eMag_June 2026_DA | Page 10

अ. भा. जनजाति सांस्ककृतिक समागम विशेषांक

करी भांति धर्मपरर्वलत्षत लोगों को बाहर लक्या जाना है । भारतरी्य संल्वधान का अनुचछेद-25 सभरी नागरिकों को अपने धर्म का स्वतंत् रूप से पालन करने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है । लेकिन संल्वधान ्यह भरी सपषट करता है कि बलपू्व्षक, धोखाधड़ी ्या प्रलोभन देकर लक्या ग्या धमाांतरण गैर-कानूनरी है । ऐसे में डरी-लिस्टिंग करी मांग पर गंभरीरता के साथ ध्यान देने के प्रबल आ्वश्यकता है ।
यूसीसी और जनजातीय समाज
समान नागरिक संहिता( ्यूसरीसरी) के मुद्े को लेकर भरी जनजातरी्य समाज सं्वेदनशरील है । एक तरफ देश में ल्व्वाह, तलाक, उत्राधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक कानूनों में एकरूपता लाने के लिए ्यूसरीसरी का प्रस्ताव लक्या जा रहा है, ्वहीं दूसररी तरफ जनजातरी्य समाज अपनरी ल्वलशषट सांस्कृतिक पहचान, ल्वलशषट ररीलत-रर्वाजों और सं्वैधानिक अधिकारों को लेकर निरर्थक रूप से चिंतित है । जनजातरी्य समाज में उतपन्न हुई चिंता करी प्र्वृलत् के परीछे ्वह ईसाई ए्वं मुससलम तंत् पूररी तरह सलक्र्य है, जो जनजातरी्य समाज को भ्रमित करने के लिए गलत तथ्यों, अफ्वाहों
ए्वं भ्रामक जानकारर्यों को फैला कर उनका मतांतरण कराने के कुचक्र में लिपत है ।
एक सुलन्योजित रणनरीलत के तहत भ्रामक जानकारर्यों से जनजातरी्य समाज को भ्रमित करके सत्ा के ल्वरुद्ध खड़ा करने के इस कुचक्र में हिनदू ल्वरोधरी राजनरीलतक दल, गैर सरकाररी संग्ठनों के साथ हरी पूरा भारत ल्वरोधरी तंत् जुटा हुआ है, जिसकरी सहा्यता ल्वदेशरी शक्तियों द्ारा करी जा रहरी है । ्यहरी सभरी इसलिए परेशान है क्योंकि ्यूसरीसरी लागू होने करी ससथलत में देश के सभरी नागरिकों के लिए, ्वह चाहे किसरी भरी धर्म-संप्रदा्य ्या मत के हो, ल्व्वाह, तलाक और संपलत् जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होंगे । इसरी करी आड़ में जनजातरी्य समाज
को भ्रमित करने करी चेषटा करी जा रहरी है ।
भारत के संल्वधान में अनुचछेद-44 में कहा ग्या है कि राज्य भारत के पूरे क्षेत् में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुलनसशचत करने का प्र्यास करेगा । संल्वधान का ्यह अनुचछेद संल्वधान में ्वलण्षत राज्य के नरीलत निदेशक तत्वों में से एक है और इसका उद्ेश्य संल्वधान करी प्रस्तावना में निहित ' लोकतांलत्क गणराज्य ' करी अ्वधारणा को मजबूत करना है । भारत में लरिटिश सरकार ने 1835 में अपनरी एक रिपोर्ट में ्यूसरीसरी करी अ्वधारणा को सामने रखते हुए अपराधों, साक््यों और अनुबंधों जैसे ल्वलभन्न ल्वर्यों पर भारतरी्य कानून के संहिताकरण में एकरूपता लाने करी आ्वश्यकता पर बल लद्या
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