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करते हैं । हालांकि बंगाल के अनर पिछड़ा िगयों के लिए कोई जनगणना आंकड़ा उपलबध नहीं है । इसी तरह राजर में मतुआ समुदाय का भी दमक्ण बंगाल के लगभग 60 विधानसभा सीटिों पर िचि्यसि है । मुशसलमों के बढ़ते उतपीडन और उस उतपीडन के विरुद्ध ममता की चिुपपी के कारण मतुआ , नामसुद्रों सहित अनर दलित और आदिवासी जातियां एकजुटि हो गयी हैं । दलित और वंमचित समाज की लगातार अनदेखी से पैदा हो रहा क्रोध अब सड़कों पर दिखने लगा है । लेकिन मुखरमंत्ी ममता पर इसका कोई असर फिलहाल दिख नहीं रहा है और वह अपनी पार्टी द्ारा पोषित गुंडों के बल पर अपनी सत्ा को बचिाने की कोशिश में जुटिी हुई हैं ।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सिीकार्यता लगातार बढ़ रही है । भाजपा राजर में दूसरे नंबर की पार्टी बन गयी है । वामदलों के साथ ही कांग्रेस को पीछे छोड़कर भाजपा का मुखर विपक्ी दल के रूप में उभारना यह इंगित करता है कि राजर में भाजपा के प्रति आम जनता को मोह लगातार बढ़ रहा है और इसके पूरा श्ेर भाजपा नेता और प्रधानमंत्ी नरेंद्र मोदी और इनकी जनकलराणकारी नीतियों को दिया जा सकता है । मोदी सरकार की क्रियाप्रक्रिया और जनकलराणकारी नीतियों से घबरा कर ममता सरकार ने कई ऐसी योजनाओं को राजर में लागू करने से इंकार कर दिया , जिनका लाभ वर्तमान में देश के अनर राजरों की गरीब , दलित और आदिवासी जनता को मिल रहा है । ममता सरकार की उदासीनता के कारण केंद्र सरकार की लगभग 80 योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचि पाया है । यह सभी वह योजनाएं हैं , जिनहें गरीबों , दलितों , आदिवासियों और पिछड़े समुदायों के हितों के दृष्टिगत लागू किया गया है । बंगाल में बेहद गरीबी में जी रहे लाखों हिंदू परिवारों को ममता सरकार की नीतियों के कारण कई सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है । आगामी विधानसभा चिुनाव में भाजपा का लक्र लगभग 200 सीटिें हासिल करने का है और पार्टी इसी दिशा में लगातार अपना काम करते हुए सक्रिय है ।
असम में फिर भाजपा सरकार राजर में 2016 में हुए विधानसभा चिुनाव में
भाजपा ने पहली बार सरकार का गठन किया था । पिछले विधानसभा चिुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले राजग गठबंधन को 86 सीटिें मिली थीं । राजर में सरकार बनाने में आम जनता , विशेष रूप से दलित जनता का विशेष योगदान रहा । पिछले पांचि वर्ष के दौरान भाजपा ने सामाजिक-आर्थिक शसथमतरों को धरान में रखकर
जिस तरह से सत्ा का संचिालन किया , उसके सुखद परिणाम गरीब , दलित , वनवासी एवं वंमचित जनता के सामने आये और उनकी शसथमतरों में आमूलचिूल परिवर्तन हुआ । 2001 की जनगणना के अनुसार , राजर की कुल आबादी का 6.9 प्रतिशत अनुसूमचित वर्ग से संबंधित हैI राजर की सोलह उपजाति अनुसूमचित जाति की श्ेणी में शामिल हैं । इनमें कैबाट्ा्य ( जलिया ), बनिया , धोबी ( धूपी ), हीरा , झालो ( झालो- मालो ), दुगला ( ढोली ), बांसफोर , भुइंमाली ( माली ), जलकोटि , मुंचिी , पाटिनी , नामसुद्र , लालबेगी , महरा , मेहतर ( भंगी ) और सूत्धार शामिल हैं ।
असम में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्र एवं राजर सरकार ने जिस तरह से असम सहित उत्र -पूर्व के समग्र एवं नियोजित सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए कदम उठाए , उसका
परिणाम यह है कि उत्र-पूर्व के सभी राजरों में भाजपा की शसथमत मजबूत हुई और उत्र-पूर्व रा्ट् के विकास की नई कहानी लिख रहा हैं । सामाजिक और आर्थिक रूप से दलित- आदिवासी वर्ग के हालात में आमूलचिूल परिवर्तन हुआ है , जिससे उत्र-पूिटी राजरों में शांति सथामपत करने के कदम सफल हुए हैं । सुरक्ा शसथमतरों में हुए बदलाव के साथ मजहबी एवं चिचि्य की दलित विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगना प्रारमभ हुआ है । समाज के अंतिम वरश्त को लक्र बनाकर मोदी सरकार द्ारा प्रारमभ की गयी विकास योजनाओं और भाजपा की रा्ट् समर्पित सकारातमक राजनीति के कारण पार्टी असम में एक मजबूत शसथमत मंर पहुंचि चिुकी है । राजर में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्र एवं राजर सरकार ने जिस तरह से असम सहित उत्र -पूर्व के समग्र एवं नियोजित सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कदम उठाए , उसका परिणाम यह है कि उत्र- पूर्व के सभी राजरों में भाजपा की शसथमत मजबूत हुई और उत्र-पूर्व रा्ट् के विकास की नई कहानी लिख रहा हैं । सामाजिक और आर्थिक रूप से दलित-आदिवासी वर्ग के हालात में आमूलचिूल परिवर्तन हुआ है , जिससे उत्र-पूिटी राजरों में शांति सथामपत करने के कदम सफल हुए हैं । सुरक्ा शसथमतरों में हुए बदलाव के साथ मजहबी एवं चिचि्य की दलित विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगना प्रारमभ हुआ है । समाज के अंतिम वरश्त को लक्र बनाकर मोदी सरकार द्ारा प्रारमभ की गयी विकास योजनाओं और भाजपा की रा्ट् समर्पित सकारातमक राजनीति के कारण पार्टी असम में एक मजबूत शसथमत में पहुंचि चिुकी है । ऐसे में राजर में पुनः भाजपा सरकार का बनना तय है ।
तमिलनाडु में दलितों को है भाजपा सरकार का इंतजार
तमिलनाडु में दलित वर्ग की जनसंखरा लगभग 21 प्रतिशत है । जातीय हिंसा के लिए राजर कुखरात हो चिुका है । कथित द्रविड़ राजनीति ने दलित वर्ग के हितों को बुरी तरह
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