Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
रूप में ए, क ऐमन्द्रजामलक मोहपाश है मजसमें बंधकर जन मानस का अमवकल हृदय, संतृमप्त एवं तोश का अनुभव करता रहा है ।
मवमभन्न संत पंथ एवं सम्प्रदायों का पररचय:
पूवामध्यकाल की मनगु ाि शाखा के संत सम्प्रदायों का उत्तरोत्तर मध्यकाल में मवकास हुआ मजसके अंतगात लगभग 45 संत सम्प्रदाय एवं उपसम्प्रदाय मवकमसत हुए, मजनमें से प्रमुख सम्प्रदायों का पररचय इस प्रकार है:
नानक एवं मसक्ख सम्प्रदाय:
समस्त सन्त सम्प्रदाय अथवा पन्थों में नानक द्वारा स्थामपत परवती नौ गुरुओं द्वारा पुसे नानक पंथ, जो मसख मत के रूप में प्रमसद्ध हुआ, ही ऐसा पंथ है जो संगमठत स्वरूप में मवकमसत हुआ, इस पंथ के अंतगात मसख धमा का अत्यामधक उत्कर्षा उजागर हुआ । इस पंथ का मुख्य के न्द्र पंजाब रहा है, जो आक्रान्ताओंके कारि सदैव मवचमलत होता रहा है, कदामचत यही कारि है मक यहाँ इस पंथ का इतना अमधक उत्कर्षा हुआ । इस पंथ के प्रवताक, मसखों के आमदगुरु, गुरु नानकदेव थे । इनका आमवभााव कबीर की मृत्यु के इक्कीस वर्षा पिात् सं० 1526 में लाहौर के समीप तलवंडी नामक गाँव में हुआ । सं० 1595 में इनका देहावसान हुआ । 1 बाल्यकाल से ही नानक अध्यामत्मक प्रवृमत्त वाले थे, इन्हें पंजाबी संस्कृ त, महंदी, वं फारसी का अच्छा ज्ञान था । नानक जी ने बहुत से पदों का प्रियन मकया इनके द्वारा प्रिीत रचनाओं में‘ जपुजी‘ अत्यन्त प्रमसद्ध है । इनकी वािी‘ श्री गुरुग्रंथसामहब‘ में संग्रमहत हैं, गुरु नानकजी ने अपनी वािी के माध्यम से सुप्त प्रायः मानव जामत को जाग्रमत प्रदान करने का काया मकया । उन्हों ने मानव सेवा का सवोत्तम मसद्धान्त स्थामपत मकया, मानव धमा
के माध्यम से समाज में समता उनकी सबसे बड़ी देन है ।
गुरु नानक द्वारा प्रवता सम्प्रदाय को गुरु गोमबन्द मसंह ने सं०1756 में खालसा पंथ( सम्प्रदाय) का रूप दे मदया । 2 गुरु नानक देव के पुत्र श्री चन्द ने उदासी नामक सम्प्रदाय को प्रवता मकया, इस सम्प्रदाय की चार प्रधान शाखाऐं हैं जो धुआं कहलाती हैं- फु लासामहब की शाखा, बाबा हसन की शाखा, अलमस्त सामहब की शाखा, गोमवंद सामहब की शाखा । इस पंथ में मनगु ाि एवं सगुि-सामंजस्य ्टमसेगोचर होता है । 3 मसखों की शस्त्रधारी एवं मवद्याधारी प्रवृमत्त को ध्यान में रखते हुए गोमबन्द मसंह ने श्स्त्रधारी को‘ खालसा‘ तथा मवद्याधारी को‘ मनरमल भेर्ष‘ की संज्ञा दी ।‘ मोरव‘ पंथगुरु गोमबन्द मसंह को मनमाला सम्प्रदाय का प्रवताक मानता है । खालसा पंथ और मनमाल सम्प्रदाय में अन्तर इतना ही है मक खालसा के मसख गृहस्थ भेर्ष हैं और
मनमाल मसखों के मलए मववाह का मनर्षेध है । 4 एक अन्य मतानुसार गुरु गोमबन्द मसंह की आज्ञा से वीरमसंह ने मनमाला सम्प्रदाय की स्थापना की । 5 राम मसंह नामक मसख ने‘ नामधारी सम्प्रदाय‘ की स्थापना की थी । इस सम्प्रदाय के अनुयायी‘ कू का‘ नाम से भी प्रमसद्ध हैं । इस सम्प्रदाय के प्रवताक राममसंह को रंगून में मनव ामसत मकया जाना प्रमसद्ध है, क्योंमक उनके अनुयामययों ने बहुत से कसाइयों की हत्या कर दी थी ।‘ सूचा‘ नामक िाह्मि अथवा सुथराशाह ने सुथराशाही सम्प्रदाय की स्थापना की, इन्हें गुरु हरगोमवन्द तथा गुरु अजु ान देव जी से सम्बमन्धत माना जाता है । इसी प्रकार भाई कन्हैया द्वारा सेवा पन्थी सम्प्रदाय प्रवता हुआ है । मसख मतांतगात अकाली सम्प्रदाय का भी नाम आता है । खालसा सम्प्रदाय की उत्पमत से पूवा अथाात् सं० 1747 के लगभग मानमसंह
के नायकत्व में अकाली सम्प्रदाय का आमवभ ाव Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017