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अ. भा. जनजाति सांस्ककृतिक समागम विशेषांक

सांस्कृतिक समागम ' में केंद्र सरकार ने पुनः सपषट कर लद्या है कि समान नागरिक संहिता( ्यूसरीसरी) के अंतर्गत आलद्वासरी समाज करी संस्कृति ए्वं परमपराओं पर किसरी भरी तरह का प्रतिबनध नहीं लागू होगा । जनजातरी्य समाज के मध्य एक रड्यंत् के रूप में देशभर में भ्रम फैला्या जा रहा है कि ्यूसरीसरी लागू होने के बाद आलद्वासरी समाज के लिए नई समस्याएं उतपन्न होगरी, जबकि ्वास्तव में ऐसा कुछ भरी नहीं है । ्यूसरीसरी कानून के लागू होने से ्वन्वासरी, आलद्वासरी ्या गिरर्वासरी समाज पर कोई प्रभा्व नहीं पड़ेगा । ्यूसरीसरी से जनजातरी्य समाज का कोई लेना-देना नहीं है ।
गत 24 मई को राजधानरी दिल्ली में आ्योजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में देश के सुदूर क्षेत्ों में लन्वास करने ्वालरी पांच सौ से अधिक ल्वलभन्न जनजातरी्य समाज के 1.5 लाख से अधिक लोग अपनरी पारंपरिक ्वेशभूषा के साथ ससममलित
हुए । जनजातरी्य सुरक्षा मंच द्ारा लाल किला में आ्योजित जनजातरी्य सांस्कृतिक समागम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्ररी्य गृह मंत्री अमित शाह उपससथत रहे । जनजातरी्य पहचान और राषट्री्य एकता करी सांस्कृतिक अभिव्यसकत को प्रदर्शित करने ्वाले नारे ' तू मैं एक रकत, ्वन्वासरी- ग्राम्वासरी-नगर्वासरी, हम सब भारत्वासरी ' करी गूंज के साथ हुए समागम से पहले राजधानरी के अलग-अलग पांच सथानों से शोभा ्यात्ा निकलरी गई, जनजातरी्य समाज के लोग पारंपरिक ्वेशभूषा में अपनरी-अपनरी लोक संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए । इस अ्वसर पर राषट् निर्माण में महत्वपूर्ण ्योगदान देने ्वाले जनजातरी्य समाज के अदम्य साहस के प्रतरीक 75 गुमनाम ना्यकों और ल्वभूलत्यों पर केंद्रित एक ल्वशेष प्रदर्शनरी भरी लगाई गई ।
देश करी राजधानरी दिल्ली में स्वतंत्ता के उपरांत पहलरी बार लाखों करी संख्या में जुटे
जनजातरी्य समाज के ल्वशाल समागम का मुख्य उद्ेश्य जनजातरी्य पहचान को संरक्षित करना, जनजातरी्य कला-संस्कृति को बढ़ावा और जनजातरी्य समाज के मध्य एकता का संदेश देना था । लेकिन समागम में जनजातरी्य समाज के बरीच अ्वैध रूप से होने ्वाला धमाांतरण और डरी-लिस्टिंग अर्थात धर्म परर्वत्षन कर चुके जनजातरी्य समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति( एसटरी) करी सूचरी और उनहें मिलने ्वाले आरक्षण के लाभों से बाहर करने जैसे मुद्े भरी मुख्य रूप से सामने आए ।
धमाांतरण की पीड़ा
मूलत: शांत, सहज और प्रककृलत के सान्निध्य में रहने ्वाले जनजाति समाज के लोगों ने पहलरी बार देश करी राजधानरी में हुए जनजाति सांस्कृतिक समागम में धमाांतरण के ल्वरुद्ध शंखनाद लक्या । देश में नकसलल्यों का उनमूलन होने के बाद
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