लगा सकते हैं कि अंग्ेिों के दिलों में बांके का कितना खौफ रहा होगा । उनके 18 साथियों के साथ उनहें फ़ांसी पर लटका दिया गया था ।
गंगा दीन मेहतर गंगू बाबा के नाम से जाने जाते थे । कानपुर के लोग आज भी उनहें सममान के साथ याद करते हैं और उनकी वीरता के किससे सुनाते हैं । वह भंगी जाति के थे और उस दौरान वह पहलवानी करते थे । वह 1857
में अंग्रेज़ों के विरुद्ध सतीचौरा के करीब वीरता से लड़े । कई अंग्रेज़ों को मौत के घाट उतारने के बाद आखिर उनहें गिरफिार कर लिया गया और फांसी पर चढ़ा दिया गया । जब 1857 की क्रांति बात होती है तो सबसे पहला नाम मंगल पांडेय का आता है लेकिन ये बताने की ज़हमत कोई इतिहासकार नहीं उठाता कि मंगल पांडेय को अंग्ेिों से बगावत करने की
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महाराजा ्सतुहाल देव |
गंगा दीन मेहतर |
महाराज लखन पा्सी |
Qjojh 2021 |
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