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कवर स्टोरी

के समग् कल्याण का दावा करने वाले वाममोचिा्ष शासनकाल के 32 वरकों से लेकर तृणमूल नेता ममता के शासनकाल में भी स्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं आ्या । मुशसलमों के बढ़ते उतपीडन और उस उतपीडन के विरुद्ध ममता की चिुपपी के कारण मतुआ, नामसुद्रों सहित अन्य दलित और आदिवासी जावत्यां एकजुटि हो रही हैं । केंद्र में सत्ारूढ़ मोदी सरकार की वरि्याप्रवरि्या और जनकल्याणकारी नीवत्यों से घबरा कर ममता सरकार ने कई ऐसी ्योजनाओं को राज्य में लागू करने से इंकार कर वद्या, जिनका लाभ वर्तमान में देश के अन्य राज्यों की गरीब, दलित और आदिवासी जनता को मिल रहा है । बांगलादेश में दलितों के विरुद्ध हिंसा जारी बांगलादेश में अ्पसंख्यक हिनदुओं की सुरक्षा एक बड़ी वचिंता का रूप धारण कर चिुकी है । अ्पसंख्यक हिनदुओं, जिनमें अधिकांश दलित वर्ग के हैं, की सुरक्षा से जुडी गंभीर वचिंताएं बांगलादेश में लगातार हो रही हिंसक घटिनाओं के कारण बढ़ गई हैं । गत दिसंबर माह से बांगलादेश में हालात बिगड़ते जा रहे हैं । अब तक वहां अलग-अलग क्षेत्ों में हिंदुओं पर हमलों और हत्याओं की कई घटिनाएं सामने आ चिुकी हैं । एक हिंदू व्यापारी को भीड़ द्ारा पीटि-पीटिकर मार डाले जाने की घटिना ने हालात की भ्यावहता को उजागर वक्या है । गत दिसंबर माह में सांप्रदाव्यक हिंसा की लगभग 51 घटिनाएं दर्ज की गईं, जिनमें दस हत्याएं, लूटिपाटि और आगजनी के 23 मामले, डकैती और चिोरी की दस घटिनाएं, झूठे ईशनिंदा आरोपों में हिरासत और ्यातना के चिार मामले, बलातकार के प्र्यास की एक घटिना और शारीरिक हमलों के तीन मामले शामिल हैं ।
बांगलादेश से हिंदुओं के विरुद्ध जारी सुवन्योजित हिंसा में स्ानी्य पुलिस-प्रशासन की भूमिका संदेहजनक दिखाई देती है क्योंकि हर घटिना के बाद पुलिस और प्रशासन लीपापोती में जुटि जाता है । इससे लगता है कि बांगलादेश में दलित हिनदुओं पर होने वाले हमलों एवं हिंसा के पीछे एक निर्धारित रणनीति काम कर रही हैI बांगलादेश में मोहममद ्यूनुस के नेतृतव वाली
अंतरिम सरकार के का्य्षकाल के दौरान अ्पसंख्यक हिनदू एवं बौद्ध जनता के विरुद्ध हिंसा, अराजकता और हत्या की घटिनाएं बढ़ी हैं ।
पददे के पीछे से पाकिसतान भी सहरिय
बांगलादेश में जमात-ए-इसलामी पाकिसतानी खुवफ्या एजेंसी आईएसआई की राह पर चिल रही है और वर्तमान में वह बांगलादेशी नागरिकों के मष्त्क में भारत विरोधी भावनाओं को भड़काकर अ्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा को पोषित करने में जुटिी हुई है । इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक उद्े््य ्यह भी दिखाई देता है कि बांगलादेश में जमात और कट्टरपंथी ततव हिंसा फैलाकर चिुनावों को रद् कराने की कोशिश कर रहे हैंI इसके पीछे मतदाताओं को चिुनाव के दौरान मतदान केंद्रों से दूर रखने की ्योजना है, जिससे चिुनाव के परिणाम जमात के पक्ष में किए जा सकें । जमात की ्योजनाओं को पाकिसतान की पूरी मदद मिल रही है ।
मीवड्या में आने वाले समाचिार ्यह सप्टि करते हैं कि बांगलादेश में जब से मोहममद ्यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली है, पाकिसतान का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है । जनरल असीम मुनीर की अगुवाई वाली पाकिसतानी फौज के सत्ा पर बढ़ते प्रभाव के
बांगलादेश से हिंदुओं के विरुद्ध जारी सुनियोजित हिंसा में स्ानीय पुलिस-प्शासन की भूमिका संदेहजनक दिखाई देती है कयोंकि हर घटिना के बाद पुलिस और प्शासन लीपापोती में जुटि जाता है । इससे लगता है कि बांगलादेश में दलित हिन्दुओं पर होने वाले हमलों एवं हिंसा के पीछे एक निर्धारित रणनीति काम कर रही हैI बांगलादेश में मोहममद यूनुस के नेतृतव वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान अलपसंखयक हिन्दू एवं बौद्ध जनता के विरुद्ध हिंसा, अराजकता और हतया की घटिनाएं बढी हैं ।
बीचि पाकिसतान न केवल बांगलादेश में भारत- विरोधी नफरती माहौल के विसतार में सफल हुआ है, बल्क उसने अपने पूर्ववतजी हिससे के
साथ रक्षा और व्यापारिक सह्योग बढ़ाने में भी सफलता पाई है । एक रिपोटि्ट के अनुसार बांगलादेश में पाकिसतान का मुख्य एजेंडा 1971
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