प्रभावित किया है । राजर में अनर पिछड़ा वर्ग और दलितों के बीचि पैदा हुई गहरी खाई भी इसी द्रविड़ राजनीति का नकारातमक परिणाम है । चिचि्य से जुडी शक्तरां िषयों से राजर में हिनदू हितों को प्रभावित करने में जुटिी हुई हैं और अब इसमें मजहबी शक्तरां भी सशमममलत हो चिुकी हैंI इन सबके बीचि भाजपा अपना जनाधार खड़ा करने के लिए प्रयास कर रही है । 2014 में केंद्र में मोदी सरकार का गठन होने के बाद तमिलनाडु में भाजपा का जनाधार बढ़ा है । मोदी सरकार की विकासवादी राजनीति और कार्यक्रमों ने जनता के बीचि भाजपा को बढ़त बनाने में सफलता मिली है और यह 2016 के विधानसभा चिुनाव में भाजपा को मिले कुल प्रतिशत में 2019 के लोकसभा चिुनाव में मिले मत प्रतिशत में सप्टि रूप से देखा जा सकता है ।
डीएमके और एआईडीएमके के बीचि बंटिी राजर की राजनीति में कांग्रेस लगातार सिकुड़ रही हैं । वैसे भी राजर में कांग्रेस का अपना सितनत् वजूद कभी नहीं रहा , परनतु भाजपा लगातार जनता के बीचि अपना विसतार कर रही है । आगामी विधानसभा चिुनाव के लिए पार्टी अपनी पूर्ण रणनीति के साथ कार्य कर रही है । तीसरी सदी में पार्टी का लक्र दमक्ण भारत के राजरों में अपना परचिम लहराने का है । पिछले विधानसभा चिुनाव में अन्ाद्रमुक नीत रा्ट्ीर जनतांमत्क गठबंधन के साथ मिलकर भाजपा ने चिुनाव लड़ा था , पर अबकी बार पार्टी अपनी दम पर चिुनाव मैदान पर उतरने की तैयारी कर रही है । 2011 की जनगणना के अनुसार , राजर में दलित वर्ज की जनसंखरा लगभग 20.1 प्रतिशत हैं । राजर के दोनों राजनीतिक दल
डीएमके और एआईडीएमके पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधिति करती है , लेकिन वहां पर अभी तक कोई बड़ा दलित नेता पैदा नहीं हो पाया है । राजर में कोई बड़ा दलित नेता पैदा न होने का एक कारण दलित वोटिों में बिखराव का होना है । पूर्व अधरक् के रूप में अमित शाह ने दमक्ण भारत में पार्टी के आधार को बढ़ाने के लिए जिस तरह से कार्य किया , उसके चिलते राजर में भाजपा की शसथमत मजबूत हुई है । मोदी सरकार के विकास कारयों के साथ ही रा्ट्ीर सिरं सेवक संघ के कारयों से आम जनता के बीचि भाजपा की पैठ बढ़ती जा रही है । राजर के समग्र विकास के साथ ही मजहबी और चिचि्य से जुडी रा्ट् विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के एजेंडे को लेकर चिल रही पार्टी विधानसभा चिुनाव में और जरादा शक्तशाली होकर सामने आएगी ।
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