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महाराजा बिजली पा्सी
प्रेरणा किसने दी ? मंगल पांडेय तो तनमयता से अंग्ेिों की नौकरी कर रहे थे और शायद करते रहते अगर मातादीन वा्मीतक उनका परियच देशभसकि से नहीं कराते । लेकिन मातादीन वा्मीतक अछूत जाति से थे । इसलिए उनका नाम तक बताना जरूरी नहीं समझा जाता ।
1857 की क्रांति के बाद पूरे देश में देशभसकि की लहर दौड़ गई और अंग्ेिों को देश से बाहर खदेड़ने के लिए पूरे देश से लोग एकजुट होने लगे थे । 10 जून , 1857 को अंग्रेज़ों की आमवी का एक छोटा दसिा िलॉरेंस हेनरी की कमान में अवध से चिनहट और बाराबंकी जा रहा था । मकका पासी ने 200 पासियों को लेकर उनका रासिा रोका और कई अंग्रेज़ों को मार गिराया , लेकिन िलॉरेंस ने उनहें मार दिया । इसके बावजूद पासी समुदाय के लोगों ने हार नहीं मानी और अवध के बड़े भू-भाग पर कबज़ा
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्सरदार ऊधम त्संह
कर लिया । पासी समुदाय के कई लोगों ने वीरता पूर्वक अंग्ेिों से लोहा लिया । बाद में मायावती ने मुखयमंत्ी बनने के बाद उनके नाम शहीदों में शामिल किया , जिनमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं- महाराजा बिजली पासी , महाराज लखन पासी , महाराजा सुहाल देव , महाराजा छेटा पासी , और महाराजा दाल देव पासी । इसी तरह चेता राम जाटव की बहादुरी के चचवे दूर-दूर तक फैले थे , ऐसा कहा जाता है कि एक दिन महाराजा पटियाला ने एक आदमी को देखा जो एक शेर को पीठ पर लादकर चला जा रहा था । पूछने पर पता चला कि उस आदमी ने बिना हथियार के शेर को मार गिराया है । राजा ने उसे अपनी फ़ौज में शामिल होने के लिए कहा । राजा के कहने पर वह फ़ौज में शामिल हो गया । उस वयसकि का नाम चेता राम जाटव था । अंग्ेिों द्ारा जनता को परेशान करता देख वह उनसे लड़ पड़े जिसके बाद अंग्ेिों ने उनहें गिरफिार कर लिया और पेड़ से बांध कर गोली मार दी ।
बालू राम मेहतर ने भी अंग्ेिों के खिलाफ संघर्ष किया । अंग्ेिों ने उनहें पकड़ लिया और