Jankriti International Magazine Jankriti Issue 27-29, july-spetember 2017 | Page 308

Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
में ले जाता है और / उसकी पीठ में छु रा भोंक देता है ।” 16
सन् 70 के बाद की भारतीय राजनीमत में‘ आम आदमी’ के मन के बहुत सारे भ्रम को तोड़ मदया है ।‘ धूमममल्जस’ समय‘ पटकथा’ शीर्षाक कमवता मलख रहे थे उस समय देश में जनतंत्र एक तमाशा बन कर रह गयी थी । लोगों के पास कोई मवकल्प नहीं था । ऐसे में‘ पटकथा’ का नायक उस खो गयी वास्तमवक आजादी को ढूँढता है । कमवता की‘ मैं’ को कहीं आजादी नजर नहीं आती । मसफा मदखते हैं टूटे हुए पुल और वीरान सड़कें । देश का जनतंत्र एक जंगल में बदल गया है । एक ऐसे जंगल में जहाँ मसफा जंगल का कानून चलता है और जंगल के कानून में कोई व्यवस्था नहीं होती । यह कानून खू ँखार दररंदों का कानून है ।
इस प्रकार‘ संसद से सड़क तक’ में संकमलत कमवताएँ प्रजातांमत्रक शासन व्यवस्था, स्वातंत्र्योत्तर ग्रामीि व्यमक्त की संघर्षाशीलता, आम आदमी की मवशेर्षता, संसद में मववाद और महंदुस्तान का स्वरूप, लोकतंत्र का भीड़तंत्र में बदल जाना आमद मस्थमतयों को व्यंमजत कराने वाली कमवताएँ हैं । इसमें यथाथा का मचत्रि अत्यंत माममाक बन पड़ा है ।
3.‘ िंिद िे िड़क तक’ काव्य-िंग्रह की कु छ महयिपूणक सबंदुएँ-
इस काव्य-संग्रह की कु छ महत्वपूिा मवशेर्षताएँ ही इसे अपने युग की श्रेष्ठतम कृ मत के रूप में मववेमचत कराती है । अत: आगे हम इसके महत्वपूिा मबंदुओंकी चचाा प्रस्तुत कर रहे हैं-
1. िामासजक िंदभक के रूप में-
समाज की भलाई के मलए होना चामहए । वे पूिा रूप से जनवादी कमव थे । उनका काव्य साधारि जन के मलए था । वे जन साधारि के जीवन को, समकालीन मवडम्बनाओंको एवं असंगमतयों से भरे पररवेश को न के वल भली-भाँमत जानते थे बमल्क उसे पूिाता से भोगे भी थे, इसमलए वे साधारि जनता के जीवन की असह्य वेदना को अच्छी तरह जानते थे । धूममल ने समकालीन सामामजक समस्याओं को राजनीमतक समस्याओं के साथ जोड़ कर देखा है । उन्होंने तत्कालीन सामामजक व्यवस्था की मवसंगमतयों के मूल में मुख्यत: राजनीमतक मवडम्बनाओं को स्वीकारा है । उनका सम्पूिा काव्य सामामजक- राजनीमतक मवर्षमता का ही काव्य है मजसे उन्होंने कठोर व्यंनय के धरातल पर व्यक्त मकया है ।
2. व्यिस्था के प्रसत घोर सिद्रोह-
इस काव्य-संग्रह के जररये धूममल ने भारतीय राजनीमत में व्याप्त भ्रसेाचार को मदखाया है । वे यह बताते हैं मक, जनता का मवश्वास कांग्रेस सरकार से उठता जा रहा था, जो स्वाभामवक था क्योंमक वह तत्कालीन देश की व्यवस्था में पररवतान लाने में असफल रही थी । जनता ने कांग्रेस सरकार के स्थान पर कई राज्यों में मवरोधी दलों की सरकारों को स्थामपत मकया था, परंतु इन सबके बावजूद देश की मस्थमत ज्यों-का-त्यों बना रहा, उसमें पररवतान कहीं भी नज़र नहीं आया । धूममल इन सब को देख यह मनष्ट्कर्षा मनकालते हैं मक, देश की व्यवस्था चाहे मकसी भी सरकार के पास हो देश की हालत में सुधार नहीं होगा । इसमलए धूममल कहते हैं-‘ हाँ यह सही है मक कु मसायाँ वहीं हैं मसफा, टोमपयाँ बदल गयी हैं ।’ धूममल यहाँ तक कहते हैं मक, तत्कालीन जनतंत्र देश की जनता के मलए मात्र धोखा है । स्वाथी नेता देश की गरीब जनता को झूठे आश्वासन मदलाकर भमवष्ट्य के
धूममल कमवता को सामामजक कमा मानते थे ।
वे इस बात में मवश्वास रखते थे मक कमवता का उपयोग
सुनहरे सपने मदखाते हैं । वे अपनी मीठी-मीठी बातों से
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017.
वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017