वीरांगना झलकारी बाई
उनको 16 दलितों के साथ पेड़ से बांध कर फ़ांसी दे दी । बाबू मंगू राम जाति से चमार थे । उनका जनम 1886 ग्ाम मोगोवाल जिला होशियार पुर पंजाब में हुआ था । देश के लिये जीवन पयिंि संघर्षरत रहे । बाद में देश आजाद होने के बाद वह राजनीति में आ गए और अपनी पाटवी ग़दर पाटवी के नाम से शुरू की । आजीवन वह समाज की भलाई के लिए काम करते रहे । इनके अलावा , जीडी तपसे , भोला पासवान , पन्ना लाल बरुपाल , ससनिवयया , रामचंद्र वीरपपा , वीरा पासी , सिदरन के साथ ही कई और ऐसे दलित हैं , जिनहोंने सविंत्िा संग्ाम में मुखय भूमिका निभाई । इनके अलावा दलित महिला वीरांगनाएं कभी किसी से कम नहीं रहीं । शहीद ऊधम सिंह एक ऐसा नाम हैं जो सदियों में पैदा होता है , जलियावालां जघनय कांड उनकी आंखों के सामने हुआ था , जिसके बाद उसका बदला लेना ही उनहोंने अपने जीवन का मकसद बना लिया था , सरदार ऊधम सिंह ने जलियांवाला बाग नरसंहार के समय पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ डायर को उसी की सरजमीं पर गोलियों से भून डाला , और आतमसर्मपण कर
दिया । खास बात तो ये थी कि उनहोंने माइकल ओ डायर के अलावा किसी को निशाना नहीं बनाया , कयोंकि वहां पर महिलाएं और बच्े भी थे । अंग्ेिों ने फांसी की सजा की सुनवाई के दौरान जब ऊधम सिंह से पूछा कि उनहोंने किसी और को गोली कयों नहीं मारी , तो वीर ऊधम सिंह का जवाब था कि सच्ा हिंदुसिानी कभी महिलाओं और बच्ों पर हथियार नहीं उठाते । ऐसे थे हमारे शहीद-ए-आजम सरदार ऊधम सिंह । ऊधम को बाद में शहीद-ए- आजम की वही उपाधि दी गई , जो सरदार भगत सिंह को शहादत के बाद मिली थी ।
वीरांगना झलकारी बाई साहसी महिला झांसी की रानी की सहयोगी थीं । वह चमार जाति की उपजाति कोरी जति से थी । युद्ध कौशल में उनहें महारत हासिल थी । उनके सहयोग से ही झांसी की रानी लक्मी बाई प्रतापगढ या नेपाल जाने में सफ़ल हो सकीं थीं । उनकी सूरत झांसी की रानी से इतनी मिलती थी कि अंग्रेज़ भी धोखा खा जाते थे , जिसका फायदा उठा कर वह अंग्ेिों को भ्रमित कर देती थीं । वीरांगना उदा देवी लखनऊ के उजेरियन गांव की रहने वाली थीं । उनके पति
मकका पासी थे , जो चिनहट बाराबंकी में अग्रेज़ों द्ारा मार दिए गए थे । पति की लाश पर रोते हुये उनहोंने प्रतिशोध की कसम खाई । बाद में वह बेगम हजरत महल द्ारा बनाई गई आमवी की कमांडर बन गईं । उनहोंने 35 अंग्ेिों को मार गिराया था , लेकिन में बाद में वह मार दी गईं । दरअसल गमवी में पीपल के पेड़ के नीचे जब अंग्ेि आराम कर रहे थे तब उनहोंने कई अंग्ेिों को मार गिराया । जनरल डावसन को संदेह हुआ तो वह मुआयना करने लगा । उसने देखा अंग्ेि सिपाहियों को गोली मारी गयी है । ऐसा लगा जैसे गोली ऊपर से मरी गई है । उसने अपने सहयोगी वैलेक को बुलाया और दोनों ने पेड़ पर किसी साया को देखा । वैलेक ने फायर कर दिया और वीरांगना ’ उदा देवी ’ नीचे गिर पड़ी । गोली लगने से उनकी मृतयु हो चुकी थी लेकिन उनहोंने कई अंग्ेिों को मरने से पहले मार दिया था । महावीरी देवी पसशचमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़फरनगर की थीं महावीरी देवी , जिनहोंने आजादी के लिए प्राण नयौ्ावर कर दिया । उनके साहसी कारनामें यहां लोक गीतों में गाए जाते हैं । �
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