eMag_June 2026_DA | страница 21

करने करी सं्वैधानिक बाध्यता से ्युकत है । 2. मैंने अनेक ल्वलधक और सांल्वधानिक
ल्वशेषज्ञों के साथ ल्वचार ल्वमर्श भरी लक्या ।
3. इस प्रकार, ्यह प्रश्न उतपन्न होता है कि क्या अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदा्यों के सदस्यों के एक धर्म से दूसरे धर्म में बलपर् नूक परर्वत्षन को लन्यंलत्त करने के लिए केन्द्री्य सरकार द्ारा का्य्षकाररी लनददेश जाररी किए जा सकते हैं ्या नहीं? इस प्रश्न का उत्र कुछ अन्य संबद्ध प्रश्नों का ल्वशलेरण करने और उन पर का्य्ष करने के पशचात हरी लक्या जा सकता है । जैसे कि क्या उकत लन्यम भारत के संल्वधान के अनुचछेद-46 में ्यथाअंतल्व्षषट अनुसूचित जालत्यों / जनजालत्यों के हित करी संरक्षा करने से संबंधित है ।
मेरा सुझा्व ्यह है कि ्यलद केन्द्री्य समाज कल्याण और अधिकारिता मंत्ाल्य( नई दिल्ली) करी पहल पर भारत के संल्वधान के अनुचछेद-15( 4), 25, 46, 51 के और अनुसूचरी-5 और 6 के साथ गल्ठत अनुचछेद-73 और अनुचछेद-256 के अधरीन कोई लन्यम जाररी
लक्या जाता है तो उकत लन्यम में निम्नलिखित अनुबंध ससममलित होने चाहिएi. अनुसूचित जाति / जनजाति के एक धर्म से दूसरे धर्म में परर्वत्षन के सभरी मामले उपा्युकत करी लिखित अनुमति के बिना रोकने होंगे । ii. उप्युकत धर्म के परर्वत्षन के लिए के्वल पक्षकार द्ारा अपनरी सहमति बताते हुए आ्वेदन करने पर, जिसके साथ एक प्रतिज्ञापत् का शपथ पत् होगा, और निम्नलिखित सत्यापन करने के पशचात हरी अनुमति प्रदान करने ्वाला आदेश पारित कर सकेगा कि क्या-
( क) व्यसकत अनुसूचित जाति / जनजाति समुदा्यों का है और कम से कम दस्वीं पास है ।
। ii. धर्म परर्वत्षन के मामले में सहा्यता करने के लिए का्य्ष्वाहरी करने ्वाला व्यसकत ्या प्राधिकाररी ऐसे परर्वत्षन का सम्य और सथान बताते हुए जिला कलेकटर को सूचना देगा, ्यलद
( क) व्यसकत अनुसूचित जाति ्या जनजाति समाज का है ।
( ख) व्यसकत करी शैक्षिक अर्हता कम से कम दस्वीं कक्षा नहीं है । iv. ऊपर लन्यम( 1) के अधरीन आ्वेदन करी प्रासपत पर ्या ऊपर लन्यम( iii) के अनुसरण में सूचना करी प्रासपत पर जिला कलेकटर ऐसे धर्म परर्वत्षन के लिए संप्रेषक / साक्षरी करी लन्युसकत करेगा, जो उस संप्रदा्य का, जिसमें उकत परर्वत्षन लक्या जाना चाहा ग्या है, लसल्वल से्वक होगा । v. ऐसा कोई व्यसकत जो उपरोकत लन्यमों का उललंघन करेगा एक हजार रुपए प्रति दिन के जुर्माने से दंडनरी्य होगा ।
VII. उपरोकत अनुबंध संपरर्वत्षन और पुनः संपरर्वत्षन दोनों को शासित करेगा ।
5. अब ्यह जांच करें कि क्या ऐसा कोई लन्यम लोक व्य्वसथा के हित होगा ्या ्यह भारत के संल्वधान के किसरी उपबंध का उललंघन करता है ्या नहीं?
6. ्यह सत्य है कि संल्वधान का अनुचछेद-25 सभरी नागरिकरी को गारंटरी देता है कि ्वह व्यैसकतक स्वतंत्ता के लिए समान हकदार है और उनहें स्वतंत् रूप से व्यकत करने, व्य्वसा्य करते और धर्म का प्रचार करने का अधिकार है, किनतु उकत अधिकार लोक व्य्वसथा, नैतिकता, स्वासथ्य और संल्वधान के भाग-3 के अन्य उपबंधों के अधरीन रहते हैं । भूतपू्व्ष राषट्पति राधा ककृषणन के शबदों में उकत अनुचछेद में तात्विक रूप से जो अंतल्वषट है, ्वह धार्मिक निषपक्षता है । उनहोंने अपनरी पुसतक रिक्वररी आफ फेथ के पृष्ठ-184 में ्यह सपषट लक्या था कि भारत के संल्वधान के अनुचछेद-25 में अंतल्व्षषट धर्मर्निपेक्षता का ्यह अर्थ नहीं है कि हम धर्म के औचित्य से अदृषट आतमा करी ्वास्तविकता को अस्वरीकर कर दे, न हरी इसका ्यह अर्थ है कि हम अधर्म को बढ़ाएं, इसका अर्थ ्यह भरी नहीं है कि धर्मनिरपेक्षता एक सकारातमक धर्म है और इसका तात्पर्य ्यह अर्थ भरी नहीं है कि स्वतंत्ताएं ल्वशेषाधिकार को परिभाषित करतरी है । किसरी भरी दशा में व्यैसकतक स्वतंत्ता के संबंध में अनुज्ञे्य लन्व्षधताएं लोक व्य्वसथा के हित में उपबंधित करी गई है । ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे संल्वधान के अधरीन ्यथाघोषित धर्मनिरपेक्षता करी अंत्व्षसतु अत्यनत सकारातमक है, जिसे अनुचछेद-51( क) में,
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