eMag_Feb 2021_Dalit Andolan | Page 39

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दलित स्तीवाद की अनदेखी

अनिता भारती

कुछ वरषों से दलित सत्ीवाद के मुद्दे और सवाल अब धीरे-धीरे अपने पिछले

सार्थक , उज्वि और सप्ट रुप में हमारे सामने आ रहे हैं । अब दलित सत्ीवाद को लेकर बहस चलाने वालों में , उसके एक दर्शन और सैद्धांतिकी के तौर पर जोरदार सवागत के सवर भी सुनाई देने लगे हैं । दलित सत्ीवाद के पक्ष में , उसकी सैंद्धांतिकी पर पिछले कुछ वरषों में कुछ चिंतकों द्ारा विशेष काम हुआ है । इस धारा के लेखन और उसके अधिकार के पक्ष में खडे साथियों ने भी दलित सत्ीवाद को सथातपि करने में महतवपूर्ण भूमिका निभाई है । दलित सत्ीवाद की अवधारणा और ततव समाज में हमेशा से रहे हैं , जिनको दलित ससत्यों की अपनी अससमिा , क्षमता , द्नद् , उसके प्रश्नों और मुद्दों के जरिये आसानी से विशिेतरि किया जा सकता था । लेकिन दुख है कि पहले विभिन्न महिला आंदोलनों ; चाहे वह जिस भी विचारधारा के तहत चले हो , दलित सत्ीवाद को सूत्बद्ध
दलित स्तीवाद को सूत्रबद्ध करने की पूरी तरह अनदेखी करते रहे । यूं तो दलित स्तीवाद पर पिछले एक दशक से छिटपुट पर महत्वपूर्ण बहस-लेख- आलोचना सामने आते रहे हैं , लेकिन दलित स्तीवाद की सैद्धांतिकी और अवधारणा पर कभी
खुलकर बहस नहीं हुई ।
करने की पूरी तरह अनदेखी करते रहे । यूं तो दलित सत्ीवाद पर पिछले एक दशक से छिटपुट पर महतवपूर्ण बहस-लेख-आलोचना सामने आते रहे हैं , लेकिन दलित सत्ीवाद की सैद्धांतिकी और अवधारणा पर कभी खुलकर बहस नहीं हुई ।
सवाल है कि दलित सत्ीवाद कया है और अनय सत्ीवादी विचारधाराओं से वह कैसे भिन्न है ? कौन से ऐसे मुद्दे और सवाल हैं , जिसके कारण दोनों सत्ीवाद हमेशा एक दूसरे के विपरीत ध्रुवों पर खड़े दिखाई देते है ? कया दलित सत्ीवाद के सत्ी-मुसकि के सवाल सवर्ण सत्ीवाद की सत्ी- मुसकि से अलग हैं ? जिसके
कारण दोनों भिन्न सवर में बात कर रहे है ? कया दोनों सत्ीवाद के मूल में सविंत्िा , समानता , सामाजिक नयाय जैसे मू्य एक समान महतव रखते हैं ? या फिर इन मू्यों को सैद्धांतिक रुप और वयवहारिक रुप में अपनाने में कोई पेंच है , जिसके कारण दलित-सत्ीवादी अलग तरीके से बात कर रही हैं ? कुछ ऐसे ही जविंत सवाल है , जिन पर आज बातचीत करना जरुरी हो गया है । और यह खुशी की बात है कि आज सवयं दलित सत्ीवाद और दलित सत्ीवादी इस पूरी प्रकिया के अनुभव को , इस बहस को आगे बढाने और दलित सत्ीवाद के पक्ष में अपने वैचारिक दार्शनिक पक्ष को
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