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चले गए हैं । इसलिए आज नैतिकता एवं आशाएं दबाव में हैं । आदिवासियों का इतिहास साक्षी है कि उनका संबंध अनय जातियों से अधिक जंगल से है । ये प्रकृति के पुजारी हैं । ये प्रकृति पर अधिक-से-अधिक निर्भर रहते हैं । आदिवासियों की विशेषता है कि - प्रकृति से प्रापि जीवन को आवशयक साधन सामतग्यों से वयिीत करना उनके जीवन की एक सामानय प्रवृत्ति है । वह प्रकृति का सममान करते हैं । आदिवासी समाज की सामाजिक संरचना में बहुत अंतर होने के कारण उनके पूजा , पर्व , तयौहार किसी गैर-आदिवासी समाज के लिए आशचय्षिनक हैं । भिन्न-भिन्न आदिवासी समुदाय में भिन्न-भिन्न विवाह प्रथा प्रचलित है । बिरसा मुंडा के मुंडा समुदाय में विवाह एक उतसाह की विधि मानी जाती है । इस समुदाय में पिता चाहे पुत्ों को उसके विवाह के बाद अलग कर सकता है । िड़कों की शादी हल
चलाने आने के बाद की जाती है और िड़तकयों की ताड़ पत्तों से चटाई बनाना सीखने के बाद । विवाह बाहरी गोत् में होता है । बहु-विवाह को भी सामाजिक मानयिा प्रापि है । आदिवासी समाज में तयौहार , विवाह बहुत उतसाह और खुशी के साथ मनाये जाते हैं । आज भारत देश में पाशचातय-संसकृति का अधिक मात्ा में प्रचलन हो रहा है और इसे लगभग सभी रूपों में सवीकार किया गया है । लेकिन आदिवासी समाज पर इस पाशचातय संसकृति का इतना प्रभाव नहीं हुआ है ।
आदिवासी समाज पहले जिस तरह से तयौहार मनाता था आज भी उसी उतसाह और उ्िास के साथ तयौहार मनाता है । उनके तयौहार अधिकतर प्रकृति से संबंधित होते हैं । उनके दैनंदिन जीवन में प्रकृति का महत्वपूर्ण सथान है । इसलिए वह प्रकृति को ही भगवान के रूप में पूजते हैं । वृक्षों की पूजा आदिवासी
समाज करता है यानि की पर्यावरण की रक्षा भी आदिवासी समाज के हाथों से होती है । इस समाज में सपिाह का एक दिन गुरुवार को लक्मी का दिन माना जाता है । इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और साल वृक्ष में कासे के लोटे से जल अर्पण कर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं । बिरसा मुंडा और कोमरम भीम पर लिखित साहितय में अपने जाति को एकत् करना संगठित रखकर संघर्ष करने की प्रमुख प्रवृत्ति है । दोनों भाषाओं के साहितय में वे अपने अससितव के लिए िड़िे हैं । भोले-भाले आदिवासी जानवरों की भाँति बंदूकों का शिकार होते हैं । लेकिन संघर्ष में इनकी हार होती है । कयोंकि नैतिकता ही आदिवासियों की कमजोरी बन गई है । अपनी सांसकृतिक पहचान एवं परिससथतियों से घिरा आदिवासी समाज बेचैन है ।
( ्साभार )
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