Feb 2026_DA | Page 14

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िरा. आंबेडकर चरािते थे कि देश के हर बच्चे को एक समरान, अनिवराय्म और मुफत तशक्षरा मिलनी चरातिए, चरािे व किसी भी जराति, धर्म यरा वर्ग ्रा कयों न हो । वे संविधरान में तशक्षरा को मौलिक अतध्रार बनवरानरा चरािते थे । देश की आधी से जयरा्रा आबरा्ी ब्िराली, गरीबी और भदूखमरी की रेखरा पर अमरानवीय और असरांस्कृतिक जीवन जीने को अभिशपत है । इस आबरा्ी की आर्थिक सुरक्षरा सुनिश्रित करने के लिए ही आंबेडकर ने रोजररार के अतध्रार को मौलिक अतध्रार बनराने की व्रालत की थी । संविधरान में मौलिक अतध्रार न बन पराने के ्रारण 20 करोि से भी जयरा्रा लोग बेरोजररारी की मरार झेल रहे है । बराबरा सरािब ने दलित वरवो के लिए तशक्षरा और रोजररार में आरक्षण दिए जराने की व्रालत की थी तरात् उनिें ्दूसरो की तरह बरराबर के मौके मिल सकें । अगर तशक्षरा, रोजररार और आवरास को मौलिक अतध्रार बनरा दियरा जरातरा तो उनिें आरक्षण की व्रालत की शरायद जरूरत ही न होती ।
िरा. आंबेडकर प्जरातरांत्रिक सर्रारों की कमी से परिचित थे, इसलिए उनिोंने सधरारण ्रानदून की बजराय संवैधरातन् ्रानदून को महतव दियरा । मज्दूर अतध्रारों पर िरा. आंबेडकर ्रा मराननरा थरा कि वर्ण वयवस्था केवल श्रम ्रा ही विभराजन नहीं है, यह श्रमिकों ्रा भी विभराजन है । दलितों को भी मज्दूर वर्ग के रूप में एकत्रित होनरा चरातिए । मगर यह एकतरा मज्दूरों के बीच जराति की खराई को तम्टरा कर ही हो सकती है । आंबेडकर की यह सोच बेहद क्ररांतत्रारी है, कयोंकि यह भरारतीय समराज की सरामरातज् संरचनरा की सही और वरासततव् समझ की ओर ले जराने वराली कोशिश है ।
िरा. आंबेडकर भरारतीय दलितों ्रा रराजनीतिक सशकती्रण चरािते थे । उसी ्रा नतीजरा है कि आज लोकसभरा की 79 सी्टें अनुसदूतचत जरातियों के लिए और 41 सी्टें अनुसदूतचत जनजरातियों के लिए आरक्षित की गई है । सर्रार ने संविधरान संशोधन कर यह रराजनीतिक आरक्षण 2026 तक कर दियरा है । शुरू में आरक्षण केवल 10 वर्ष के लिए थरा । यह रराजनीतिक आरक्षण इन
समदूिों ्रा कितनरा सशकती्रण कर परायरा हैं, यह आज के समय ्रा एक बड़ा सवराल है । अपनरा जनसमर्थन खो देने के डर से कोई भी रराजनीतिक दल इस पर चचरा्म नहीं करनरा चराितरा ।
देखरा जराए, तो दल-बदल ्रानदून के रहते यह संभव ही नहीं है कि कोई दलित-आदिवरासी विधरायक यरा संसद अपनी मजटी से वो्ट कर सके । हमने देखरा है कि कुछ सराल पहले लोकसभरा में दलित-आदिवरासी सरांसदों ने एक फोरम बनरायरा थरा, इन वरवो के अतध्रारों के लिए, परा्टटी लराइन से ऊपर उ्ठ्र । दल-बदल ्रानदून के ्रारण वह बेअसर रिरा है । आंबेडकर ्दूर्शटी नेतरा थे उनिें अहसरास थरा कि इन समदूिों को बरराबरी ्रा ्जरा्म पराने के लिए बहुत समय लगेररा, वे यह भी जरानते थे कि सिर्फ आरक्षण
से सरामरातज् न्याय सुनिश्रित नहीं कियरा जरा सकतरा । हमने देखरा है कि पदूव्म राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिह, बराबदू जगजीवन रराम, मरायरावती जी, आदि दलित-तपििे नेतराओं पर किस तरह के जुमले और फिकरे रढ़े जराते रहे हैं ।
िरा. आंबेडकर ्रा पदूररा जोर दलित-वंचित वरगों में तशक्षरा के प्सरार और रराजनीतिक चेतनरा पर रिरा है । आरक्षण उनके लिए एक सीमराबवि तरकीब थी । दुभरा्मगय से आज उनके अनुयरायी इन बरातों को भुलरा चुके है । बड़ा सवराल यह है कि सवतंत्ररा के 67 सरालों में भी अगर भरारतीय समराज इन दलित-आदिवरासी समदूिों को आतमसरात नहीं कर परायरा है, तो जरूरत है पदूरे संवैधरातन् प्रावधरानों पर नई सोच के सराथ देखने की, तरांकि इन वरगों को सरामरातज् बरराबरी के
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