कवर स्टोरी
इसी तरह 2011 की जनगणना के आधार पर राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 5.8प्रतिशत अनुसूवचित जनजाति समाज का है । राज्य में कुल 40 अनुसूवचित जनजावत्यां( एसटिी) अधिसूवचित हैं । जनजाती्य समाज के लोग मुख्य रूप से पुरुवल्या, बांकुरा, झारग्ाम, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी में निवास करते हैं । जनजाती्य समाज की सर्वाधिक जनसंख्या वाला दार्जिलिंग में निवास करती है । राज्य में दलित शरणार््ष्यों( विशेषकर पूवजी पाकिसतान एवं बांगलादेश से आए नमोशूद्र समुदा्य) के मध्य मतुआ महासंघ राज्य की राजनीति में वनणा्ष्यक भूमिका निभाता है । 2011 के जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में दलितों की जनसंख्या लगभग 1.85 करोड़ है, जिसमें लगभग 80 लाख मतुआ संप्रदा्य के हैं ।
राज्य में दलित, आदिवासी एवं वंवचित वर्ग के विरुद्ध हिंसा एवं उतपीड़न कई वरषो से जारी है । राज्य की गरीब, दलित, वंवचित और आदिवासी परिवार की बहन-बेवटि्यों के साथ होने वाली नकारातमक घटिनाओं में अधिकतर तृणमूल नेता एवं उनके द्ारा पोषित हिनदू विरोधी कट्टर मुशसलम ततवों का ही नाम बार-बार सामने आने से ्यह सप्टि हो जाता है कि हिनदुओं अर्थात दलित, वंवचित एवं आदिवासी समाज के विरुद्ध होने वाली हिंसक घटिनाओं के दोवर्यों को सत्ा का मूक संरक्षण मिला हुआ है ।
राज्य में संदेशखाली जैसे अनेक क्षेत् बन चिुके हैं, जहां दलित, वंवचित एवं आदिवासी वर्ग की जनता भ्य के कारण मुख दर्शक की भूमिका में है । पिछले विधानसभा चिुनाव के बाद से राज्य में गरीब, दलित, वनवासी और भाजपा
समर्थक नेताओं एवं का्य्षकर्ताओं के विरुद्ध सुवन्योजित रूप से जारी हिंसा-उतपीड़न से शस्वत दिन-प्रतिदिन भ्यावह होती जा रही है । राज्य में भाजपा नेताओं, का्य्षकर्ताओं के साथ ही उस गरीब, दलित, वनवासी एवं आम जनता को लगातार निशाना बना्या जा रहा है । हिंसा और प्रतिशोध की राजनीति ने पूरे राज्य को बंधक बना वल्या है । ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य में लोकताशनत्क व्यवस्ा के तहत चिुनी हुई सरकार नहीं, बल्क पूरा गुंडातंत् सत्ा चिला रहा है । ।
दलितों का उतपीड़न और भयादोहन पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा दलित समाज
के लिए काल बन ग्यी है । हिंसा और उतपीड़न
12 tuojh 2026