eMag_Jan 2021_Dalit Andolan | Page 22

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बंगाल से के रल तक लहराएगा भाजपा का परचम

दशक का पहला वर्ष अपने साथ कई उममीद लेकर आया है । ककोरकोना तीसरे

संकट का नकारातमक प्रभाव सम्पूर्ण विशि के साथ ही भारत पर भी हुआ है । ककोरकोना से निपटने के लिए प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी ने जिस तरह से अप्रतयावशत और कारगर कदम उठाए , उसके सकारातमक परिणाम दिखने लगे हैं । सिदेशी वैकसीन की उपल्धता ने ककोरकोना संकट कको फिलहाल ददूर करने में सफलता हासिल कर ली है और देश पुनः सामाजिक एवं आर्थिक रूप से गति पकड़ने लगा है । इस वर्ष पबशचम बंगाल , असम , तमिलनाडु और केरल जैसे बड़े राजयों में विधानसभा चुनाव के साथ लकोकसभा और राजयों में विधानसभा की रिकत सीटों के लिए चुनाव कराए जाएंगे ।
असम में भाजपा ने अपनी पहली सरकार का गठन 2016 में किया था । राजय में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्र एवं राजय सरकार ने जिस तरह से असम सहित उत्र -पदूि्स के समग्र एवं नियकोवजत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कदम उठाए , उसका परिणाम यह है कि उत्र-पदूि्स के सभी राजयों में भाजपा की बसरवत मजबदूत हुई और उत्र-पदूि्स राषट्र के विकास की नई कहानी लिख रहा हैं । सामाजिक
और आर्थिक रूप से दलित-आदिवासी वर्ग के हालात में आमदूलचदूल परिवर्तन हुआ है , जिससे उत्र-पूर्वी राजयों में शांति सरावपत करने के कदम सफल हुए हैं । सुरक्ा बसरवतयों में हुए बदलाव के साथ मजहबी एवं चर्च की दलित विरकोधी गतिविधियों पर अंकुश लगना प्रारमभ हुआ है । समाज के अंतिम वयबकत कको लक्य बनाकर मकोदी सरकार द्ारा प्रारमभ की गयी विकास यकोजनाओं और भाजपा की राषट्र समर्पित सकारातमक राजनीति के कारण पाटटी असम में एक मजबदूत बसरवत में पहुंच चुकी है । ऐसे में राजय में पुनः भाजपा सरकार का बनना तय है ।
पबशचम बंगाल , तमिलनाडु और केरल- यह तीनों ऐसे राजय है , जहां भाजपा अपनी बसरवत कको लगातार मजबदूत कर रही है । तीनों राजयों में मजहबी , चर्च और वामपंथी शबकतयां िषषों से राजनीति में अपनी पकड़ बनाकर हिन्दू एवं भारत विरकोधी गतिविधियों कको अंजाम दे रही हैं । इन राजयों में हिन्दू बाहुलय जनसंखया की दम पर बनने वाली राजय सरकारों ने प्रतयक् और अप्रतयक् रूप से भारत विरकोधी शबकतयों कको मजबदूत करने में संदिगध भदूवमका निभाई , जिसका नकारातमक परिणाम विशेष रूप से दलित , आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग कको उठाना पड़ा । तीनों ऐसे राजय हैं , जहां ईसाई-मुबसलम- वामपंथी गठजोड़ हिनदुओं के अबसतति के लिए संकट का बड़ा कारण बन चुका हैI
‘ भद्रलकोक ’ की छविवाले पबशचम बंगाल में ममता सरकार ने हिंसा की राजनीतिक केंद्र बिंदु बनाया है , जिसे पदूरा देश देख रहा है । अलपसंखयक तुबषटकरण राजनीति के लिए कुखयात बंगाल में दलित , आदिवासी और पिछड़े वर्ग की जनता के लिए जीवनयापन करना भारी पड़ रहा है । राजय के राजनीतिक हालात के कारण आदिवासी , गकोरखा , कामतापुरी , राजवंशी , मतुआ ( नामशुद्र समुदाय ), बांगलादेश से आये हिंददू शरणार्थियों की निगाह भाजपा पर है । राजय के कई क्ेत्ों में हिनदुओं की आबादी लगातार घट रही है और उतपीड़न के कारण हिनदुओं विशेष रूप से दलित और आदिवासी वर्ग की
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