Jan 2026_DA | Page 18

कवर स्टोरी

मतुआ समाज को स्ायी नागरिकता देने से होगा कई समस्ाओं का समाधान

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श्चिम बंगाल की राजनीति में मतुआ समाज की प्रभावी भूमिका को सप्टि रूप से देखा जा सकता
है । राज्य में होने वाले आगामी चिुनाव में तृणमूल
पार्टी को सत्ा से दूर करने के लिए भारती्य जनता पार्टी( भाजपा) पूरी ताकत से लगी हुई है । भाजपा द्ारा अपना्यी जा रही चिुनावी रणनीति में मतुआ समाज को अहम स्ान वद्या जा रहा है । कारण ्यह है कि राज्य की राजनीति में दलित( अनुसूवचित जाति) मतुआ समाज की जनसंख्या तीन करोड़ से अधिक है और लगभग 70 विधानसभा सीटिों पर मतुआ समाज का सीधा प्रभाव है मतुआ समाज बंगाल का एक दलित( अनुसूवचित जाति) समाज है । राज्य में अनुसूवचित जाति की कुल जनसंख्या में मतुआ
समाज की हिससेदारी 17.4 प्रतिशत है । दलित वर्ग में आने वाले मतुआ समाज की अनदेखी राज्य में कोई भी राजनीतिक दल करने की शस्वत में नहीं है ।
राज्य की सामाजिक-सांस्कृतिक शस्वत पर ध्यान वद्या जाए तो मतुआ समाज बंगाली हिंदुओं का एक प्रमुख सामाजिक-धार्मिक पंथ है, जिसका पश्चिम बंगाल और बांगलादेश में गहरा प्रभाव है । ्यह समाज मुख्य रूप से ' नामशूद्र ' वर्ग से संबंधित है और भारत का दूसरा सबसे बड़ा अनुसूवचित जाति समूह है । नामशूद्र वर्ग
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