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अ. भा. जनजाति सांस्ककृतिक समागम विशेषांक

दिल्ीवासियों ने महसूस की जनजातीय समाज की सकारात्मक ऊजजा सनातन संस्ककृति, गौरव एवं परमपराओं के बीच जनजाति सांस्ककृतिक समागम का आयोजन

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श करी राजधानरी दिल्ली में भरीरण गमवी के बाद भरी लाल किले करी ओर जाने ्वाले मागयों पर सकारातमक और जरी्वंत ऊर्जा के साथ उमड़तरी हुई भरीड सथानरी्य लोगों के लिए कौतूहल का ल्वर्य थरी । रंग-बिरंगे परंपरागत परिधानों में जनजातरी्य संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए लाखों लोगों का उतसाह देखने ला्यक था । स्वतंत्ता के बाद ऐसा पहलरी बार हुआ, जब राजधानरी दिल्ली में भग्वान बिरसा मुंडा करी 150्वीं ज्यंतरी ्वर्ष के उपलक््य में ' जनजाति सांस्कृतिक समागम ' का भव्य आ्योजन लक्या ग्या ।
ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आ्योजित समागम में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पसशचम बंगाल, अंडमान-निकोबार सहित ल्वलभन्न राज्यों में लन्वास करने ्वालरी 550 से अधिक जनजालत्यों के डेढ़ लाख से अधिक लोग दिल्ली पहुंचे । जनजातरी्य संस्कृति, जनजातरी्य परंपराओं का संरक्षण, जनजातरी्य अससमता, जनजातरी्य गौर्व और जनजातरी्य समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्ों को लेकर राजधानरी आने ्वाले प्रलतलनलध्यों में अधिकतर ऐसे थे, जिनहोंने पहलरी बार दिल्ली को देखा ।
लाल किला प्रांगण में जनजातरी्य समाज के पारंपरिक रंगों को प्रदर्शित करते हुए लोक संगरीत और नृत्यकला के बरीच ' तू मैं एक रकत,
्वन्वासरी-ग्राम्वासरी-नगर्वासरी ' का मुखर संदेश देने ्वाले समागम को मुख्य अतिथि ए्वं केंद्ररी्य गृहमंत्री अमित शाह ने‘ जनजालत्यों का महाकुंभ‘ बता्या । उनहोंने समान नागरिक संहिता
( ्यूसरीसरी) और डरी-लिस्टिंग जैसे गंभरीर मुद्े पर जनजातरी्य समाज के लोगों को आश्वसत करते हुए कहा कि ्यूसरीसरी कानून जनजालत्यों को प्रभाल्वत करने के उद्ेश्य से नहीं बना है और न
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