Jan 2026_DA | Page 30

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दलित विद्याल्य की भी स्ापना की । दलितों केअधिकारों के साथ-साथ दलितों की शिक्षा की भी पैरवी की । ज्योतिबा ने भारत में दलित आंदोलनों का सूत्पात वक्या था लेकिन इसेसमाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम बाबा साहब अमबेडकर ने वक्या । एक बात और जिसका वजरि किए बिना दलित आंदोलन कीबात बेमानी होगी वो है बौद्ध धर्म । ईसा पूर्व 600 ईसवी में ही बौदघ धर्म ने समाज के वनचिले तबकों के अधिकारों के लिए आवाज़उठाई । बुदघ ने इसके साथ ही बौद्ध धर्म के जरिए एक सामाजिक और राजनीतिक रिांवत लाने की भी पहल की ।
लेकिन अब सम्य आ ग्या है की दलित महिलाऒं को इन सभी क्षेत्ों में अपना स्ान निर्धारित करना चिाहिए । घर का काम और रसोई घर की चिाकरी भी जब सामाजिक उतपादन का एक हिससा बनेंगे तभी शसत््यों की चिाकरी का
मूल्य होगा और जब तक ऐसा नहींहोगा, सत्ी रसोई घर की बाँदी ही रहेगी । चिूँकि शसत््याँ संतानोतपवत् द्ारा सामाजिक उतपादन में भागीदारी कर रही हैं, इसलिए इस का्य्षको समाज के उतपादक श्म के एक भाग के रूप में मान्यता मिलनी चिाहिए । दलित महिलाऒं को इन क्षेत्ों में उपशस्त असमानता, लिंगभेद( ्यह ्यौन – भेद से अलग शबद है, जहाँ ्यौनभेद‘ प्रणिवैज्ञानिकता’ को प्रदर्शित करता है वहीं लिंगभेद‘ सांस्कृतिक गुणातमकता’ को । पुरुषों की वर्चस्विता इसी लिंग भेद पर आधारित है), अवसत्ीपरकता( ्यह नारी घृणा के व्यवथित व्यवहारों को, नारी के संस्ानीककृत – अधीनीकरण को, सभी प्रकार के नारी विरोधी व्यवहारों को उद्घाटित करने वाला है), और पितृ- सत्ातमकता( पुरुषों को अधिमानता देने वाली सांस्कृतिक व्यवस्ा और पुरुषों के हाथो ताकत सौपने वाली राजनैतिक व्यवस्ा को उजागर
करती है) का कड़ा विरोध करना चिाहिए परंतु इसके लिए उनहे तार्किक वचिंतन करना होगा । इस समस्या के मूल में जाकर ही इसका समाधान ढूढ़ना होगा । और ्यह अब तभी होगा जब वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ व आतमवनभ्षर हों । ज्यों – ज्यों वे‘ से्फ-इमपाँवर’( आतमशक्त-संपन्न) होती जाएंगी, वैसे – वैसे पुरुष-वर्ग का‘ डलॉवमनेसन’ अर्थात‘ सामनतवादी मानसिकता’ का दवाब कम होता जाएगा । इस सत्ीतववादी आंदोलन मे दलित महिलाऒं को ईरान की मानवाधिकार महिला का्य्षकर्ता‘ नसरीन सौतदेव‌’ का मार्ग अपनाना चिाहिएI
“ नारी शरीर के चिंद वसत्ों को जला डालने से नारी मुक्त नहीं हो जा्या करती, मुक्त मन की होती है । सत्ी को शव बनने से बचिानेके लिए वैचिारिक आनदोलन की आवश्यकता है । उसे ्यह ख्याल रखना होगा कि उसकी लड़ाई किसी व्यक्त विशेष ्या वर्ग विशेष से नहींहै, थोपी
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