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पलचिम बंगाल में परिवर्तन का माहौल पश्चिम बंगाल में 2011 के जनगणना के
नजर आती है । देश के समग्र विकास में पीछे रहने वाली गरीब , दलित , वनवासी और वंमचित वर्ग की जनता को यह उममीद है कि जिस तरह से केंद्र में सत्ारूढ़ भाजपा सरकार ने उनके हितों के लिए रासता तैयार किया है , ठीक उसी तरह इन पांचिों राजरों में भाजपा सरकार का गठन होने के बाद उनके विकास के लिए वह सभी रासते खुल जाएंगे , जिन रासतों के खुलने का वह दशकों से इंतजार कर रहे हैं ।

पलचिम बंगाल में परिवर्तन का माहौल पश्चिम बंगाल में 2011 के जनगणना के

अनुसार दलितों की जनसंखरा लगभग 1.85
करोड़ है , जिसमें 80 लाख मतुआ संप्रदाय के लोग हैं । राजर में 84 विधानसभा सीटिें अनुसूमचित जाति और जनजाति के लिए आरमक्त हैं । तृणमूल नेता ममता बनजटी के कार्यकाल में यह वह राजर बन गया है , जहां हिंदू जनसंखरा दूसरे दजचे के नागरिकों के रूप में रह रही हैं । देखा जाए तो ममता सरकार ने पूरे राजर को आक्रामक इसलामवादियों के हाथों में सौंप दिया गया है । राजर की दलित जनता इसलामिक उतपीड़न और दमन का शिकार बन रही है । इसलामिक कट्रता के कारण राजर एक और खूनी विभाजन की ओर अग्रसर हो रहा है और रोजाना होने वाली प्रायोजित राजनीतिक हिंसा के कारण दलित और गरीब वर्ग की जनता सबसे जरादा परेशान है । 1947 में विभाजन के समय राजर में मुशसलम आबादी 19 प्रतिशत थी , जो साल 2011 में बढ़कर 27 फीसदी हो चिुकी है । राजर में जिस तरह से मुशसलम आबादी बढ़ी है , उसका नकारातमक परिणाम राजर की दलित , आदिवासी और पिछड़ी हिनदू
आबादी को भुगतना पड़ रहा है ।
यह पश्चिम बंगाल का दुर्भागर ही कहा जाएगा कि राजर में दलित , वनवासी और पिछड़ी हिनदू आबादी सितंत्ता से पहले भी उतपीड़न और दमन को झेलने के लिए अभिशपत थी और यही हालात वर्तमान में भी हैं । राजर में सर्वहारा वर्ग के समग्र कलराण का दावा करने वाले वाममोचिा्य शासनकाल के 32 िषयों से लेकर तृणमूल नेता ममता के शासनकाल में भी शसथमतरों में कोई परिवर्तन नहीं आया । बंगाली भाषी दलितों में , नमशुद्र और पाउंड्ोखमत्रास में क्रमश : 17 और 12 प्रतिशत हिससेदारी है , जो उनहें मुखर रूप से दमक्ण बंगाल में सबसे अधिक आबादी वाला और प्रभावशाली बनाते हैं । राजबंगाशी उत्र बंगाल में एससी आबादी के 18 प्रतिशत हिससे के साथ मुखर पिछड़ा समुदाय का प्रतिनिधिति
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