था । लेकिन बाद में मुससलम समुदा्य के कारण ्यूसरीसरी पर ल्वचार नहीं लक्या ग्या ।
भारत में गो्वा, देश के एक मात् ऐसा राज्य है, जहां पुर्तगालरी नागरिक संहिता-1867 के कारण स्वतंत्ता के सम्य से हरी समान नागरिक संहिता लागू है । ्यह कानून गो्वा के सभरी नागरिकों पर लागू होता है, चाहे उनका धर्म( हिंदू, मुससलम, ईसाई) कोई भरी हो । कानून के तहत ल्व्वाह का पंजरीकरण अलन्वा्य्ष है । के्वल चर्च ्या मंदिर में हुई शादरी को कानूनरी मान्यता नहीं प्रापत होतरी है ।
तलाक और उत्राधिकार के्वल न्या्याल्य के माध्यम से होता है । माता-पिता करी संपलत् में सभरी बच्चों( बेटे और बेलट्यों) का बराबर
अधिकार होता है । गो्वा के बाद जन्वररी 2025 में उत्राखंड सरकार ने अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करके राज्य के सभरी नागरिकों के लिए ल्व्वाह, तलाक और उत्राधिकार से जुडे व्यसकतगत कानून एक समान कर दिए गए हैं । लेकिन ल्वपलक्ष्यों के तमाम दा्वों के ल्वपररीत राज्य में रहने ्वाले जनजातरी्य समाज को ्यूसरीसरी के दा्यरे से बाहर रखा ग्या है ।
यूसीसी और जनजातीय हित
देश में गुजरात, असम सहित कई अन्य राज्य भरी समान नागरिक संहिता को लागू करने करी दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं । केंद्र सरकार
और ल्वलभन्न राज्यों ने सपषट लक्या है कि ्यूसरीसरी के प्रा्वधान जनजातरी्य समाज पर लागू नहीं होंगे । भारतरी्य संल्वधान के अनुचछेद-342 और पांच्वीं ए्वं छ्ठरी अनुसूचरी के अंतर्गत जनजालत्यों को उनकरी ल्वलशषट संस्कृति, भूमि और प्रशासनिक स्वायत्तता के संरक्षण के लिए ल्वशेष अधिकार दिए गए हैं । ्यूसरीसरी इन अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करेगा । साथ हरी उनकरी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा जाएगा ।
असम सरकार ने ' समान नागरिक संहिता असम ल्वधे्यक-2026 ' में भरी पहाड़ी और मैदानरी दोनों क्षेत्ों करी सभरी जनजालत्यों को कानून के दा्यरे से पूररी तरह बाहर रखा है । गुजरात सरकार ने भरी जनजालत्यों के लिए ल्वशेष छूट का प्रा्वधान लक्या है । अब जनजातरी्य समागम में केंद्ररी्य गृहमंत्री अमित शाह ने भरी घोषणा कर दरी है कि ्यूसरीसरी से जुड़े प्रा्वधान जनजातरी्य समाज पर लागू नहीं होंगे, ऐसे में जनजातरी्य समाज के लिए दिल्ली का समागम उनकरी चिंताओं को दूर करने के साथ प्रसन्नता का एक बड़ा कारण बन ग्या है । �
twu 2026 11