eMag_June 2026_DA | Seite 8

अ. भा. जनजाति सांस्ककृतिक समागम विशेषांक

गई । ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए मिशनरर्यों द्ारा अपनाई गई अ्वैध धमाांतरण रणनरीलत में जनजातरी्य क्षेत्ों में सकूल और असपताल बनाकर बडे पैमाने पर से्वा के बहाने अ्वैध धमाांतरण करा्या ग्या । ईसाई मिशनरर्यों के निशाने पर रहते हुए उनहीं करी तरह जनजातरी्य समाज को अ्वैध ढिंग से किए जाने ्वाले मुससलम धर्मानतरण का दंश झेलना पड़ा । आज देश भर में जनजातरी्य समाज, ईसाई ए्वं मुससलम धमाांतरण के जाल को तोड़ने के लिए गंभरीरता के साथ प्र्यास कर रहा है ।
आश्चर्य करी बात ्यह है कि स्वतंत्ता के उपरांत देश करी सत्ा संभालने ्वालरी कांग्रेस कई दशकों तक ्यह दा्वा करतरी रहरी कि जनजातरी्य क्षेत्ों में ल्वकास कार्यों में मदद करने ्वालरी ईसाई मिशनरर्यां ए्वं मुससलम समुदा्य का तंत् अ्वैध धर्मानतरण में कहीं भरी लिपत नहीं है और ऐसे तमाम आरोप निराधार हैं ।
बेअसर रहे धमाांतरण संबंधी कानून
लरिटिश काल के दौरान 1930 और 1940 के मध्य देश करी कुछ हिंदू रर्यासतों ने अ्वैध धमाांतरण को रोकने के लिए कानून बनाए थे । इसका उद्ेश्य हिंदुओं को ईसाई धर्म के अ्वैध धमाांतरण रड्यंत् में फंसने से रोकना ए्वं हिंदू धर्म और पहचान को संरक्षित करना था । कोटा,
बरीकानेर, जोधपुर, रा्यगढ़, पटना, सरगुजा, उद्यपुर और कालाहांडरी करी रर्यासतों द्ारा बनाए गए कानूनों में रा्यगढ़ राज्य धमाांतरण अलधलन्यम-1936, सरगुजा राज्य धर्मत्याग अलधलन्यम-1942 और उद्यपुर राज्य धमाांतरण- ल्वरोधरी अलधलन्यम-1946 को देखा जा सकता है ।
स्वतंत्ता के बाद 1954 में भारतरी्य धमाांतरण( लन्यमन और पंजरीकरण) ल्वधे्यक, पिछडे समुदा्य( धार्मिक संरक्षण) ल्वधे्यक और 1979 में धर्म करी स्वतंत्ता ल्वधे्यक जैसे कानून बनाए तो गए, लेकिन ्यह ल्वधे्यक संसद से पारित नहीं हुए । 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदरी के नेतृत्व ्वालरी सरकार ने धमाांतरण ल्वरोधरी कानून को और सखत लक्या । अबकरी बार सरकार करी सहमति के बिना किसरी अन्य धर्म में धमाांतरण
से संबंधित कानून के उललंघन के गंभरीर परिणामों को फिर से लागू करते हुए क्ठोर दंड का प्रा्वधान लक्या ग्या ।
अ्वैध रूप से होने ्वाले धमाांतरण को लेकर केंद्र सरकार के सभरी प्र्यास उस ससथलत में व्यर्थ हो जाते हैं, जब ल्वलध ए्वं न्या्य मंत्ाल्य ऐसे कानून को संल्वधान करी सात्वीं अनुसूचरी के अंतर्गत राज्य सूचरी में डाल देता है । फिलहाल देश के 29 राज्यों में से आ्ठ राज्यों क्रमशः अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और उत्राखंड में अ्वैध धर्मातरण के ल्वरुद्ध धमाांतरण ल्वरोधरी कानून हैं । कानून का मूल उद्ेश्य व्यक्तियों और समाजों को अपने पू्व्षजों के धर्म को किसरी अन्य धर्म में परर्वलत्षत करने से रोकना है । इसके बाद भरी जनजातरी्य क्षेत्ों में
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