eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | Page 49

िगषों में यह प्रककृवत है कि वे सबममश्रण के पक्धर हैं और वे एक सजातीय वर्ग में संगठित हको जाते हैं । यदि इस प्रककृवत का प्रतिकार किया जाए तको यह आवशयक है कि जिन िगषों के बीच विवाह संबंध नहीं हैं , उनहें भी प्रतिबंधित वर्ग में सबममवलत किया जाए । इसके लिए आवशयक है , परिधि का बढ़ाया जाना ।
इसके बावजदूद बाहरी समुदाय में शादी- वयिहार कको रकोक देने से आंतरिक समसयाएं उतपन्न हकोती हैं , जिनका समाधान सरल नहीं हैं । मकोटे तौर पर सभी िगषों में सत्ी-पुरुष संखया समान हकोती है और समान वय के सत्ी-पुरुष में बराबरी भी हकोती हैं , किंतु समाज उनहें बराबर नहीं मानता । साथ ही जको समुदाय जाति-संरचना
करता है , उसमें सत्ी-पुरुष समानता परम लक्य हकोता है । इसके बिना सजातीय विवाह प्रथा सफल नहीं हको सकती । इसी तथ्य कको इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि यदि सजातीय विवाह प्रथा कको बनाए रखना है , तको आंतरिक दृबषट से दांपतय अधिकारों का विधान रखना हकोगा , अनयरा समाज के लकोग दायरे से बाहर हको जाएंगे । यदि आंतरिक दृबषट से दांपतय अधिकार दिए जाते हैं तको जाति-संरचना की सफलता के लिए सत्ी-पुरुष संखया समान रखनी आवशयक हकोगी । दकोनों के बीच भारी संखया विषमता हकोने से सजातीय विवाह प्रथा चरमरा उठेगी ।
जातियों की समसया के समाधान के लिए विवाह यकोगय सत्ी-पुरुष की असमानता कको
रकोकना हकोगा । प्रककृवत इसमें सहायक तभी हको सकती है , जब पति के साथ पत्नी या पत्नी के साथ पति की मृतयु हको जाए । इससे ही संतुलन बना रह सकता है । ऐसा असंभव है । वासति में , पति के मरने पर पत्नी बच जाती है और पत्नी के मरने पर पति बचा रह जाता है । इस प्रकार इन बचे रहे सत्ी-पुरुषों की वयिसरा करनी हकोगी , अनयरा ऐसा हको सकता है कि ककोई बचा हुआ पुरुष या सत्ी-जाति के बाहर विवाह करके जाति-वयिसरा के जाल कको छिन्न-भिन्न कर दे । यदि उनहें सितंत् रहने दिया गया और उनहें नव-युगल बनाने का ककोई नियम नहीं बनता है तको इस प्रकार के अतिरिकत सत्ी-पुरुष बचे रहेंगे । ऐसे यह बहुत संभव है कि वे सीमाएं लांघ जाएं तथा बाहर विवाह रचा लें और जाति में विजातीय लकोगों कको भर लें ।
अब हम यह देखें कि जिस वर्ग की हमने ऊपर कलपना की है , वह इन बचे हुए सत्ी-पुरुष का कया करेगा । पहले हम विधवा बसत्यों कको लेते हैं । उनका दको तरह से इंतजाम किया जा सकता है , जिससे कि सजातीय विवाह प्रथा बनी रहे ।
पहलाः उसे उसके मृत पति के साथ जला दिया जाए और उससे मुबकत पा ली जाए । सत्ी- पुरुष अंतर कको घटाने के लिए यह एक अवयािहारिक तरीका है । कुछ मामलों में यह संभव है , कुछ में नहीं । नतीजा यह निकला कि प्रतयेक सत्ी कको ठिकाने नहीं लगाया जा सकता । वैसे यह एक आसान तरीका है , लेकिन बहुत कटु बसरवत है । इस तरह विधवाएं यदि ठिकाने नहीं लगाई जा सकें और वे जाति में ही बनी रहें , तको दुहरा खतरा पैदा हको जाता है । वह जात बाहर विवाह कर लेगी और सजातिवाद कको तिलांजलि दे देगी या मुकाबलेबाजी में अपनी जाति की उन बसत्यों का हक मार लेगी , जको विवाह यकोगय हैं । इस तरह यह खतरा है । यदि वह उसके पति के साथ जलाई न जा सके तको उसका कुछ इंतजाम करना हकोगा ।
ददूसरा निराकरण है कि उनहें हमेशा के लिए विधवा रहने दिया जाए । जहां तक वांछित परिणाम का संबंध हैं , उसे जला देना सदा
tuojh 2021 Qd » f ° f AfaQû » f ³ f ´ fdÂfIYf 49