केवल दसतािेजों में लागदू न हों , बबलक जमीनी सतर पर इनका फायदा समाज के पिछड़े समुदाय कको मिले ।
2017-18 में प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी ने दलितों के उतरान के लिए अपने बजट में रिांवतकारी बदलाव किया था । एक समय तक जहाँ पुरानी सरकारी दलितों की आबादी के प्रतिशत के अनुपात में बजट से धन नहीं देती थी , वहीं मकोदी सरकार ने जाधव समिति की सिफारिशों कको लागदू कर दिया । इसके बाद दलितों की 2001 की जनगणना की जनसंखया के अनुपातिक प्रतिशत के अनुसार बजट में धन की वयिसरा की गई । ऐसे ही 2018-19 में दलित यकोजनाओं के लिए मकोदी सरकार ने बजट में 8,63,944 करोड़ रुपए दिए , जको दलितों के लिए अब तक का सबसे अधिक आवंटन रहा । इस प्रकार देखे तको जको कार्य
सितंत्ता मिलने के बाद किये जाने थे , वह कार्य 2014 में आकर प्रारमभ हुए । देश में पहले से चले आ रहे दलित उतपीड़न कानदून 1989 कको प्रधानमंत्ी मकोदी ने संशकोवधत करके और अधिक सखत बनाया । इस सखत कानदून कको 26 जनवरी 2016 कको लागदू भी कर दिया गया । इस संशकोधन से दलितों कको तिरित नयाय दिलाने की मकोदी सरकार की मुहिम कको बल मिला । कानदून में दलित उतपीड़न के मामलों की सुनवाई करने के लिए विशेष अदालतों के गठन और सरकारी वकीलों की उपल्धता कको सुवनबशचत कर दिया गया । प्रधानमंत्ी मकोदी ने दलितों कको
मोदी सरकार देश के गरीबों औऱ दलित जनता के
समग्र कल्ाण के लिए वास्तव में काम कर रही है । आलोचना औऱ सराहना पर ध्ान देने के स्ान पर मोदी सरकार का लक्ष्य गरीब-दलित जनता को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का है , जिससे वह भी देश के साथ कदम से कदम मिलकर चल सकें I
सुरक्ा देने में पूर्ववर्ती सरकारों से काफी अचछा काम किया है । दलितों के विरुद्ध अपराध करने वालों कको सजा दिलाने में भाजपा शासित राजय , कांग्रेस शासित राजयों से कहीं आगे है ।
फ़िलहाल विरकोवधयों के कथित आरकोपों पर धयान देने की जगह मकोदी सरकार लगातार अपना काम कर रही है । मकोदी सरकार का लक्य दलितों कको समाज औऱ विकास की राह में सबसे आगे रखने का है औऱ इसके लिए सरकार काम भी कर रही है । विकास की दौड़ में पिछड़े और दलित बाहुलय गांवों कको संवारने
के अभियान कको मकोदी सरकार 2024-25 तक देश के करीब 27 हजार ऐसे गांवों के कायाकलप की यकोजना पर काम कर रही है , जहां मौजदूदा समय में दलितों की आबादी पांच सौ या इससे अधिक है । फिलहाल इसके तहत तेजी से काम शुरु हको गया है । करीब दस हजार गांवों के विकास का खाका तैयार कर लिया गया है । इनमें से सात हजार से जयादा गांवों के विकास के लिए पैसा भी जारी कर दिया गया है । इनमें से दको हजार से जयादा गांव अकेले उत्र प्रदेश के है । पीएम आदर्श ग्राम यकोजना के तहत वर्ष 2024-25 तक जिन 27 हजार गावों के कायाकलप की यकोजना बनाई है , उससे पबशचम बंगाल से खुद कको अलग रखा है । ऐसे में पबशचम बंगाल कको छोड़कर देश के सभी राजयों में दलित गांवों कको संवारने के अभियान पर तेजी से काम चल रहा है । मकोदी सरकार ने दलित बाहुलय गांवों कको संवारने के लिए जको पैमाना तय किया है , उसके तहत प्रतयेक गांवों कको इंटरनेट से जोड़ा जाएगा । साथ ही प्रतयेक घर तक नल- जल की पहुंच भी रहेगा । जिसके तहत सभी कको साफ पानी दिया जाएगा । मंत्ालय के मुताबिक हालांकि समय के मुताबिक आदर्श गांव की परिभाषा बदलती रहती है , लेकिन वह इन गांवों कको जको ्लान कर रहे है , उसके तहत उनहें इस तरह की सभी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा , जको कि सममानजनक जीवन जीने के लिए जरूरी हको ।
मकोदी सरकार देश के गरीबों औऱ दलित जनता के समग्र कलयाण के लिए वासति में काम कर रही है । आलकोचना औऱ सराहना पर धयान देने के सरान पर मकोदी सरकार का लक्य गरीब-दलित जनता कको विकास की मुखय धारा से जकोड़ने का है , जिससे वह भी देश के साथ कदम से कदम मिलकर चल सकें । निसंदेह यह पदूरा दशक दलित औऱ गरीब जनता के कलयाण के लिए मकोदी सरकार ने जिस तरह से समर्पित किया है , समर्पण का वही भाव तीसरे दशक में भी सभी कको दिखाई देगा , इसमें ककोई संदेह नहीं है । �
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