eMag_June 2026_DA | Page 20

अ. भा. जनजाति सांस्ककृतिक समागम विशेषांक

धर्मानतरण करी प्रलक्र्या में कथित सूफरी संतों करी दरगाह संस्कृति करी भरी अपनरी भूमिका रहरी ।
अ्वैध धर्मानतरण करी प्रलक्र्या को अंग्रेजरी शासनकाल में और बल मिला और 1813 के चार्टर एकट से ईसाई मिशनरर्यों को भारत में स्वतंत् रूप से रहने और ईसाई धर्म का प्रचार करने करी आधिकारिक अनुमति मिलरी । धमाांतरण को बढ़ा्वा देने के लिए अंग्रेजरी शिक्षा को प्रभा्वरी माध्यम बनाकर ईसाई मिशनरर्यों द्ारा सथालपत सकूलों और कालेजों में पाशचात्य शिक्षा के साथ- साथ बाइबिल करी शिक्षा अलन्वा्य्ष कर दरी गई । इसका परीछे कुटिल उद्ेश्य भारतरी्य ्यु्वाओं को अपनरी संस्कृति से दूर कर ईसाई धर्म में धमाांतरित करने का था । ततकालरीन भारतरी्य समाज में व्यापत जाति प्रथा और छुआछूत का लाभ भरी ईसाई मिशनरर्यों ने उ्ठा्या । अ्वैध धर्मानतरण का ्यह सिलसिला स्वतंत्ता के बाद भरी जाररी रहा ।
स्वतंत्ता के बाद देश में मुससलम ए्वं ईसाई संप्रदा्य करी जनसंख्या हुई अप्रत्याशित बढ़ोत्ररी के परीछे अ्वैध धमाांतरण करी अपनरी भूमिका रहरी
है । भारतरी्य संल्वधान में जबरन, प्रलोभन( लालच) ्या धोखे करी से किए गए धमाांतरण को अ्वैध माना ग्या है । अ्वैध धर्मानतरण को रोकने के लिए कई राज्यों में सखत धमाांतरण ल्वरोधरी कानून लागू किए गए । लेकिन इन कानूनों का ल्वशेष प्रभा्व ्वास्तव में देखने को नहीं मिला और अ्वैध रूप से धर्मानतरण एक बडरी समस्या बन चुका है । ्यहरी कारण है कि देश में एक ऐसे सखत ए्वं प्रभा्वरी धमाांतरणरोधरी कानून करी आ्वश्यकता महसूस करी जा रहरी है, जो ्वास्तविकता में जमरीनरी धरातल पर अ्वैध रूप से होने ्वाले धर्मानतरण पर लगाम लगाने में पूर्ण रूप से सक्षम हो । ्यहां पर एक ऐसे प्रस्तावित कानून को सपषट लक्या ग्या है, जो अ्वैध धमाांतरण पर अंकुश लगाने में सक्षम सिद्ध हो सकता है ।
धमाांतरणरोधी कानून की प्स्तादवत रूपरेखा
1. भारत के ल्वलभन्न राज्यों का दौरा करने के पशचात व्यक्तियों के एक धर्म से दूसरे धर्म
में परर्वत्षन से उतपन्न होने ्वालरी ससथलत का आध्य्यन और ल्वशलेरण करने में समर्थ हुआ हूं । एक पक्ष का मुख्य आरोप ्यह है कि सभरी धर्म परर्वत्षन बलपू्व्षक लालच प्रदान कर, बहला-फुसलाकर और डराकर किए गए हैंf, जबकि ल्वरोधरी पक्ष द्ारा हमेशा ्यह दा्वा लक्या जाता है कि ऐसे धर्म परर्वत्षन पक्षकारों करी उप्युकत सहमति प्रापत करने के पशचात हरी किए गए हैं । तथ्यजनित सच्चाई कुछ और हरी जान पडतरी है । किसरी भरी दशा में में ्यह महसूस करता हूं कि इस ल्वर्य करी निषपक्ष रूप से और खुले मन से जांच करी जानरी चाहिए, जिससे कि अनुसूचित जाति ्या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों करी, उनहें दूसरे धर्म में परर्वलत्षत किए जाने से पू्व्ष, ल्व्वेकजनित स्वतंत्ता बनरी रहे क्योंकि इन समाजों के सदस्य उन उपा्यों से अधिक असुरक्षित हैं जो ऐसे परर्वत्षनों के लिए उकत सहमति प्रापत कर सकते हैं और केन्द्री्य सरकार का अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आ्योग ऐसे समाज के सदस्यों करी, जो समाज के स्वा्षलधक असुरक्षित ्वग्ष है, संरक्षा
20 twu 2026