eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | 页面 46

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नृजाति-विज्ान के कुछ विद्ानों की परिभाषाएं प्रसतुत करना चाहता हदूं -
1 . जाति के संबंध में फ्ांसीसी विद्ान श्री सेनार का सिद्धांत है-तीव्र वंशानुगत आधार पर घनिषठ सहयकोग , विशिषट पारंपारिक और सितंत् संगठनों से युकत , जिसमें एक मुखिया और पंचायत हको , उसकी समय-समय पर बैठकें हकोती हों , कुछ उतसिों पर मेले हों , एक सा वयिसाय हको , जिसका विशिषट संबंध रकोटी-बेटी वयिहार से और समारकोह अपमिश्रण से हको और इसके सदसय उसके अधिकार क्ेत् से विनियमित हकोते हों , जिसका प्रभाव लचीला हको , पर जको संबंद्ध समुदाय पर प्रतिबंध और दंड लागदू करने में सक्म हको और सबसे बढ़कर समदूह से अपरिवर्तनीय ।
2 . नेसफीलि जाति की परिभाषा इस प्रकार करते हैं - समुदाय का एक वर्ग , जको ददूसरे वर्ग से संबंधों का बहिषकार करता हको और अपने संप्रदाय कको छकोड़कर ददूसरे के साथ शादी- वयिहार तथा खान-पान से परहेज करता हको ।
3 . सर एच . रिजले के अनुसार-जाति का अर्थ है , परिवारों का या परिवार समदूहों का संगठन , जिसका साझा नाम हको , जको किसी खास पेशे से संबंद्ध हको , जको एक से पौराणिक पदूि्सजों- पितरों के वंशज हकोने का दावा करता हको , एक जैसा वयिसाय अपनाने पर बल देता हको और सजातीय समुदाय का हामी हको ।
4 . डा . केतकर ने जाति की परिभाषा इस प्रकार की है- दको लक्णों वाला एक सामाजिक समदूह , ( क ) उसकी सदसयता उन लकोगों तक
सीमित हकोती है , जको जनम से सदसय हकोते हैं और जिनमें इस प्रकार जनम लेने वाले शामिल हकोते हैं ; ( ख ) कठकोर सामाजिक कानदून द्ारा सदसय अपनी जाति से बाहर विवाह करने के लिए वर्जित किए जाते हैं ।
हमारे लिए इन परिभाषाओं की समीक्ा अतयािशयक है । यह सपषट है कि अलग-अलग देखने पर तीन विद्ानों की परिभाषाओं में बहुत कुछ बाते हैं या बहुत कम तति हैं । अकेले देखने में ककोई भी परिभाषा पदूण्स नहीं और मदूल भाव किसी में भी नहीं है । उन सबने एक भदूल की है कि उनहोंने जाति कको एक सितंत् तति माना है , उसे समग्र तंत् के एक अंक के रूप में नहीं लिया है । फिर भी सारी परिभाषाएं एक- ददूसरे की पदूरक हैं , जको तथ्य एक विद्ान ने छकोड़
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