eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | Page 24

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जनाधार खड़ा करने के लिए प्रयास कर रही है । 2014 में केंद्र में मकोदी सरकार का गठन हकोने के बाद तमिलनाडु में भाजपा का जनाधार बढ़ा है । मकोदी सरकार की विकासवादी राजनीति और काय्सरिमों ने जनता के बीच भाजपा कको बढ़त बनाने में सफलता मिली है और यह 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा कको मिले कुल प्रतिशत में 2019 के लकोकसभा चुनाव में मिले मत प्रतिशत में सपषट रूप से देखा जा सकता है ।
डीएमके और एआईडीएमके के बीच बंटी राजय की राजनीति में कांग्रेस लगातार सिकुड़ रही हैं । वैसे भी राजय में कांग्रेस का अपना सितनत् वजदूद कभी नहीं रहा , परनतु भाजपा लगातार जनता के बीच अपना विसतार कर रही है । आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पाटटी अपनी पदूण्स रणनीति के साथ कार्य कर रही है । तीसरी सदी में पाटटी का लक्य दवक्ण
भारत के राजयों में अपना परचम लहराने का है । पिछले विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक नीत राषट्रीय जनतांवत्क गठबंधन के साथ मिलकर भाजपा ने चुनाव लड़ा था , पर अबकी बार पाटटी अपनी दम पर चुनाव मैदान पर उतरने की तैयारी कर रही है । 2011 की जनगणना के अनुसार , राजय में दलित वर्ज की जनसंखया लगभग 20.1 प्रतिशत हैं । राजय के दकोनों राजनीतिक दल डीएमके और एआईडीएमके पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधिति करती है , लेकिन वहां पर अभी तक ककोई बड़ा दलित नेता पैदा नहीं हको पाया है । राजय में ककोई बड़ा दलित नेता पैदा न हकोने का एक कारण दलित िकोटों में बिखराव का हकोना है । पदूि्स अधयक् के रूप में अमित शाह ने दवक्ण भारत में पाटटी के आधार कको बढ़ाने के लिए जिस तरह से कार्य किया , उसके चलते राजय में भाजपा की बसरवत मजबदूत हुई है । मकोदी सरकार के विकास कायषों के साथ
ही राषट्रीय सियं सेवक संघ के कायषों से आम जनता के बीच भाजपा की पैठ बढ़ती जा रही है । राजय के समग्र विकास के साथ ही मजहबी और चर्च से जुडी राषट्र विरकोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने के एजेंडे कको लेकर चल रही पाटटी विधानसभा चुनाव में और जयादा शबकतशाली हकोकर सामने आएगी ।
इसी वर्ष केरल में भी विधानसभा चुनाव हकोने जा रहे हैं । केरल एक ऐसा राजय है , जहां ईसाई धर्म और मुबसलम धर्म सबसे पहले पहुंचा था । आम जनता कको शायद यह नहीं पता हकोगा कि भारत में बनने वाला पहला चर्च और पहली मबसजद केरल में ही मौजदूद हैं । दुर्भागय यह है कि जिन हिन्दू राजयों ने ईसाई और मुबसलम धर्म कको अपने राजय में शरण दी थी , उनहीं दकोनों धमषों ने सुनियकोवजत रूप से हिन्दू जनसंखया कको धर्मानतरित करने में ककोई कसर बाकी नहीं छकोड़ी । भय , उतपीड़न और लालच के बल पर
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