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की हार का बदला लेना है । बांगलादेश में शेख हसीना की सरकार को अवैध रूप से हटिाने में जमात-ए-इसलामी को मोहरा बना्या ग्या और अब आईएसआई ने ढाका में एक सेल स्ावपत कर वल्या है । ्यह सेल बांगलादेश में भारत विरोधी भावनाओं को बढाकर उन कट्टरपंथी आतंकवादी संगठनों को सवरि्य करने में जुटिा हुआ है, जो लमबे सम्य से वनश्रि्य थे । इसके लिए ल्कर-ए-तै्यबा और जैश-ए-मोहममद को भी आगे वक्या जा रहा है । पाकिसतान के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने की आड़ में समुद्री रासते खोले जा रहे हैं, जिसे लेकर भारत अपनी वचिंता भी सार्वजनिक कर चिुका है । जानकारी के अनुसार 2024 के मध्य में शेख
हसीना ने बांगलादेश छोड़ा था । उसके बाद पाकिसतानी अधिकारर्यों ने ढाका की लगभग 1,950 बार ्यात्ाएं कीं । गत वर्ष ्यह संख्या बढ़कर 3,387 हो गई । देखा जाए तो पाकिसतान ्येन-केन-प्रकारेण बांगलादेश पर जबरन कबजा करने की कोशिश में जुटिा हुआ है और ्यह त्थ्य बांगलादेश में रहने वाले लोगों को समझना ही होगा ।
बंगाल विभाजन में जिन्ा ने किया दलितों का उपयोग
भारत में मुशसलम देश ्या रा्ट् का पहला बीज मुशसलम नेता सै्यद अहमद खां ने बो्या था । सर नै्यद अहमद ने ्यह सिद्धांत प्रतिपादित
वक्या कि इसलाम और उसके समर्थक भी एक रा्ट् हैं । अपने कथित हितों के लिए कट्टरपंथी मुशसलम नेताओं ने मुशसलम लीग नामक अपना राजनीतिक दल बना्या और फिर देश में धार्मिक आधार पर बंटिवारे के लिए संगठित होकर पाकिसतान के निर्माण की भूमिका तै्यार करते चिले गए ।
कांग्ेस और मुशसलम लीग के बीचि 1916 में हुए लखनऊ समझौते में पृथक् वनवा्षचिक मंडल पहले ही सवीकार कर वल्या ग्या था । इस समझौते के तहत पृथक वनवा्षचिक मंडल में जितने भारती्य सदस्य वनवा्षवचित होने थे, उनमें से एक-तिहाई संख्या मुशसलम सदस्यों के लिए आरक्षित कर दी गई । प्रांतों में मुसलमानों के
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