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जारी रहने देना चाहिए ? खुद प्रधानमंत्ी मकोदी का मानना है कि गंदगी के बीच जीने वाले गरीबों और दलितों कको हर साल लगभग सात हज़ार से अधिक रूपये इलाज़ में खर्च करने पड़ते है , जको उनकी आर्थिक हालत पर पड़ने वाला िको बकोझ है , जिसके दबाव में हर साल हज़ारको दलितों और गरीबों कको मौत का मुह देखना पड़ता है । इस मिशन में सभी ग्रामीण और शहरी क्ेत्ों कको शामिल किया गया है । सिचछ भारत मिशन का उद्ेशय 1.04 करोड़ परिवारों कको लवक्त करते हुए 2.5 लाख समुदायिक शौचालय , 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय , और प्रतयेक शहर में एक ठकोस अपशिषट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करने का कार्य करके खुले में शौच , असिचछ शौचालयों कको फलश शौचालय में परिवर्तित करने , मैला ढ़ोने की प्रथा का उन्मूलन करने , नगरपालिका ठकोस अपशिषट प्रबंधन और सिसर एवं सिचछता से जुड़ीं प्रथाओं के संबंध में लकोगों के वयिहार में परिवर्तन लाना आदि शामिल हैं । गंदगी की वजह से किसानों , गरीबों और दलितों कको जिन सात गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है , उसकको रकोकने के लिए मिशन इंद्रधनुश नाम से शुरू की गयी टीकाकरण यकोजना के केंद्र में भी गरीब और दलित बबसतओ में पैदा हकोने वाले बच्चो पर विशेष धयान दिया जा रहा है । हर्ष की बात यह भी है कि जिस दिन देश का गरीब और दलित गंदगी से मुकत हको जायेगा , िको दिन भारत के लिए सबसे सिवण्सम दिन हकोगा
दलितों औऱ गरीबों के लिए सामाजिक , आर्थिक और नीतिगत सतर पर उठाये जा रहे कदमों का ही यह परिणाम कहा जा सकता हैं कि सितंत्ता के िषषों बाद अब कही जाकर गरीब और दलित जनता कको बैंक का मतलब और उसके लाभ की जानकारी हको पायी है । किसानों , गरीबों और दलितों की बैंक में भागीदारी सुवनबशचत करने के लिए प्रधानमंत्ी जनधन यकोजना , देश के सिवण्सम भविषय की एक मिसाल के बनने के साथ ही गिनीज़ बुक ऑफ़ िलि्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दज़्स करा
चुकी है । इससे समझा जा सकता है कि देश की पूर्ववर्ती सरकारों ने एक साजिश के तहत इस जनता कको बैंक से ददूर रखा । कहते है जहा कुछ करने का जदूनदून हको , वह ककोई काम असंभव नही हकोता और प्रधानमंत्ी मकोदी के इसी जदूनदून ने गरीबों और दलितों कको आज़ादी के ६५ साल बाद बैंक के अंदर पहुचाने में जको सफलता हासिल कर की है , उसने भारत की बदलती तसिीर का नया इतिहास रच दिया है । इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब गरीबों और दलितों के कलयाण के लिए सरकार द्ारा भेजी जाने रकम बिचकोवलयों की जेब में नही जा रही है । गरीबों और दलितों के नाम पर मलाई उड़ाने वालको की दुकानदारी कको जिस तरह से जनधन यकोजना ने उजाड़ कर रख दिया है , िको दलालों के बीच गुससे का कारण बन गया है और यही दलाल कंपनी
इस यकोजना का विरकोध करके अपनी छाती पीट रही है ।
पिछले छह िषषों के कार्यकाल में मकोदी सरकार ने चुनाव नजदीक देखकर कभी दलितों के प्रति प्रेम नहीं दिखाया , बबलक उनहोंने तको सत्ा संभालने के साथ ही समाज के पिछड़े वर्ग के लिए कार्य करना शुरू कर दिया था । आज शायद उसी प्रतिबद्धता का नतीजा है कि अगर हम आकड़ों से मकोदी सरकार के ददूसरे कार्यकाल कको निकाल भी दें तको भी इतनी यकोजना बचती हैं- जको यह बताती हैं कि दलित उतरान के लिए मकोदी सरकार के प्रयास कैसे 70 सालों की दिखावटी ककोवशशों पर भारी हैं । सबका साथ सबका विकास के मदूलमंत् के साथ मकोदी सरकार ने साल 2014 में चुनाव जीतने के साथ ही इस पर काम करना शुरू किया और सुवनबशचत किया कि ये यकोजनाएँ
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