eMag_Feb 2021_Dalit Andolan | Seite 32

वेलुिराष्चयरार करा जन्म

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भारत की वीरांगनाएं : वेलु नाष्चयार और कु यिली

ओमप्रकाश कश्प

मिलनाडु में एक ऐतिहासिक जिला

है — शिवगंगा । राजधानी चैन्नई से
450 किलोमीटर दूर दक्षिण ; तथा ऐतिहासिक नगरी मदुरै से 48 किलोमीटर हटकर पूरब में बसा हुआ । पिछले कुछ वरषों से यह जिला एक और कारण से चर्चा में है । शिवगंगा और मदुरै के बीच कीझदी नामक कसबे में संगमकालीन सभयिा के अवशेष प्रापि हुए हैं । उतखनन के दौरान प्रापि ‘ तमिल-रिाह्मी लिपि ’ के अक्षरों की बनावट , सिंधु लिपि से मेल खाती है । उससे सिंधु सभयिा और द्रतवड़ सभयिा के अंितःसंबंधों को समझा जा सकता है । शिवगंगा का पुराना नाम सेतुनाडु था । वह ‘ नायक साम्ाजय ’ द्ारा सथातपि 72 छावनियों में एक थी । नायक अधिपति अपने नाम के आगे ‘ सेतुपति ’ लगाते थे । संसकृि कृति ‘ रघुनाथअभयुदम ’ के अनुसार उनकी गिनती शूद्र वर्ग में की जाती है ।

वेलुिराष्चयरार करा जन्म

वेलु नाचियार का जनम 3 जनवरी , 1730 में रामनाथपुरम के राजपरिवार में हुआ था । उसके पिता राजा चेलामुत्तु विजयारगुंडा सेतुपति तथा मां रानी सककांतदमुथल नाचियार थीं । माता-पिता की इकलौती संतान वेलु जनम से ही विलक्षण प्रतिभा की धनी थी । राजा ने उसका लालन-पालन बेटे की तरह किया था । बचपन में वेलु को पढ़ने-लिखने के अलावा हथियार चलाने का भी शौक था । सो कुछ ही अवधि में उसने तलवारबाजी , तीरंदाजी , घुड़सवारी , वलारी ( हंसिया फेंकने ), सिलंबम ( लाठी
चलाने ) तथा भाला फेंकने जैसी युद्ध कलाओं में महारत हासिल कर ली थी । किशोरावसथा पार करते-करते वह तमिल , फ्ांतससी , उर्दू , मलयालम , तेलुगू , तमिल और अंग्ेिी भाषा का ज्ान अर्जित कर चुकी थी । कम उम् में ही
महान तमिल ग्ंथों का अधययन कर उसने खुद को अपने पिता का योगय उत्तराधिकारी सिद्ध कर दिया था । वेलु की प्रतिभा और लगन देख उसके माता-पिता भी बेटे न होने की चिंता को भूल चुके थे ।
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