहाूँ ईनको ऄछू त माना जाता है, जाने का कोइ औदचत्य नहीं है आसके बजाय ईन्होने ईनके दलये एक नया पंढरपुर बनाने की बात कही भले ही ऄस्पृश्यता के दखलाफ ईनकी लडाइ ऺ को भारत भर से समथमन हादसल हो रहा था पर ईन्होने ऄपना रवैया और ऄपने दवचारों को रूदढ़वादी दहंदुओं के प्रदत और कठोर कर दलया ईनकी रूदढ़वादी दहंदुओं की अलोचना का ईत्तर बडी ऺसंख्या मे दहंदू कायमकतामओं द्वारा की गयी ईनकी अलोचना से दमला 13 ऄक्टूबर को नादसक के दनकट येओला मे एक स्मेलन में बोलते हुए ऄ्बेडकर ने धमम पररवतमन करने की ऄपनी आच्छा प्रकट की ईन्होने ऄपने ऄनुयादययों से भी दहंदू धमम छोड कोइ और धमम ऄपनाने का अह्वान दकया, ईन्होने ऄपनी आस बात को भारत भर मे कइ सावमजदनक सभाओं मे दोहराया भी ।
1936 में, ऄ्बेडकर ने स्वतंि लेबर पाटी की स्थापना की, जो 1937 में के न्द्रीय दवधान सभा चुनावों मे 15 सीटें जीती ईन्होंने ऄपनी पुस्तकजादत के दवनाि भी आसी वर्म प्रकादित की जो ईनके न्यूयॉकम मे दलखे एक िोधपि पर अधाररत थी आस सफल और लोकदप्रय पुस्तक मे ऄ्बेडकर ने दहंदू धादममक नेताओं और जादत व्यवस्था की जोरदार अलोचना की ईन्होंने ऄस्पृश्य समुदाय के लोगों को गाूँधी द्वारा रदचत िब्द हररजन पुकारने के कांग्रेस के फै सले की कडी ऺदनंदा की ऄ्बेडकर ने रक्षा सलाहकार सदमदत और वाआसराय की कायमकारी पररर्द के दलए ्म मंिी के रूप में सेवारत रहे ।
1941 और 1945 के बीच में ईन्होंने बडी संख्या में ऄत्यदधक दववादास्पद पुस्तकें और पचे प्रकादित दकये दजनमे‘ थॉट्स ऑन पादकस्तान’ भी िादमल है, दजसमें ईन्होने मुदस्लम लीग की मुसलमानों के दलए एक ऄलग देि पादकस्तान की मांग की अलोचना की वॉट काूँग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द ऄनटचेबल्स( काूँग्रेस और गान्धी ने ऄछू तों के दलये क्या दकया) के साथ, ऄ्बेडकर ने गांधी और कांग्रेस दोनो पर ऄपने हमलों को तीखा कर ददया ईन्होने ईन पर ढोंग करने का अरोप लगाया ईन्होने ऄपनी पुस्तक‘ हू वर द िुद्राज़?’( िुद्र कौन थे?) के द्वारा दहंदू जादत व्यवस्था के पदानुक्रम में सबसे नीची जादत यानी िुद्रों के ऄदस्तत्व मे अने की व्याख्या की. ईन्होंने आस बात पर भी जोर ददया दक दकस तरह से ऄछू त, िुद्रों से ऄलग है ऄ्बेडकर ने ऄपनी राजनीदतक पाटी को ऄदखल भारतीय ऄनुसूदचत जादत फे डरेिन मे बदलते देखा, हालांदक 1946 में अयोदजत भारत के संदवधान सभा के दलए हुये चुनाव में आसने खराब प्रदिमन दकया 1948 में हू वर द िुद्राज़? की ईत्तरकथा द ऄनटचेबलस: ए थीदसस ऑन द ओररजन ऑफ ऄनटचेदबदलटी( ऄस्पृश्य: ऄस्पृश्यता के मूल पर एक िोध) मे ऄ्बेडकर ने दहंदू धमम को लताडा ।
दहंदू सभ्यता जो मानवता को दास बनाने और होगा एक सभ्यता के बारे मे और क्या कहा ज एक मानव से हीन समझा गया और दजसका स्
ऄ्बेडकर आस्लाम और ददक्षण एदिया में ईसक पर मुदस्लम समाज मे व्याप्त बाल दववाह की ईन्होंने कहा, बहुदववाह और रखैल रखने के मुदस्लम मदहला के दुःख के स्रोत है जादत व्यव होना चादहए, जबदक गुलामी ऄदस्तत्व में है औ वदणमत गुलामों के साथ ईदचत और मानवीय व्य कु छ नहीं है जो आस ऄदभिाप के ईन्मूलन का के बीच जादत व्यवस्था रह जायेगी ।
ईन्होंने दलखा दक मुदस्लम समाज मे तो दहंदू स " जैसे नरम िब्दों के प्रयोग से छु पाते है ईन्हों का " माना जाता था के साथ ही मुदस्लम सम की ईन्होंने कहा हालाूँदक पदाम दहंदुओं मे भी ह मे कट्टरता की अलोचना की दजसके कारण आ बहुत कट्टर हो गया है और ईसे को बदलना बह समाज का सुधार करने में दवफल रहे है जबदक
" सांप्रदादयकता " से पीदडत दहंदुओं और मुसल
हालांदक वे मोह्मद ऄली दजन्ना और मुदस्लम ईन्होने तकम ददया दक दहंदुओं और मुसलमानों क्योदक एक ही देि का नेतृत्व करने के दलए ईन्होंने दहंदू और मुसलमानों के सांप्रदादयक चेकोस्लोवादकया के दवघटन जैसी ऐदतहादसक
ईन्होंने पूछा दक क्या पादकस्तान की स्थापन मुसलमानों के बीच के मतभेद एक कम क पादकस्तान को ऄपने ऄदस्तत्व का औदचत्य द हैं पर अज भी ऄंग्रेज और रांांसीसी एक सा
Vol. 2, issue 14, April 2016. व ष 2, अंक 14, अप्रैल 2016. Vol. 2, issue 14, April 2016.