fopkj
दलित समाज को चाहिए डॉ आंबेडकर जैसा विद्ान नेता
कुशालचन्द्र रैगर
19
वीं शताबदी के प्रारम्भ में दलित आंदोलन कि शुरूआत हिनदुओ के भीतर ही हुई, जिसमे छुआछुत, मंदिरो मे जाना आदि समस्याओ के निराकरण सवरूप इसका प्रारमभ हुआ । 20 वीं शताबदी के प्रारमभ मे दलित आंदोलन कि शुरूआत महारा्ट् मे हुई जिसमे विधान मंडल मे हिससेदारी, पृथक वनवा्षचिन ्योजनाओ मे हिससे की मांग की गई । इसी दौरान एक ्युवा बेरिस्टर डलॉ. भीमराव आंबेडकर का उद्य हुआ, जिनहोने अंग्ेजी सरकार के सामने दलितों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा, नतीजा अंग्ेजो द्ारा सामप्रदा्यक पंचिाटि के द्ारा दलितों को पृथक वनवा्षचिन तथा दो वोटि का अधिकार प्रदान वक्या ग्या, नतीजा गलॉधीजी ने खुलकर इसका विरोध वक्या और पूना की जेल मे इसके विरूद्ध अनशन वक्या, जिसका प्रभाव डलॉ आंबेडकर को मजबूरन पूना पेक्ट समझौता करना पडा, जिसके तहत सामप्रदाव्यक पंचिाटि के द्ारा दलितों को मिले अधिकार से हाथ धोना पड़ा और आरक्षण कि व्यवस्ा की गई । ्यह आरक्षण सवणषो व दलितों के बीचि हुऐ पूना पेक्ट समझौते का परिणाम था । डलॉ अमबेडकर के प्र्यासो के कारण आजादी की लड़ाई के दौरान ही दलित एजेणडे को रा्ट्रीय एजेणडे मे शामिल कर वल्या ग्या ।
1947 मे देश को आजादी मिली, एक सवतंत् न्ये देश को चिलाने के लिए, एक न्ये संविधान की आवश्यकता महसुस की गई, न्ये संविधान बनाने के लिए प्रतिभावान कानूनविद्ध, अर्थशासत्ी, समाजशासत्ी, दार्शनिक, के तोर पर डलॉ. आंबेडकर के समतुल्य गलॉधीजी और
जवाहरलाल नेहरू को ्योग्य व्यक्त नजर नही आ रहा था, मजबूरन उनहोने डलॉ. आंबेडकर को भारत का प्रथम कानून मंत्ी बना्या, तथा संविधान बनाने की जिममेदारी दी ।
डलॉ. आंबेडकर ने सवतंत्ता के बाद दलित आंदोलन को एक नई दिशा देने का प्र्यास वक्या और समपूण्ष भारत मे एक सर्वमान्य नेता के रूप मे स्ावपत हुऐ, जिसके कमषो का फल हम आज तक उठा रहे है और हमारा राजनैतिक व सामाजिक उत्ान तीव्र गति से समभव हो पा्या । डलॉ. आंबेडकर दलित को राजनैतिक तोर पर
स्ावपत करना चिाहते है इसलिए वे एक राजनैतिक पार्टी बनाना चिाहते थे, उनहोने रिपशबलक पार्टी ऑफ इण्डिया के लिए संविधान बना्या लेकिन ्यह पार्टी उनके मरने के बाद ही स्ावपत हो सकी । प्रारमभ मे पार्टी को महारा्ट् मे अचछी सफलता मिली लेकिन 1962 मे ्यह पार्टी कम्युनिस्टो के प्रभाव मे आ गई, नतीजा इसमे कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर चिले ग्ये । इसके बाद कई नेताओं ने इसे वापस सश्त पार्टी बनाने का प्र्यास वक्या, लेकिन वे सफल नही हुए ।
20 tuojh 2026