eMag_March 2021_Dalit Andolan | Page 25

जा सकता है ।
पाकिसतान सरकार दलितों को सीमा से बाहर जाने से रोकने का हर समभि प्रयत्न कर रही है । इसके पीछे कारण यह है कि वह चिाहते हैं कि दलित वर्ग वहीं रह कर उनके लिए निम्न कोमटि वाले कार्य करता रहे तथा भूमिहीन मजदूर की भांति पाकिसतान के जमींदारों के लिए काम करता रहे । पाकिसतान सरकार विशेष रूप से सफाई कम्यचिारियों को रोके रखना चिाहती है , जिसको उसने अनिवार्य सेवा से समबंमधत घोषित कर दिया है और बिना एक महीने की अग्रिम नोमटिस दिए उनको छोड़ने को तैयार नहीं है । एमईओ नामक संगठन दलित शर्णार्थियों की
मदद के लिए कुछ सार्थक सिद्ध हुआ है , जो पाकिसतान छोड़ने के लिए उतसुक हैं । किंतु मैं समझता हूं कि पाकिसतान की सरकार एमईओ को अनुमति प्रदान नही कर रही है कि वह दलितों के सीधे समपक्फ में आकर भारत आने
वाले दलितों की सहायता कर सके । फलत : दलितों द्ारा पाकिसतान छोड़ने की प्रक्रिया धीमी गति से चिल रही है और कहीं कहीं तो बिलकुल ठपप है । मुझे यह भी ज्ञात हुआ है कि एमईओ जलदी ही बंद होने वाला है । यदि यह शंका सचि होती है तो पाकिसतान से दलितों का आना बिलकुल असंभव हो जायेगा ।
बाबा साहब का यह पत् ततकालीन समय में नेहरू द्ारा पाकिसतान में फंसने वाले दलितों की शसथमतरों को उजागर करती है । साथ ही बाबा साहब को जो आशंका थी कि पाकिसतान में दलित फंस जाएंगे , वह भी सही साबित हुई । पाकिसतान में दलितों को फंसाने वाले दलित
नेता जोगेंद्र नाथ मंडल भी थे , जो पाकिसतान के पहले कानून मंत्ी भी बने । पाकिसतान बनने से पहले जोगेंद्र नाथ मंडल ने बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के साथ मिलकर अनुसूमचित जाति संघ को पूिटी बंगाल में सथामपत किया ।
उस समय पूिटी बंगाल की राजनीति में दलित और मुशसलम समुदाय का िचि्यसि था । मंडल ने सांप्रदायिक मामलों पर कांग्रेस और मुशसलम लीग के बीचि अतरमधक राजनीतिक अंतर पाया । जब 1946 में सांप्रदायिक दंगे फैल गए तब जिन्ा के कहने पर उनहोंने पूिटी बंगाल के सभी क्ेत्ों में यात्ा की और दलितों को मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में भाग न लेने के लिए तैयार किया । उनहोंने दलितों को समझाया कि मुशसलम लीग के साथ विवाद में कांग्रेस के लोग दलितों को इसतेमाल कर रहे हैं ।
भारत विभाजन के बाद मंडल पाकिसतान के संविधान सभा के सदसर और असथारी अधरक् बने और पाकिसतान के प्रथम कानून और श्म मंत्ी बने । 1947 से 1950 तक वह पाकिसतान की ततकालीन राजधानी कराचिी में रहे , 1950 में पाकिसतान के ततकालीन प्रधानमंत्ी लियाकत अली खान को अपना इसतीिा देने के बाद मंडल वापस भारत लौटि आये । अपने इसतीिे में मंडल ने पाकिसतानी प्रशासन के हिंदू विरोधी कारयों का विसतृत हवाला दिया । उनहोंने अपने तराग पत् में सामाजिक अनरार और अलपसंखरकों के प्रति पक्पातपूर्ण वरिहार से संबंधित घटिनाओं का विसतृत उललेख किया ।
वैसे यहां धरान देने लायक बिंदु यह है कि जब पाकिसतान बना तो मंडल के कहने पर लाखों दलित पाकिसतान चिले गये ्रोंकि मंडल को वि्िास था कि मुसलमान उनका साथ देंगे और उनहें अपनाएंगे । लेकिन उनके साथ ्रा हुआ , इसे जानना और समझना बहुत जरूरी है , 1946 में अंतरिम सरकार बनी तो कांग्रेस और मुशसलम लीग ने अपने प्रतिनिधियों को मंत्ीपद के लिए चिुना और मुशसलम लीग ने जोगेंद्र नाथ मंडल का नाम भेजा । पाकिसतान बनने के बाद मंडल को कानून और श्म मंत्ी बनाया गया ्रोंकि वह जिन्ा के बहुत करीबी थे और असम के सिल्हाट को पाकिसतान में मिलाने में महतिपूर्ण भूमिका निभाया था ।
3 जून 1947 की घोषणा के बाद असम के सिल्हाट को जनमत संग्रह से यह तय करना था कि वो पाकिसतान का हिससा बनेगा या भारत
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