जनम से प्रवजया में सिधदार्थ गौतम के बचपन तथा शिक्ा के बारे में विसतार से चर्चा की हैI
उनहोंने लिखा है कि जिनहें शुद्धकोधन ने महामाया के सिप्न की वयाखया करने के लिये बुलाया था और जिनहोंने सिद्धार्थ के बारे में भविषयिाणी की थी , वह ही आठ ब्ाह्मण उसके प्रथम आचार्य हुये । धयान देने की बात है कि डा . आंबेडकर ने भी अपनी बचपन की शिक्ा कको लेकर अपने जीवन की प्रथम , वद्तीय और तृतीय मधुर समृवतयां अपने ब्ाह्मण आचायषों के साथ ही जुड़ी हुयी मानी है ।
सिद्धार्थ गौतम के जनम की कथा बताते हुये डा . आंबेडकर ने लिखा है कि उस रात शुद्धकोधन और महामाया निकट हुये और महामाया ने गर्भ धारण किया । राजकीय शैयया पर पड़े-पड़े उसे नींद आ गयी । वननद्राग्रसत महामाया ने एक
डा . आंबेडकर के ही शब्ों में यह सिद्ध हो जाता है कि बौद्ध धर्म के पूर्व ही वेदादि ग्रंथ थे । सिद्धार्थ के पीपल वृक्ष के नीचे ज्ान प्ाप्त करने के पश्ात ही बौद्ध धर्म अस्स्तत्व में आया । जो वेद ना होते इसके पूर्व तो सिद्धार्थ ने इन शास्तों की बचपन में शिक्षा ली ऐसा डा . आंबेडकर का का लिखना झूठा हो जाता ।
सिप्न देखा । उसे दिखाई दिया कि चतुर्दिक महाराजिक देवता उसकी शैया कको उठा ले गये हैं । उनहोंने उसे हिमवंत प्रदेश में एक शाल-वृक् के नीचे रख दिया है । वे देवता पास खड़े हैं । ददूसरे दिन महामाया ने शुद्धकोधन से अपने सिप्न की चर्चा की । इस सिप्न की वयाखया करने में असमर्थ राजा ने सिप्न विद्ा में प्रसिद्ध आठ ब्ाह्मणों कको बुलाया , जिनके राम , धिज , लक्मण , मंत्ी , ककोित्रज , भकोज , सुयाम और सुदत् । राजा ने उनके सिागत की तैयारी की । उसने जमीन पर पुषप वर्षा करवाई और उनके लिये सममावनत आसन बिछवाये ।
उसने ब्ाह्मणों के पात् सकोने-चांदी से भर दिये और उनहें घी , मधु , शककर , बढ़िया चावल तथा ददूध से पके पकवानों से संतर्पित किया । जब ब्ाह्मण खा-पीकर प्रसन्न हको गये , तको
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