जनता कको पलायन करने के लिए मजबदूर है । 24 परगना , मुर्शिदाबाद , बीरभदूवम , मालदा आदि कई क्ेत्ों में अवैध बांगलादेशी और रकोवहंगया डेरा जमाए हुए हैं । िषषों से राजय की राजनीति में सियं कको उपेवक्त महसदूस कर रहे दलित , पिछड़े और आदिवासी वर्ग के मिले जनसमर्थन का परिणाम 2019 के लकोकसभा चुनाव में देखा गया , जब भाजपा ने राजय की 18 लकोकसभा सीट हासिल करके विरकोवधयों के तमाम दावों की पकोल सार्वजनिक रूप से खकोल कर रख दी थी । लकोकसभा चुनाव परिणामों से सकते में आयी ममता सरकार अपनी सत्ा बचाने के लिए विरकोवधयों के विरुद्ध हिंसा कको जिस तरह से प्रश्रय दे रही है , उससे जनता में भाजपा के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है । केंद्र सरकार की जनउपयकोगी यकोजनाओं कको लागदू न करना और तृणमदूल नेताओं का भय , भ्रषटाचार और हिंसा के कारण आम जनता के बीच भाजपा कको लकोकप्रियता दिन-रात बढ़ रही है , जिससे आदिवासी बाहुलय उत्र बंगाल से लेकर दलित बाहुलय दवक्ण बंगाल में भाजपा का जनाधार बढ़ता जा रहा है । प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी , गृह मंत्ी अमित शाह , भाजपा अधयक् जे पी नड्ा के अलावा पाटटी महासचिव कैलाश विजयिगटीय राजय में ममता सरकार के पकोवषत गुंडों कको लगातार चुनौती दे रहे हैं । आदिवासी , दलित , हिंदुति और तृणमदूल विरकोधी वर्ग में भाजपा के बढ़ते प्रभाव के मधय राजय की राजनीति में भाजपा एक नई रेखा खींचने की ककोवशश में जुटी है ।
इसी वर्ष तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव हकोने जा रहे हैं । राजय में दलित वर्ग की जनसंखया लगभग 21 प्रतिशत है । जातीय हिंसा के लिए राजय कुखयात हको चुका है । कथित द्रविड़ राजनीति ने दलित वर्ग के हितों कको बुरी तरह प्रभावित किया है । राजय में अनय पिछड़ा वर्ग और दलितों के बीच पैदा हुई गहरी खाई भी इसी द्रविड़ राजनीति का नकारातमक परिणाम है । चर्च से जुडी शबकतयां िषषों से राजय में हिन्दू हितों कको प्रभावित करने में जुटी हुई हैं और अब इसमें मजहबी शबकतयां भी सबममवलत हको चुकी हैंI इन सबके बीच भाजपा अपना
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