जनजातरी्य समाज अब धर्मानतरण के ल्वरुद्ध मुखर हो रहा है । दिल्ली आए समाज के लोगों करी मांग है कि अ्वैध धर्मानतरण के जाल से उनहें मुकत करा्या जाए । इनका आरोप है कि जनजातरी्य समाज के लोगों को प्रलोभन और षड्ंत् करके ईसाई मिशनररी ए्वं मुससलम समुदा्य अ्वैध रूप से होने ्वाले धमाांतरण के तंत् को संचालित कर रहे हैं । धमाांतरित होने के बाद भरी ऐसे लोग हिंदू नाम से नौकररी करके मूल लोगों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं ।
ल्व जेहाद ए्वं भूमि जेहाद के उपरांत उनकरी महिलाओं ए्वं भूमि को निशाना बना्या जा रहा है । ईसाई मिशनरर्यों करी प्रलोभन रणनरीलत मासूम जनजालत्यों को हिंदू संस्कृति से अलग कर रहरी है और इस ल्वर्य पर गंभरीरता से ध्यान देना
होगा । जनजातरी्य समाज सनातन धर्म का अभिन्न अंग है और उनहें धरीरे-धरीरे सनातन संस्कृति से अलग करने करी कोशिश करी जा रहरी है । ्यह देश के लिए गंभरीर खतरा है ।
जनजातीय समाज और धर्मान्तरण
जनजातरी्य समाज और धमाांतरण का ल्वर्य भारत में बेहद सं्वेदनशरील और जटिल है । सलद्यों से प्रककृलत पूजक रहे जनजातरी्य समाज को अपनरी ल्वलशषट संस्कृति के लिए पहचाना जाता है । जनजातरी्य समाज के लोगों का अ्वैध रूप होने ्वाला धमाांतरण एक ऐसरी प्रलक्र्या के रूप में देखा जा सकता है, जो अब एक बडरी सामाजिक समस्या बन चुका है । अ्वैध रूप से
होने ्वाला धमाांतरण करी प्रलक्र्या भारत में स्वाधरीनता से पहले से चल रहरी है ।
इतिहास साक्षरी है कि लरिटिश काल के मध्य देश के जनजातरी्य क्षेत्ों में ईसाई मिशनरर्यों ने अंग्रेजों करी पूर्ण मदद से अ्वैध रूप से धमाांतरण करी प्रलक्र्या को जनम लद्या था । इसके लिए मिशनरर्यों ने प्रलोभन का सहारा लल्या । 1857 करी क्रांति के उपरांत भारत में लरिटिश राज्य करी सथापना ए्वं सत्ा करी आ्यु को लमबे काल के लिए बढ़ाने के दृसषटगत मध्य ए्वं पूर्वी भारत में शिक्षा, चिकितसा, आर्थिक सहा्यता के नाम पर जनजातरी्य समाज को भ्रमित करने के लिए ईसाई मिशनरर्यों के प्र्वेश के साथ आरमभ हुई अ्वैध धर्मानतरण करी प्रलक्र्या धरीरे- धरीरे देश के सभरी जनजातरी्य क्षेत्ों तक फैल
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