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गई, अप्रासंगिक, अप्राककृवतक एवं अवमूल्यित हो चिुकी ऐसी जड़ प्रथाओं से है जो नारी-अशसमता के साथ क्रूर मजाक करतीआ्यी हैं । इस प्रकार के नारी-जागरण एवं नारी-मुक्त के मार्ग से स्वयं नारर्याँ भी बाधक बन सकती हैं अथवा बनी हुई हैं । अतः वैसीनारर्यों की मनोवृवत् को परिष्कृत कर उनमें वैचिारिक एवं उद्े््यपूर्ण उधव्षमुखी रिांवतकारी चिेतना भरने की आवश्यकता है । सत्ीवादीआनदोलन का उद्े््य सत्ी को कमजोर बनाने वाले हरेक जीवाणु से लड़ने के लिए होना चिाहिए, चिाहे वह जीवाणु पुरुष प्रककृवत की देन हो्या सत्ी प्रककृवत की । प्रसिद्ध नारीवादी लेखिका जममेन ग्रीयर लिखती हैं –“ रिांवत के लिए जरूरी है कि शसत््याँ पूँजीवादी राज्य मेंउपभो्तावादी बनने से इंकार कर दें । ऐसा करके ही वह समबद्ध उद्योगों को करारा झटिका दे सकती हैं ।'' सत्ीवादी आनदोलन के उद्े््य को अभिव्य्त करती हुई वी. वीरलक्मी देवी
कहती हैं –“ पुरुषोवचित ववचिार पद्धति द्ारा जड़ीभूत चिेतना पर आघात करना ही इसका मुख्यउद्े््य हैI” वासतव में सत्ी लेखन में निम्न पलॉचि बातें प्रमुखता से आती हैं:- १- शसत््यों की पीड़ायें-२- शसत््यों की महतवकांक्षाएं ३-परिवार तथा समाज का संघर्ष ४- भक्त रचिना्यें ५- सत्ीवादी रचिना्यें । दलित लेखन की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई, क्योंकिंसामान्य लेखन ने दलित लेखन की पूरी उपेक्षा की । उसी प्रकार दलित सत्ी लेखन की भी उतपवत् होनी आवश्यक थी क्योंकि सामान्यसत्ी लेखन में दलित सत्ी का हित विलोपित था । सामान्य तौर पर ऐसा माना जाता है कि दलित सत्ी लेखन( विमर्श भी) चिौतरफासंघर्ष करता है- सवर्ण समाज, परिवार, दलित पुरूष एवं सामान्य सत्ी विमर्श आदि ।“ सत्ी आनदोलन धनी महिलाओं का कोरा वाशगवलास और न्यूज में बने रहने की उनकी साजिश नहीं है । ग्ासरूटि सतर तक इसका विसतार है”।
दलित महिला वर्ग की एक दूसरी प्रमुख समस्या‘ दैहिक और लैंगिक शोषण’ की है जो सव-वर्ग में भी है और‘ सवर्णीय-वर्ग’ की तरफ
से भी है अर्थात‘ दोतरफा शोषण’।“ ज़रूरत इस बात की है कि ्य्ाशस्वत से जूझने वाला हर व्यक्त आगे आ्ये और इस बात पर ववचिार करे कि दलित सत्ी समाज की पदसोपानी्य व्यवस्ा में सबसे नीचिे रही है । वह तिहरा शोषण झेलती रही है- 1. एक दलित होने के नाते, 2. एक सत्ी होने के नाते और 3. एक मजदूर होने के नाते । दलित नारी जाति, वर्ग और पितृसत्ा तीनों के द्ारा शोषण का शिकार होती है. उसे औरत होने के कारण उसके समाज का पुरुष शोषित करता है, गरीब मजदूर होने के कारण भू सवामी शोषित करता है और दलित होने के कारण उसे सवणकों द्ारा अपमान सहना पड़ता है”।“ ततकाल समाधान हेतु इस देश में ्यवद आज सबसे बड़ी कोई समस्या है तो वो है, देश के पच्चीस फीसदी दलितों और आदिवावस्यों और अड़तालीस फीसदी महिला आबादी को वासतव में सममान, संवैधानिक समानता, सुरक्षा और हर क्षेत् में पारदशजी न्या्य प्रदान करना और ्यवद सबसे बड़ा कोई अपराध है तो वो दलितों-आदिवावस्यों और शसत््यों को धर्म के नाम पर हर दिन अपमानित, शोषित और उतपीवड़त वक्या जाना ।
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