विकास के जिन पैमानों से उनहें सालों तक वंचित रखा गया , वह अब उनहें भी नसीब हको सकेगा । और ऐसा हुआ भी । पदूि्स प्रधानमंत्ी अटल बिहारी बाजपेई के बाद देश में फिर से बनी भाजपा की नयी सरकार के मुखिया माने प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी ने विकास के लिए अपना जको रकोि मैप सामने रखा था , उस रकोि मैप का परिणाम छह वर्ष बाद पदूरे देश की बदल रही तसिीर के रूप में देखा जा सकता है । देश की दलित औऱ समाज के अंतिम छकोर पर खड़ी जनता के लिए जको यकोजनाये लायी गयी , उनमें मुखय रूप से सिचछ भारत अभियान , प्रधानमंत्ी जन धन यकोजना , आधार और मकोबाइल , बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ यकोजना , अटल पेंशन यकोजना , कम खर्च पर दुर्घटना एवं जीवन बीमा
यकोजना , सुकनया समृद्धि यकोजना , मुद्रा बैंक . भदूवम सिास्थय कार्ड यकोजना , भारत के ककोने-ककोने कको जोड़ने की कवायद , सांसद आदर्श ग्राम यकोजना , अनधकार में डूबे ग्रामीण भारत तक बिजली पहुंचाने के साथ ही मेक इन इंडिया आदि प्रमुख यकोजनाओं कको एक के बाद एक लागदू करने के लिए सखती के साथ कदम उठाये ।
2014 से लेकर 2020 के दौरान मकोदी सरकार की विकास समबनधी कदमों और काययो कको सामाजिक , आर्थिक और नीतिगत आधार पर देखने और समझने की जरुरत है । मकोदी सरकार की यकोजनाओं में कही न कही प्रधानमंत्ी मकोदी की ददूरदृबषट , कड़ा परिश्रम और काम करने की जिजीविषा , दलितों , गरीबों के साथ ही देश के बेहतर भविषय के लिए , उनकी
सरकार की प्रतिबद्धता कको तको दर्शाती ही है । साथ ही यह तथ्य भी उजागर करती हैं कि किस तरह से आज़ादी के 65 साल तक दलितों और गरीबों कको सिर्फ आसिासन देकर उनकको सिर्फ सत्ा हासिल करने का एक जरिए ही माना गया । देखा जाये तको कांग्रेस की इस कुटिल नीति कको एक साजिश भी कहा जा सकता है या सकोची समझी रणनीति भी कयोंकि इसके जरिए दलितों और गरीबों के नाम पर बड़े-बड़े घकोटाले किये गए , उनहें सब्सिी देने के नाम पर बंदरबाट की गयी और उनके िकोट हासिल करने के लिए सिर्फ चुनाव के दौरान ही नेता उनके आगे-पीछे घदूमकर अपना उल्लू सीधा करते रहे । सरकारी सतर न तको उनकी उन्नति के लिए यकोजना बनी और जको बनी भी , उनसे दलित , किसान और गरीबों कको न तको ककोई लाभ मिला और न ही उनका ऐसा समग्र विकास हको पाया , जिससे वह समाज की मुखय धारा के साथ कदम से कदम मिला कर चल पाते I
मकोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल कको लेकर सरकार के विरकोधी चाहे जितना कुप्रचार कयों न करे , लेकिन सच की तसिीर अलग है और यह तसिीर देख कर लगता है कि देश में सालको बाद अब वासति में गरीबों और दलितों के लिए जको कुछ किया जा रहा है , वह उनके जीवन की दिशा और दशा कको बदलने में सहायक साबित हकोगाI बदलती तसिीर की पहली झलक सिचछ भारत अभियान के रूप में देखी जा सकती है । देश के किसी हिससे में चले जाइये , आपकको गंदगी उनही क्ेत्ों में दिखेगी जहां या तको दलित रहते है या फिर गरीब जनता । सालको से गांव से लेकर नगरको तक में गंदगी के बीच जीवन कको जीने के लिए मजबदूर दलितों और गरीबों कको गंदगी के बीच से निकालने और उनहें सिसर जीवन देने की मदूल भावना पर केंद्रित सिचछ भारत-सिसर भारत अभियान की आलकोचना करने वालको के पास इस बात का जवाब नही है कि आखिर दलित और गरीबों कको कया गंदगी के बीच ही जीना हकोगा ? गंदगी के कारण हकोने वाली जिन बीमारियको के कारण अपनी जान देनी पड़ती है , कया िको सिलसिला
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